नेपाली PM बोले- हमने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया : संसद में कहा- दोनों देश बैठकर इस पर समाधान निकाले; लिपुलेख पर ब्रिटेन बने मध्यस्थ
काठमांडू.
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत-नेपाल सीमा विवाद को लेकर एक बड़ा और विवादित बयान दिया है। संसद में दिए गए अपने जवाब में उन्होंने कहा कि सिर्फ भारत ने ही नेपाली जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि कुछ स्थानों पर नेपाल की ओर से भी भारतीय क्षेत्रों पर दावा या अतिक्रमण जैसी स्थिति बनी है।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें इस विवाद की व्यापक जानकारी मिली और अब इस मुद्दे का समाधान केवल कूटनीतिक बातचीत से ही संभव है।
उन्होंने संसद में कहा, “दोनों देशों को बैठकर इस पूरे मामले की जांच करनी चाहिए और समाधान निकालना चाहिए।”
लिपुलेख और मानसरोवर मार्ग पर फिर तनाव
भारत-चीन व्यापार और कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिपुलेख मार्ग को लेकर पूछे गए सवाल पर पीएम शाह ने कहा कि नेपाल इस मुद्दे पर पहले ही भारत को औपचारिक राजनयिक नोट भेज चुका है और जवाब भी मिल चुका है।
यह पूरा विवाद लिपुलेख दर्रा और कालापानी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जिसे दोनों देश अलग-अलग ऐतिहासिक दावों के आधार पर अपना हिस्सा बताते हैं।
नेपाल का दावा है कि 1816 की सुगौली संधि के अनुसार यह क्षेत्र उसका हिस्सा है, जबकि भारत इसे ऐतिहासिक और प्रशासनिक रूप से अपना क्षेत्र बताता है।
संसद में पहली बार संबोधन
यह पहली बार है जब मार्च में चुनाव जीतने के बाद पीएम बालेन शाह ने संसद को संबोधित किया। विपक्ष लगातार मांग कर रहा था कि प्रधानमंत्री देश के प्रमुख मुद्दों पर संसद में जवाब दें।
संसद सत्र के दौरान श्रम शक्ति पार्टी के सांसद आरेन राय ने यह सवाल उठाया था, जिसके जवाब में यह बयान सामने आया।
ब्रिटेन तक पहुंचा मुद्दा, नेपाल का दावा
पीएम शाह ने यह भी कहा कि नेपाल ने इस विवाद को लेकर केवल भारत और चीन ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन से भी बातचीत की है, क्योंकि इसकी जड़ें ब्रिटिश काल की सीमा व्यवस्था से जुड़ी हैं।
नेपाल सरकार पहले भी दावा कर चुकी है कि इस क्षेत्र में ऐतिहासिक गलतियों की समीक्षा जरूरी है।
नेपाल की ओर से यात्रा मार्ग पर रोक की अपील
3 मई को नेपाल ने बयान जारी कर भारतीय तीर्थयात्रियों से लिपुलेख मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा न करने की अपील की थी।
इस पर भारत ने स्पष्ट किया था कि यह मार्ग दशकों से उपयोग में है और यह कोई नया विवाद नहीं है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: काली नदी से जुड़ा विवाद
दोनों देशों के बीच सीमा निर्धारण काली नदी सीमा सिद्धांत पर आधारित है। भारत का दावा है कि नदी की पूर्वी धारा सीमा तय करती है, जबकि नेपाल पश्चिमी धारा को आधार मानता है।
इसी वजह से कालापानी और आसपास के क्षेत्र पर दोनों देशों के बीच दशकों से विवाद बना हुआ है।
रणनीतिक महत्व भी बड़ा कारण
यह क्षेत्र भारत, नेपाल और चीन की सीमा पर स्थित एक महत्वपूर्ण ट्राई-जंक्शन है। यहां से भारत की सुरक्षा एजेंसियां सीमावर्ती गतिविधियों पर नजर रखती हैं।
भारतीय सेना ने 1962 के युद्ध के बाद यहां उपस्थिति बढ़ाई थी और वर्तमान में ITBP की तैनाती है।
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