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26th May 2026

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ट्विशा शर्मा मौत केस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त : CJI बोले- मीडिया ट्रायल न हो; CBI जांच के संकेत, 3 अदालतों में सुनवाई

भोपाल/नईदिल्ली.

भोपाल की 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा मौत मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और भोपाल की लोकल कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि जांच को सनसनीखेज बनाने के बजाय निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। अदालत ने मीडिया ट्रायल और सार्वजनिक बयानबाजी पर भी सख्त टिप्पणी की।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि ट्विशा का दूसरा पोस्टमॉर्टम और अंतिम संस्कार हो चुका है। अब जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने देना चाहिए।

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा, हमें दुख है कि इस मामले को जिस तरह हैंडल किया गया। हम मीडिया से अनुरोध करेंगे कि केवल परिवारों के बयानों के आधार पर निष्कर्ष न निकाले जाएं।

सुप्रीम कोर्ट बोला- ‘न्यायपालिका पर सवाल उठाना गलत’

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए। कोर्ट ने कहा कि मामले को इस तरह पेश किया जा रहा है, जैसे न्यायपालिका जांच को प्रभावित कर रही हो।

CJI ने कहा,

हमने इस मामले में कोई राय व्यक्त नहीं की है। पहले से निष्कर्ष निकालना गलत है। जांच एजेंसियों और न्याय व्यवस्था पर भरोसा होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी और संभावित गवाह मीडिया में बयान देने से बचें और जो भी जानकारी हो, वह जांच एजेंसी के सामने रखें।

CBI जांच की तैयारी, तुषार मेहता ने दी जानकारी

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से मामला CBI को सौंपा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर लिया और उम्मीद जताई कि एजेंसी जल्द जांच शुरू करेगी।

सूत्रों के मुताबिक, DoPT से नोटिफिकेशन मिलते ही CBI केस दर्ज कर सकती है।

तुषार मेहता ने अदालत में कहा,

मामले को सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि मीडिया के कारण कई तथ्य भी सामने आए हैं।

गिरिबाला सिंह के इंटरव्यू पर भी सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा की सास और पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह के मीडिया इंटरव्यू पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि आखिर आरोपियों के इंटरव्यू क्यों किए जा रहे हैं।

CJI ने कहा कि किसी भी पक्ष की बयानबाजी जांच को प्रभावित कर सकती है और पुलिस का मनोबल भी गिरा सकती है।

13 दिन पहले हुई थी ट्विशा की मौत

33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।

वहीं ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा ड्रग एडिक्ट थीं। रविवार को भोपाल AIIMS में दूसरा पोस्टमॉर्टम होने के बाद सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।

दूसरे पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आने में समय

दिल्ली AIIMS की फॉरेंसिक टीम ने भोपाल AIIMS में करीब तीन घंटे तक दूसरा पोस्टमॉर्टम किया। टीम फोटो, वीडियो और मेडिकल रिकॉर्ड अपने साथ दिल्ली ले गई है।

फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. सुधीर कुमार गुप्ता ने बताया कि हिस्टोपैथोलॉजी और विसरा जांच अभी बाकी है, इसलिए अंतिम रिपोर्ट आने में समय लगेगा।

जांच में उठ रहे 5 बड़े सवाल

1. गले पर दो निशान क्यों?

पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गले पर दो समानांतर लिगेचर मार्क दर्ज किए गए। परिवार ने सवाल उठाया कि सामान्य फांसी के मामलों में ऐसे निशान कम मिलते हैं।

2. फंदा जब्त करने में देरी

परिजनों का आरोप है कि शुरुआती जांच में कथित फंदा न डॉक्टरों को सौंपा गया और न पुलिस ने तुरंत जब्त किया। बाद में 15 मई को फंदा बरामद किया गया।

3. शरीर पर चोट के निशान

रिपोर्ट में बाएं हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोटों का जिक्र है। परिवार का दावा है कि ये चोटें संदिग्ध परिस्थितियों की ओर इशारा करती हैं।

4. हायॉइड बोन सुरक्षित क्यों?

विशेषज्ञों के मुताबिक फांसी के कई मामलों में हायॉइड बोन प्रभावित होती है। पहली रिपोर्ट में इसे सुरक्षित बताया गया, जिस पर सवाल उठे हैं।

5. लंबाई को लेकर विवाद

पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ट्विशा की लंबाई 166 सेंटीमीटर दर्ज है, जबकि परिवार 172 सेंटीमीटर बता रहा है। वकीलों ने रिपोर्ट की सटीकता पर सवाल उठाए हैं।

कोर्ट रूम में क्या-क्या हुआ

सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि FIR दर्ज करने में तीन दिन की देरी हुई और सबूतों को सुरक्षित रखने में भी लापरवाही बरती गई।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा,

हम सभी पक्षों से अपील कर रहे हैं कि कोई भी समय से पहले बयान न दे। जांच एजेंसियों को निष्पक्ष तरीके से काम करने दें।

सुप्रीम Court ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सबसे जरूरी निष्पक्ष जांच है और सभी पक्षों को जांच प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए।

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