Advertisment

News Affair में आपका हार्दिक स्वागत है — आपकी अपनी हिंदी न्यूज़ पोर्टल, जहाँ हर खबर मिलती है सही, सटीक और सबसे पहले।

हमारे साथ जुड़िए देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों, राजनीति, खेल, मनोरंजन, व्यापार और तकनीक की हर बड़ी अपडेट के लिए। हम हैं आपकी आवाज़, आपके सवाल और आपकी जिज्ञासा के साथ — निष्पक्ष, निर्भीक और नई सोच के साथ।

6th July 2026

ब्रेकिंग

नाना से मिली महाभारत सुनाने की प्रेरणा; 13 साल की उम्र में पहली बार किया गायन

वारदात के बाद खुद पर भी किया हमला; जमीन की रजिस्ट्री को लेकर था विवाद

शादी के तीसरे दिन ब्यूटी पार्लर जाने की बात कहकर निकली, फिर नहीं लौटी

6 महीने से फरार था राजेश मरकाम; आगजनी, पुलिस पर पथराव, महिला कॉन्स्टेबल की वर्दी फाड़ी

बिलासपुर रूट की 5 ट्रेनें 20 से 40 दिन तक रद्द; कई का बदलेगा रास्ता

पद्म विभूषण पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का निधन : नाना से मिली महाभारत सुनाने की प्रेरणा; 13 साल की उम्र में पहली बार किया गायन

रायपुर.

छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को दुनिया के मंच तक पहुंचाने वाली पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का शनिवार देर रात निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं। रात करीब 3:15 बजे रायपुर एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली। पिछले लंबे समय से वे उम्रजनित बीमारियों से जूझ रही थीं और कुछ दिनों से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। उनके निधन की खबर मिलते ही कला, साहित्य और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

तीजन बाई ने अपनी बुलंद आवाज, जीवंत अभिनय और अद्भुत मंच प्रस्तुति से पंडवानी को नई पहचान दी। उन्होंने महाभारत की कथाओं को केवल गाया नहीं, बल्कि अपने अभिनय और भावाभिव्यक्ति से जीवंत कर दिया। यही कारण रहा कि छत्तीसगढ़ की यह पारंपरिक लोकगायन शैली देश की सीमाओं से निकलकर दुनिया के कई देशों तक पहुंची।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी असाधारण प्रतिभा से छत्तीसगढ़ की लोक कला को वैश्विक पहचान दिलाई। उनका निधन भारतीय कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी के माध्यम से राज्य की संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

बीमारी के दौरान पीएम ने खुद फोन कर पूछा था हाल

करीब आठ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं फोन कर तीजन बाई के स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। एक नवंबर 2025 को उन्होंने उनकी बहू वेणु देशमुख से बातचीत कर इलाज और स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। प्रधानमंत्री ने उस समय हरसंभव सहायता का भरोसा देते हुए कहा था कि तीजन बाई छत्तीसगढ़ की संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं और उनके इलाज में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।

नाना से मिली महाभारत सुनने और गाने की प्रेरणा

24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई पारधी समुदाय से थीं। बचपन में वे अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कथाएं गाते-सुनाते सुनती थीं। वहीं से उनके भीतर पंडवानी के प्रति गहरा लगाव पैदा हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने पूरी कथाएं याद कर लीं। उनकी प्रतिभा को पहचानकर लोकगायक उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें विधिवत प्रशिक्षण दिया।

सिर्फ 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी। उस दौर में महिलाएं केवल बैठकर 'वेदमती शैली' में पंडवानी गाती थीं, जबकि खड़े होकर अभिनय के साथ प्रस्तुति देना पुरुषों तक सीमित था। तीजन बाई ने इस परंपरा को तोड़ा और पहली महिला बनीं जिन्होंने 'कापालिक शैली' में पंडवानी प्रस्तुत कर इतिहास रच दिया।

समाज से बहिष्कार झेला, लेकिन नहीं छोड़ा गायन

तीजन बाई का सफर संघर्षों से भरा रहा। परंपराओं को तोड़कर मंच पर खड़े होकर पंडवानी गाने के कारण उन्हें अपने ही समाज के विरोध का सामना करना पड़ा। यहां तक कि उन्हें सामाजिक बहिष्कार भी झेलना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपनी कला नहीं छोड़ी। यही जिद आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी और उन्होंने दुनिया भर के प्रतिष्ठित मंचों पर भारत की लोक परंपरा का प्रतिनिधित्व किया।

स्कूल नहीं गईं, फिर भी चार विश्वविद्यालयों ने दी डी.लिट.

आर्थिक परिस्थितियों के कारण तीजन बाई कभी नियमित रूप से स्कूल नहीं जा सकीं। बाद में साक्षरता अभियान के जरिए उन्होंने बुनियादी शिक्षा हासिल की। औपचारिक शिक्षा सीमित होने के बावजूद उनकी कला और सांस्कृतिक योगदान को देखते हुए देश के चार विश्वविद्यालयों ने उन्हें डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डी.लिट.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया।

भारतीय लोक कला में अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया गया।

दो साल से चल रहा था इलाज

करीब दो वर्षों से तीजन बाई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। हाल के दिनों में सांस लेने में तकलीफ और उम्र से जुड़ी अन्य जटिलताओं के कारण उन्हें रायपुर स्थित एम्स में भर्ती कराया गया था। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी, लेकिन शनिवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली।

लोक संस्कृति की ऐसी विरासत, जिसे भुलाया नहीं जा सकेगा

तीजन बाई ने केवल पंडवानी नहीं गाई, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा, संस्कृति और महाभारत की कथाओं को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम किया। उनकी आवाज, अभिनय और मंचीय ऊर्जा ने लोककला को नया सम्मान दिलाया। उनके निधन के साथ भारतीय लोकसंगीत ने अपनी सबसे सशक्त आवाजों में से एक को खो दिया है, लेकिन उनकी कला आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी।

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन