सुप्रीम कोर्ट ने SIR को ठहराया वैध : वोटर लिस्ट पुनरीक्षण पर चुनाव आयोग की बड़ी जीत; 7.41 करोड़ नाम हटे
नईदिल्ली.
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। बिहार में शुरू हुई SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने चुनाव आयोग के पक्ष में फैसला दिया और कहा कि SIR पूरी तरह वैध और संवैधानिक प्रक्रिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि निर्वाचन आयोग ने अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत यह प्रक्रिया शुरू की है और इसे गैर-कानूनी या असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि वोटर लिस्ट को शुद्ध और विश्वसनीय बनाने के लिए विशेष पुनरीक्षण करना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है।

कोर्ट बोला- चुनाव आयोग ने अधिकारों का सही इस्तेमाल किया
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि SIR को केवल इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि यह सामान्य वोटर लिस्ट रिवीजन प्रक्रिया से अलग है।
अदालत ने कहा,
निर्वाचन आयोग ने अपनी शक्तियों का प्रयोग कानून के दायरे में रहकर किया है। यह प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुरूप है।
हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटने का मतलब उसकी नागरिकता खत्म होना नहीं है। नागरिकता का फैसला केवल सक्षम प्राधिकारी ही कर सकता है।
संदिग्ध नागरिकता वाले मामलों पर केंद्र को रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि जिन लोगों के नाम संदिग्ध नागरिकता के आधार पर हटाए गए हैं, उनकी जानकारी चार हफ्ते के भीतर केंद्र सरकार को भेजी जाए।
कोर्ट ने माना कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार रखता है, लेकिन नागरिकता तय करने का अधिकार उसके पास नहीं है।
बिहार से शुरू हुई प्रक्रिया अब 13 राज्यों-UT तक पहुंची
SIR प्रक्रिया जून 2025 में बिहार से शुरू हुई थी। अब तक यह 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी हो चुकी है। इस दौरान कुल 7.41 करोड़ वोटर्स के नाम सूची से हटाए गए हैं।
सबसे ज्यादा 2.89 करोड़ नाम उत्तर प्रदेश में हटाए गए। बिहार के बाद पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी SIR कराया गया, जबकि असम में स्पेशल रिवीजन (SR) किया गया। दिल्ली में 30 जून से SIR प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।
दूसरे और तीसरे चरण में कई राज्य शामिल
SIR के पहले चरण में बिहार शामिल था। दूसरे चरण में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, गोवा और पुडुचेरी समेत 9 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल किए गए।
तीसरे चरण में 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी दल लगातार SIR प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस अभियान के जरिए लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की कोशिश हो रही है।
विपक्ष का कहना है कि बिहार में पिछले 22 वर्षों में कई चुनाव हो चुके हैं। ऐसे में अब अचानक बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट की समीक्षा पर सवाल उठते हैं।
विपक्षी नेताओं ने यह भी पूछा कि अगर SIR इतना जरूरी था तो इसकी घोषणा चुनाव से ठीक पहले क्यों की गई। उनका तर्क है कि यह प्रक्रिया चुनाव के बाद भी कराई जा सकती थी।
जानिए क्या है SIR प्रक्रिया
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR एक विशेष सत्यापन प्रक्रिया है, जिसमें वोटर लिस्ट की गहन जांच की जाती है। इसका मकसद मतदाता सूची को ज्यादा सटीक और पारदर्शी बनाना होता है।
इस प्रक्रिया में चुनाव आयोग की टीमें घर-घर जाकर मतदाताओं और उनके दस्तावेजों का सत्यापन करती हैं। पुराने रिकॉर्ड से मिलान किया जाता है और फॉर्म भरवाए जाते हैं।
किन नामों को हटाया जाता है
SIR के दौरान फर्जी, डुप्लीकेट या मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके लोगों की एंट्री भी सूची से हटाई जाती है। साथ ही पात्र नागरिकों के नए नाम जोड़े जाते हैं।
प्रारंभिक सूची जारी होने के बाद लोगों को आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया जाता है। आपत्तियों की सुनवाई के बाद अंतिम वोटर लिस्ट प्रकाशित की जाती है।
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