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9th June 2026

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अयोध्या राम मंदिर से 7 करोड़ की चोरी का दावा : अखिलेश यादव ने कहा- ये आस्था का प्रश्न, जांच होनी चाहिए; चंपत राय बोले- कोई गड़बड़ी नहीं मिली

लखनऊ.

अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी के आरोपों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, जबकि मंदिर ट्रस्ट ने किसी भी वित्तीय अनियमितता से इनकार करते हुए नियमित ऑडिट प्रक्रिया का हवाला दिया है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने दावा किया कि राम मंदिर के दानपात्रों में जमा राशि में 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी हुई है। इसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मामले को उठाते हुए सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता जरूरी है। उनका कहना है कि यदि चढ़ावे की राशि में कोई कमी पाई गई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

ट्रस्ट का जवाब: नियमित ऑडिट में नहीं मिली कोई अनियमितता

आरोपों के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सफाई देते हुए कहा कि ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था बहुस्तरीय निगरानी के तहत संचालित होती है। उनके अनुसार, समय-समय पर आंतरिक ऑडिट किया जाता है जिसमें बैंक प्रतिनिधि भी शामिल रहते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में भी ऑडिट की प्रक्रिया जारी है और अब तक किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी सामने नहीं आई है। ट्रस्ट का दावा है कि दान की गणना, रिकॉर्डिंग और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार होती है।

संत समाज भी बंटा

अविमुक्तेवरानंद सरस्वती ने आरोपों को गंभीर बताते हुए मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

दूसरी ओर, ट्रस्ट से जुड़े संतों और धर्माचार्यों ने आरोपों को राजनीतिक बताया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट के सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और प्रत्येक वित्तीय लेन-देन का दस्तावेजी रिकॉर्ड मौजूद है।

भाजपा ने विपक्ष पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने आरोपों को विपक्ष की राजनीति से प्रेरित बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मंदिर ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और यदि कोई तथ्य सामने आते हैं तो वही उचित मंच पर जवाब देगा। भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर बिना प्रमाण आस्था के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।

कैसे होती है चढ़ावे की निगरानी?

राम मंदिर में प्राप्त दान की गणना बैंक कर्मचारियों और ट्रस्ट प्रतिनिधियों की मौजूदगी में की जाती है। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी के दायरे में रहती है। गिनती के बाद राशि को सुरक्षित लॉकर में रखा जाता है और बाद में बैंक खाते में जमा किया जाता है। ट्रस्ट का मुख्य बैंकिंग संचालन भारतीय स्टेट बैंक के माध्यम से होता है।

करोड़ों की आस्था, पारदर्शिता की मांग

राम मंदिर देश और दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ा कोई भी आरोप स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाता है। फिलहाल आरोप और प्रत्यारोप के बीच कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। ऐसे में सभी पक्षों की निगाहें ट्रस्ट की ऑडिट प्रक्रिया और संभावित स्पष्टीकरण पर टिकी हुई हैं।

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