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23rd August 2026

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बोले- देश में स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर, फिर विदेश से 10 लाख टन आयात क्यों?

चीनी ₹67 किलो, खड़गे ने सरकार से पूछे 3 सवाल : बोले- देश में स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर, फिर विदेश से 10 लाख टन आयात क्यों?

News Affair Team

Sat, Aug 22, 2026

नई दिल्ली.

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने अब राजनीतिक बहस भी तेज कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को चीनी के दाम और घटते स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल भारत में आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि 10 लाख टन कच्ची चीनी ड्यूटी फ्री आयात करने की जरूरत पड़ गई।

खड़गे ने एथेनॉल नीति पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि जब घरेलू बाजार में चीनी की कमी बताई जा रही है, तो गन्ने और अनाज से E20 के लिए एथेनॉल बनाने की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही।

तीन महीने में चीनी ₹19 महंगी

खड़गे ने कहा कि कई शहरों में चीनी की खुदरा कीमत करीब ₹67-70 प्रति किलो तक पहुंच गई है। तीन महीने पहले करीब ₹48 किलो बिकने वाली चीनी अब करीब ₹67 किलो हो गई है। यानी कीमत में लगभग ₹19 प्रति किलो या 40% के आसपास बढ़ोतरी हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से पूछा कि त्योहारों से ठीक पहले आम लोगों पर महंगाई का यह बोझ क्यों पड़ा और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है।

खड़गे के सरकार से तीन सवाल

1. स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर क्यों?
खड़गे ने पूछा कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर कैसे पहुंच गया। निर्यात रोकने और 10 लाख टन चीनी ड्यूटी फ्री आयात करने की स्थिति क्यों बनी?

2. तीन महीने में 40% महंगाई क्यों?
उन्होंने पूछा कि तीन महीने में चीनी के दाम करीब 40% बढ़ने से त्योहारों के समय आम उपभोक्ता पर पड़ रही मार का जिम्मेदार कौन है?

3. E20 नीति की समीक्षा क्यों नहीं?
खड़गे ने सवाल उठाया कि जब देश में चीनी की कमी है और विदेश से आयात करना पड़ रहा है, तब गन्ने और अनाज से एथेनॉल बनाने की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है?

सरकार बोली- एथेनॉल से नहीं बढ़े दाम

केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने शुक्रवार को कहा था कि घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले मांग बढ़ना, मौसम के कारण गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव कीमत बढ़ने की प्रमुख वजहें हैं।

उनके मुताबिक 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 किलो थी, जो बढ़कर ₹56 किलो हुई। वहीं एक्स-मिल कीमत 7-10 दिनों में ₹47-48 से बढ़कर करीब ₹62 किलो तक पहुंच गई। उन्होंने मिलों की ओर से अचानक कीमत बढ़ाने को अनुचित बताया।

सरकार के मुताबिक सितंबर तक पर्याप्त स्टॉक

खाद्य सचिव के अनुसार सितंबर 2026 के अंत तक देश में करीब 33-35 लाख टन चीनी का स्टॉक बचने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए यह पर्याप्त होगा।

चीनी का नया पेराई सीजन करीब 15 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। सरकार को अक्टूबर में 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आने की उम्मीद है। इससे त्योहारों के दौरान सप्लाई सामान्य रहने का दावा किया गया है।

मिलों के शुरुआती स्टॉक में भी कमी

इस बार पेराई सीजन शुरू होने से पहले मिलों के पास करीब 32 लाख टन चीनी का स्टॉक बताया जा रहा है। पिछले साल यह मात्रा करीब 47 लाख टन थी। यानी शुरुआती स्टॉक में करीब 15 लाख टन की कमी है।

2025-26 में देश में चीनी उत्पादन का अनुमान भी घटकर करीब 306 लाख टन रह गया है। शुरुआती अनुमान 343 लाख टन था। गन्ने की फसल को रेड रॉट, टॉप बोरर और ज्यादा बारिश से नुकसान पहुंचने को उत्पादन में कमी की वजह बताया गया है।

गुड़ से लेकर चावल तक महंगे

चीनी के साथ रोजमर्रा की कुछ अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तीन महीने में गुड़ करीब 24%, चावल कनकी 16% और मक्के का आटा करीब 11% तक महंगा हुआ है। इडली रवा/राइस फ्लोर, पशु आहार और पोल्ट्री फीड के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है।

करीब एक दशक बाद फिर विदेश से चीनी

भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है। 2021-22 में भारत ने करीब 1.1 करोड़ टन चीनी का रिकॉर्ड निर्यात किया था। इसके बाद निर्यात में कमी आई।

घरेलू सप्लाई में कमी होने पर भारत ब्राजील जैसे देशों से रॉ शुगर आयात कर उसे घरेलू मिलों में रिफाइन करता है। इससे पहले 2017 में करीब 24 लाख टन चीनी आयात की गई थी। अब करीब एक दशक बाद फिर ड्यूटी फ्री आयात का फैसला लिया गया है।

31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर आयात

घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर बिना ड्यूटी आयात करने की अनुमति दी है। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू की गई है।

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