‘पावस प्रसंग’ की सुरमयी शाम : मुक्ताकाशी मंच पर बिखरे वर्षा ऋतु के रंग; शास्त्रीय गायन, भरतनाट्यम और कथक ने बांधा समां
News Affair Team
Sat, Aug 22, 2026
रायपुर.
बारिश की बूंदों के बीच शुक्रवार शाम रायपुर का महंत घासीदास संग्रहालय परिसर शास्त्रीय सुरों और नृत्य की थाप से गूंज उठा। संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित ‘पावस प्रसंग’ में कलाकारों ने वर्षा ऋतु के रंग, भक्ति और भावनाओं को संगीत और नृत्य के जरिए मंच पर उतारा। मुक्ताकाशी मंच पर हुई सांस्कृतिक संध्या में शास्त्रीय गायन, भरतनाट्यम और कथक की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा।
कार्यक्रम की शुरुआत कक्षा आठवीं की छात्रा अलका कुर्रे के शास्त्रीय गायन से हुई। उनकी सुरमयी प्रस्तुति ने शाम के सांगीतिक माहौल की शुरुआत की। इसके बाद होरित गौर ने भरतनाट्यम प्रस्तुत कर नृत्य की लय, मुद्राओं और भावाभिव्यक्ति से दर्शकों की तालियां बटोरीं।

10 विद्यार्थियों के साथ डॉ. आरती सिंह का कथक रहा खास
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण डॉ. आरती सिंह और उनके 10 विद्यार्थियों की कथक प्रस्तुति रही। कलाकारों ने ‘शिव पंचाक्षर स्तोत्र’ के साथ वर्षा ऋतु की भावभूमि को कथक की ताल, लय, मुद्राओं और भावों के जरिए जीवंत किया।
सामूहिक प्रस्तुति में विद्यार्थियों के कदमों का तालमेल और नृत्य संयोजन खास रहा। भक्ति और प्रकृति के भावों को कथक की भाषा में पेश किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
डॉ. आरती सिंह लखनऊ और रायगढ़ घराने से प्रशिक्षित कथक कलाकार हैं। तीन दशक से अधिक समय से कथक साधना और प्रशिक्षण से जुड़ी डॉ. सिंह दूरदर्शन की मान्यता प्राप्त कलाकार भी हैं। उन्होंने देश-विदेश के कई मंचों पर प्रस्तुति दी है।
‘सियाराम’ से ‘दिव्य ज्योति’ तक नृत्य में रचनात्मक प्रयोग
डॉ. आरती सिंह ने कथक में अलग-अलग विषयों को लेकर कई रचनात्मक प्रस्तुतियां तैयार की हैं। इनमें ‘सियाराम’, ‘फर्स्ट नायिका’ और ‘दिव्य ज्योति’ प्रमुख हैं। ‘दिव्य ज्योति’ स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचारों पर आधारित नृत्य नाटिका है। आगामी माह तिरुपति में भी डॉ. सिंह की प्रस्तुति प्रस्तावित है, जिसमें वह ‘सियाराम’ की प्रस्तुति देंगी।

नई पीढ़ी भी शास्त्रीय कला की ओर बढ़ रही
‘पावस प्रसंग’ में युवा कलाकारों की भागीदारी भी देखने को मिली। भिलाई की कक्षा 10वीं की छात्रा निधि टंडन ने कथक प्रस्तुति में हिस्सा लिया। वह करीब पांच वर्षों से गुरु श्रीमती अमृता सान्याल से कथक का प्रशिक्षण ले रही हैं। कक्षा पांचवीं से कथक सीख रही निधि ने नियमित अभ्यास के जरिए इस शास्त्रीय नृत्य विधा में अपनी पहचान बनानी शुरू की है।

वर्षा के बहाने प्रकृति, भक्ति और उल्लास मंच पर उतरे
‘पावस प्रसंग’ में बारिश को सिर्फ मौसम के तौर पर नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय परंपरा में मौजूद भावनाओं के रूप में पेश किया गया। संगीत और नृत्य के जरिए प्रकृति, भक्ति, उल्लास और संवेदना को मंच पर अभिव्यक्ति मिली।

वरिष्ठ कलाकारों के अनुभव और युवा कलाकारों के उत्साह का मेल कार्यक्रम की खासियत रहा। संस्कृति विभाग की यह पहल शास्त्रीय कलाओं को आम लोगों तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को भारतीय कला परंपरा से जोड़ने की दिशा में एक प्रयास के रूप में सामने आई।
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