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17th August 2026

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इजराइल चुनाव में नेतन्याहू को झटका! : आइजेनकोट की यशार 4 सीट आगे; बहुमत से विपक्ष सिर्फ 3 कदम दूर

News Affair Team

Sun, Aug 16, 2026

तेल अवीव.

इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। गुरुवार को सामने आए जमान इजराइल के सर्वे में पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट की नई पार्टी यशार को 25 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जबकि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 21 सीटों पर सिमट सकती है।

यानी मौजूदा अनुमान में यशार ने लिकुड पर 4 सीटों की बढ़त बना ली है। पिछले कुछ सर्वे में भी आइजेनकोट की पार्टी आगे रही थी, लेकिन अंतर बेहद कम था। इस बार बढ़त का अंतर बढ़ने से चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

विपक्ष बहुमत के करीब, लेकिन सरकार बनाना आसान नहीं

इजराइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी नेता को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। सर्वे के मुताबिक नेतन्याहू विरोधी दलों के 'चेंज ब्लॉक' को 58 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं नेतन्याहू समर्थक दलों को 50 सीटें मिल सकती हैं। अरब पार्टियों के खाते में 12 सीटें जाने का अनुमान है।

इस लिहाज से विपक्षी खेमा बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से सिर्फ 3 सीट दूर है। हालांकि चुनाव के बाद गठबंधन की तस्वीर साफ होने तक सरकार गठन को लेकर स्थिति अनिश्चित बनी रहेगी।

आइजेनकोट का दावा- सबसे बड़ी पार्टी के नेता को मिले मौका

पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट ने संकेत दिया है कि नेतन्याहू विरोधी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी के नेता को प्रधानमंत्री पद का मौका मिलना चाहिए।

विपक्षी खेमे में पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और याइर लैपिड भी प्रभावशाली चेहरे हैं। लैपिड की पार्टी 'बीयाचद' ने विपक्षी सरकार के गठन में बाधा नहीं बनने की बात कही है, लेकिन आइजेनकोट को प्रधानमंत्री बनाने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट रुख नहीं बताया है।

कौन हैं गादी आइजेनकोट?

आइजेनकोट लंबे समय तक इजराइली सेना में रहे हैं। वे 2015 में इजराइली सेना के 21वें चीफ ऑफ स्टाफ बने और 2019 में करीब 41 साल की सैन्य सेवा के बाद रिटायर हुए।

इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। 2022 में वे नेसेट पहुंचे। हमास के हमले के बाद उनकी पार्टी नेतन्याहू सरकार में शामिल हुई, लेकिन 2024 में उन्होंने सरकार से इस्तीफा दे दिया। 2025 में उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी यशार बनाई।

इजराइल में सीधे PM को वोट नहीं देते

इजराइल की चुनाव व्यवस्था भारत से अलग है। वहां जनता सीधे प्रधानमंत्री के लिए वोट नहीं करती। मतदाता राजनीतिक पार्टियों को वोट देते हैं और पूरे देश को एक ही चुनाव क्षेत्र माना जाता है।

वोट के अनुपात में 120 सदस्यीय नेसेट में पार्टियों को सीटें मिलती हैं। इसके बाद पार्टियां गठबंधन बनाकर सरकार बनाने की कोशिश करती हैं। जिस नेता के पास 61 या उससे ज्यादा सांसदों का समर्थन होता है, वही सरकार बनाता है। इसलिए सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी का नेता ही प्रधानमंत्री बने, यह जरूरी नहीं है।

आइजेनकोट की सुरक्षा भी बढ़ सकती है

इजराइली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईरान की ओर से इजराइली नेताओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। नेतन्याहू को सरकारी सुरक्षा हासिल है, जबकि आइजेनकोट को फिलहाल प्रधानमंत्री स्तर की सुरक्षा नहीं मिलती। चुनावी अभियान तेज होने के साथ इजराइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट उनकी सुरक्षा बढ़ाने पर विचार कर रही है।

नेतन्याहू के सामने गठबंधन बचाने की चुनौती

नए सर्वे ने नेतन्याहू के सामने सिर्फ लिकुड की सीटें बचाने की चुनौती नहीं खड़ी की है, बल्कि चुनाव के बाद बहुमत जुटाने का सवाल भी बड़ा कर दिया है। दूसरी ओर आइजेनकोट की यशार सबसे बड़ी पार्टी बनने की स्थिति में आती है तो उन्हें अपने पक्ष में 61 सांसद जुटाने होंगे।

27 अक्टूबर का चुनाव इसलिए सिर्फ नेतन्याहू बनाम आइजेनकोट की लड़ाई नहीं होगा, बल्कि यह तय करेगा कि 120 सदस्यीय नेसेट में अगली सरकार के लिए कौन सा गठबंधन बहुमत जुटा पाता है।

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