जयपुर में पटाखा गोदाम में आग, बच्चे समेत 8 की मौत : सड़क पर तड़पते रहे झुलसे लोग; अवैध रूप से रिहायशी इलाके में हो रहा था संचालित
जयपुर.
जयपुर के खोह नागोरियान थाना क्षेत्र स्थित पटाखा फैक्ट्री में मंगलवार सुबह करीब 11 बजे भीषण आग ने आठ लोगों की जान ले ली। मृतकों में एक बच्चा और दो भाई भी शामिल है। हादसे में गंभीर रूप से झुलसा एक मजदूर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।
पटाखा फैक्ट्री आयशा नगर तलाई क्षेत्र आईटीआई कॉलेज के पास थी। मरने वालों में अब्दुल वाहिद (50), राबिल (16), बिलाल खान (30), समीर (20), आजीम खान (18) उर्फ आविद, अशरफ (40) और नासिर खान (25) शामिल हैं। एक मृतक की शिनाख्त नहीं हुई है।
आजीम और बिलाल सगे भाई थे l बिलाल आज छोटे भाई आजीम की फैक्ट्री देखने गया था, जहां आजीम काम करता था। वहां बैठकर दोनों बातचीत कर रहे थे। इस दौरान लगी आग में दोनों झुलस गए थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग लगने के कुछ ही देर बाद गोदाम से लगातार धमाकों की आवाजें आने लगीं। देखते ही देखते पूरा परिसर आग की चपेट में आ गया और आसपास के इलाके में दहशत फैल गई। कई लोग जान बचाने के लिए घरों से बाहर निकल आए।
मलबे और आग के बीच फंसे रह गए मजदूर
हादसे में अब्दुल वाहिद, बिलाल, समीर और अजीम उर्फ आविद सहित पांच लोगों की पहचान हो चुकी है, जबकि दो अन्य मृतकों की शिनाख्त की प्रक्रिया जारी है। गंभीर रूप से घायल नासिर को एसएमएस अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया है।
अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार नासिर का शरीर करीब 95 प्रतिशत तक झुलस चुका है और उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
रिहायशी इलाके में चल रहा था गोदाम
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार जिस स्थान पर आग लगी, वहां बड़ी मात्रा में पटाखों और अन्य ज्वलनशील सामग्री का भंडारण किया गया था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गोदाम घनी आबादी वाले क्षेत्र में संचालित किया जा रहा था।
जयपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि संबंधित गोदाम वैध अनुमति के बिना रिहायशी इलाके में संचालित हो रहा था। हादसे के बाद परिसर को सील कर दिया गया है और गोदाम मालिक सहित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।

लोगों ने खुद बचाए कई लोगों के प्राण
घटना के दौरान स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों को बाहर निकाला। क्षेत्र के निवासी हाशिम अंसारी ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलते ही लोग पानी के टैंकर और पाइप लेकर मौके पर पहुंचे।
उन्होंने बताया कि तीन से चार लोगों को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि अंदर फंसे अन्य लोगों तक पहुंचना संभव नहीं हो सका। लोगों को बचाने के दौरान कई स्थानीय निवासी भी झुलस गए।
धमाकों से दहल गया पूरा इलाका
आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि आग लगने के बाद लगातार ऐसे धमाके हो रहे थे जैसे गैस सिलेंडर फट रहे हों। कई परिवारों ने एहतियातन अपने घर खाली कर दिए।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अमला और आपदा राहत टीम घटना के काफी देर बाद मौके पर पहुंची। तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी और भारी नुकसान हो चुका था।
विधायक ने उठाए गंभीर सवाल
घटना के बाद क्षेत्रीय विधायक अमीन कागजी ने प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि घनी आबादी वाले इलाके में बारूद और पटाखों का गोदाम संचालित हो रहा था, लेकिन किसी जिम्मेदार विभाग को इसकी जानकारी नहीं होना गंभीर लापरवाही है।
उन्होंने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले लोग चाहे किसी भी राज्य के हों, उनकी मौत की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
कॉलोनी की वैधता पर भी सवाल
जिला प्रशासन ने उस कॉलोनी की स्थिति को लेकर भी रिपोर्ट तलब की है जहां गोदाम संचालित किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि संबंधित क्षेत्र की भूमि और निर्माण की वैधता की भी जांच की जाएगी।
तहसीलदार और पटवारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वहां किस प्रकार की गतिविधियों की अनुमति थी और प्रशासनिक स्तर पर कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।
जांच के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
हादसे के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री आबादी के बीच कैसे रखी जा रही थी। पुलिस, नगर निकाय और संबंधित विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
फिलहाल फोरेंसिक टीम और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल से साक्ष्य जुटा रहे हैं। आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
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