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28th August 2026

ब्रेकिंग

5 सदस्यीय समिति ने शुरू किया ड्राफ्ट पर काम; लोगों से ली जाएगी राय

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शीतकालीन सत्र में विधानसभा में पेश होगा UCC विधेयक : 5 सदस्यीय समिति ने शुरू किया ड्राफ्ट पर काम; लोगों से ली जाएगी राय

News Affair Team

Fri, Aug 28, 2026

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि UCC से जुड़ा विधेयक विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। इससे पहले प्रस्तावित कानून का मसौदा तैयार करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने काम शुरू कर दिया है।

गुरुवार को रायपुर के न्यू सर्किट हाउस स्थित कन्वेंशन हॉल में समिति की राज्य स्तरीय परिचयात्मक बैठक हुई। इसमें करीब 200 प्रबुद्ध नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और कानून विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया। बैठक का मकसद UCC के संभावित प्रावधानों, उनके सामाजिक असर और व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा करना रहा।

कानून बनाने से पहले अलग-अलग वर्गों से लिए जाएंगे सुझाव

राज्य सरकार सीधे मसौदा तैयार करने के बजाय समाज के अलग-अलग वर्गों से सुझाव लेने की प्रक्रिया अपना रही है। समिति धार्मिक, सामाजिक और विधिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी चरणबद्ध संवाद करेगी।

सरकार का कहना है कि UCC का प्रारूप तैयार करते समय अलग-अलग समुदायों के अधिकारों, परंपराओं और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा। समिति सभी पक्षों की राय और मौजूदा कानूनों के अध्ययन के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।

शादी से लेकर विरासत और गोद लेने तक आएंगे दायरे में

UCC के तहत विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए समान कानूनी व्यवस्था तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार देने तथा अलग-अलग पर्सनल लॉ से जुड़ी कानूनी जटिलताओं को कम करने पर भी फोकस रहेगा।

अनुच्छेद 44 को बनाया गया आधार

समान नागरिक संहिता का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 44 में किया गया है। इसमें राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसी संवैधानिक प्रावधान को आधार बनाते हुए UCC के अध्ययन और ड्राफ्ट तैयार करने के लिए समिति गठित की है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति

UCC समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति में शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह सदस्य हैं। समिति राज्य में लागू मौजूदा नागरिक कानूनों और विभिन्न समुदायों के पर्सनल लॉ का अध्ययन करेगी। इसके बाद UCC का प्रारूप तैयार कर सरकार को सौंपेगी।

किन कानूनों और मामलों की होगी समीक्षा?

समिति मुख्य रूप से इन विषयों पर अध्ययन करेगी—

  • विवाह और विवाह की उम्र

  • तलाक और भरण-पोषण

  • संपत्ति और उत्तराधिकार

  • दत्तक ग्रहण

  • लिव-इन संबंध

  • महिलाओं और पुरुषों के समान अधिकार

  • विभिन्न समुदायों के मौजूदा पर्सनल लॉ

समिति इन विषयों पर कानूनी और सामाजिक पहलुओं का अध्ययन करने के साथ यह भी देखेगी कि समान व्यवस्था को राज्य में व्यावहारिक रूप से कैसे लागू किया जा सकता है।

समिति की रिपोर्ट के बाद सरकार लेगी अगला फैसला

समिति अपनी रिपोर्ट के साथ UCC का प्रस्तावित ड्राफ्ट और जरूरी विधायी व प्रशासनिक सुझाव सरकार को देगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मुताबिक, व्यापक अध्ययन और सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।यदि शीतकालीन सत्र में विधेयक पेश होता है, तो छत्तीसगढ़ UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा।

देश में अभी कहां लागू है UCC?

उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां आधुनिक समान नागरिक संहिता लागू की गई। गुजरात और असम ने भी 2026 में UCC से संबंधित विधेयक पारित किए हैं।वहीं गोवा में लंबे समय से एक समान नागरिक संहिता जैसी व्यवस्था लागू है। इसे गोवा सिविल कोड कहा जाता है, जिसकी जड़ें पुर्तगाली शासनकाल के 1867 के सिविल कोड से जुड़ी हैं। 1961 में गोवा के भारत में विलय के बाद भी यह व्यवस्था जारी रही। हालांकि, इसमें कुछ समुदायों के लिए विशेष प्रावधान होने के कारण इसे पूर्ण आधुनिक UCC के समान नहीं माना जाता।

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