6 दिन के यूरोप दौरे पर रवाना हुए पीएम मोदी : फ्रांस में मैक्रों से मुलाकात; G7 समिट में AI और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर होगी चर्चा
नई दिल्ली.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह छह दिवसीय फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा पर रवाना हो गए। 13 से 18 जून तक चलने वाले इस दौरे में भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी, तकनीकी सहयोग, रक्षा संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री फ्रांस में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे, जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भू-राजनीतिक संकट और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषय एजेंडे में प्रमुख रहेंगे।
प्रधानमंत्री बनने के बाद यह नरेंद्र मोदी का सातवां फ्रांस दौरा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार यात्रा का उद्देश्य भारत और यूरोप के प्रमुख साझेदार देशों के साथ संबंधों को नई दिशा देना है।

नीस में मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता
दौरे के पहले चरण में प्रधानमंत्री मोदी 13 और 14 जून को फ्रांस के नीस शहर में रहेंगे। यहां उनकी फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है।
दोनों नेता रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष अनुसंधान, परमाणु ऊर्जा, व्यापार, जलवायु परिवर्तन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए कई समझौतों पर भी बातचीत हो सकती है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे।
क्या है ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम?
‘भारत इनोवेट्स’ शिक्षा मंत्रालय की एक नई वैश्विक पहल है, जिसकी घोषणा इसी वर्ष भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर के दौरान की गई थी।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप्स, IIT, IISc, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को दुनिया के प्रमुख निवेशकों, तकनीकी कंपनियों और अनुसंधान संगठनों से जोड़ना है।
14 से 16 जून तक चलने वाले इस आयोजन में भारत और फ्रांस के सैकड़ों शोधकर्ता, उद्यमी, वैज्ञानिक और निवेशक भाग लेंगे। सरकार का मानना है कि इससे भारतीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को वैश्विक मंच मिलेगा।
स्लोवाकिया पहुंचेंगे मोदी, इतिहास बनेगा
फ्रांस के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया रवाना होंगे, जहां वे 15 जून तक रहेंगे।
स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रोबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रीनी के साथ उनकी मुलाकात निर्धारित है। विशेष बात यह है कि 1993 में स्लोवाकिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक यात्रा होगी।
विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा मध्य और पूर्वी यूरोप में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का संकेत है। रक्षा, उद्योग, प्रौद्योगिकी और निवेश के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है।
G7 समिट में शामिल होंगे मोदी
16 जून को प्रधानमंत्री मोदी फिर फ्रांस लौटेंगे और 17 जून को एवियां शहर में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
हालांकि भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से विशेष आमंत्रित देश के रूप में प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से इसमें शामिल होते रहे हैं।
इस बार सम्मेलन में निम्नलिखित विषयों पर चर्चा होने की संभावना है-
वैश्विक आर्थिक अस्थिरता
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का नियमन
यूक्रेन युद्ध
मध्य पूर्व की स्थिति
ऊर्जा सुरक्षा
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला
नई तकनीकी साझेदारियां
जलवायु परिवर्तन
सूत्रों के मुताबिक सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई वैश्विक नेताओं से अलग-अलग बैठकें भी हो सकती हैं। इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ संभावित मुलाकात पर भी नजरें टिकी हैं।
आखिर क्या है G7?
G7 यानी ग्रुप ऑफ सेवन दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसके सदस्य देश हैं-
अमेरिका
फ्रांस
ब्रिटेन
जर्मनी
इटली
जापान
कनाडा
पहले रूस भी इसका हिस्सा था और समूह को G8 कहा जाता था। हालांकि 2014 में क्रीमिया संकट के बाद रूस को समूह से बाहर कर दिया गया।
दुनिया की कुल GDP में G7 देशों की हिस्सेदारी अभी भी लगभग 28 प्रतिशत से अधिक है और वैश्विक व्यापार पर इन देशों का बड़ा प्रभाव माना जाता है।
फ्रांस क्यों है भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार?
भारत और फ्रांस के संबंध पिछले कई दशकों से लगातार मजबूत होते रहे हैं। रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग विशेष महत्व रखता है।
फ्रांस भारत को मिराज-2000, राफेल लड़ाकू विमान और स्कॉर्पीन पनडुब्बियां उपलब्ध करा चुका है। रूस के बाद फ्रांस भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद जब कई पश्चिमी देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए थे, तब फ्रांस ने अपेक्षाकृत संतुलित रुख अपनाया और सहयोग जारी रखा।
फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का भी समर्थक रहा है। इसके अलावा न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में भारत की सदस्यता के पक्ष में भी लगातार आवाज उठाता रहा है।
भारत-फ्रांस संबंधों की प्रमुख उपलब्धियां
1964 में पहला अंतरिक्ष सहयोग समझौता
1998 में रणनीतिक साझेदारी की स्थापना
2005 में स्कॉर्पीन पनडुब्बी समझौता
2015 में इंटरनेशनल सोलर एलायंस की स्थापना
2016 में 36 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा
2023 में ‘हॉरिजन 2047’ रोडमैप लॉन्च
भारतीय नौसेना के लिए राफेल-एम और अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की मंजूरी
भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है, प्रधानमंत्री मोदी का यह यूरोप दौरा भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने वाला साबित हो सकता है।
फ्रांस के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग, स्लोवाकिया के साथ नए आर्थिक अवसर तथा G7 मंच पर वैश्विक नेताओं के साथ संवाद भारत को अंतरराष्ट्रीय नीति निर्माण में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर देगा।
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