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13th June 2026

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राम मंदिर कर्मचारी के घर में मिले 10 लाख रुपए : गोबर के नीचे छिपाकर रखे थे; ट्रस्ट ने SIT जांच की मांग की, कोर्ट में याचिका भी दायर

News Affair Team

Sat, Jun 13, 2026

अयोध्या.

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर उठा विवाद अब और गहराता जा रहा है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में शनिवार को कई नए घटनाक्रम सामने आए। सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूरे प्रकरण की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से कराने की मांग की है। वहीं, मंदिर से जुड़े एक कर्मचारी के घर से करीब 10 लाख रुपए बरामद होने की जानकारी ने मामले को नई दिशा दे दी है।

सूत्रों के मुताबिक, बरामद रकम मंदिर कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से मिली है। बताया जा रहा है कि कुछ नकदी गोबर के ढेर में दबाकर छिपाई गई थी, जबकि कुछ रकम बक्से और अलमारी में रखी हुई थी। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बरामद पैसे किस स्रोत से आए और उनका कथित चढ़ावा विवाद से कोई संबंध है या नहीं।

चढ़ावे की रकम गिनने का काम करता था कर्मचारी

जानकारी के अनुसार 27 वर्षीय लवकुश मिश्रा मंदिर में चढ़ावे की राशि की गिनती से जुड़े कार्य में तैनात था। सूत्रों का दावा है कि उसकी नियुक्ति उसके ससुर की सिफारिश पर हुई थी, जबकि उसका साला अनुकल्प मिश्रा पहले से मंदिर में कार्यरत था।

जांच एजेंसियों ने दोनों से पूछताछ शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों को हिरासत में लेकर विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है।

पिता ने स्वीकारा, घर से मिली नकदी

रुदौली क्षेत्र के मीनापुर ठकुरन फगौली गांव निवासी लवकुश के पिता बच्चूलाल ने घर से नकदी बरामद होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि जांच टीम घर पहुंची थी और तलाशी के दौरान रकम मिली।

हालांकि उन्होंने दावा किया कि फैजाबाद क्षेत्र में बन रहे मकान से उनके बेटे का कोई संबंध नहीं है और निर्माण के लिए उन्होंने अपनी कृषि भूमि गिरवी रखी है।

गांव के लोगों का कहना है कि तलाशी के दौरान छह सदस्यीय टीम पहुंची थी, जिसमें दो लोग पुलिस वर्दी में और चार सादे कपड़ों में थे।

आर्थिक स्थिति में तेजी से बदलाव की चर्चा

गांव में चर्चा है कि मंदिर में नौकरी मिलने के बाद लवकुश की आर्थिक स्थिति तेजी से बदली थी। स्थानीय लोगों का दावा है कि वह पहले कार मैकेनिक का काम करता था, लेकिन पिछले कुछ महीनों में उसका खर्च और रहन-सहन काफी बदल गया था।

हालांकि जांच एजेंसियां अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं और बरामद रकम के स्रोत की पड़ताल की जा रही है।

ट्रस्ट की बैठक के बीच पहुंचे नृपेंद्र मिश्रा

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे नृपेंद्र मिश्रा शनिवार को पांच दिनों के भीतर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे। उन्होंने मंदिर निर्माण से संबंधित बैठक में भाग लिया।

पत्रकारों द्वारा चढ़ावा विवाद को लेकर पूछे गए सवालों पर उन्होंने कहा कि उनका दायित्व केवल निर्माण कार्यों की निगरानी से जुड़ा है और वे उसी सिलसिले में अयोध्या आए हैं।

इससे पहले भी विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट स्तर पर कई दौर की बैठकों में वित्तीय व्यवस्थाओं और लेखा-जोखा पर चर्चा हो चुकी है।

सपा ने उठाए सवाल, इस्तीफे की मांग

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडे ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम आरोपों में सामने आए हैं, उन्हें नैतिक आधार पर अपने पद छोड़कर जांच का सामना करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और राष्ट्रीय भावनाओं का प्रतीक है। ऐसे में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता के आरोपों की पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होनी चाहिए।

भाजपा के वरिष्ठ नेता बोले- मामला गंभीर

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय कटियार ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि मंदिर निर्माण करोड़ों लोगों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को पूरी सच्चाई सामने लानी चाहिए ताकि किसी तरह का संदेह न रहे।

हाईकोर्ट में CBI जांच की मांग

विवाद अब अदालत तक पहुंच चुका है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में एक जनहित याचिका दाखिल कर मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की गई है।

याचिका में चढ़ावे और दान की पूरी व्यवस्था का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से विशेष ऑडिट कराने की भी मांग की गई है। अदालत में इस मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।

PMO तक पहुंचा मामला

भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर स्वतंत्र जांच की मांग की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है।

डॉ. सिंह ने अपने पत्र में चढ़ावे, दान, बैंक खातों, सोना-चांदी, वित्तीय लेन-देन और ऑडिट रिपोर्ट से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग उठाई है।

कैसे होती है चढ़ावे की गिनती

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान की गिनती बैंक कर्मियों और ट्रस्ट प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सीसीटीवी निगरानी के बीच की जाती है। गिनती के बाद रकम को रजिस्टर में दर्ज कर सुरक्षित लॉकर में रखा जाता है और बाद में बैंक खाते में जमा किया जाता है।

ट्रस्ट का मुख्य खाता भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या शाखा में संचालित है। वित्तीय लेखा-जोखा और ऑडिट प्रक्रिया तकनीकी निगरानी व्यवस्था के तहत संचालित होती है।

हजारों करोड़ की संपत्ति और विशाल दान व्यवस्था

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और दान दोनों में लगातार वृद्धि हुई है। ट्रस्ट के आंकड़ों के अनुसार मंदिर निर्माण, भूमि विस्तार और अन्य परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

मंदिर की आय का प्रमुख स्रोत श्रद्धालुओं का दान और जमा धन पर मिलने वाला ब्याज है। इसी कारण चढ़ावे से जुड़े किसी भी आरोप ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और चिंता दोनों को जन्म दिया है।

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