भारतीय बैडमिंटन में बड़ा बदलाव : जुलाई से 21 नहीं, 15 पॉइंट का होगा हर गेम; ऑल इंडिया रैंकिंग टूर्नामेंट से नए नियम लागू
स्पोर्ट्स डेस्क.
भारतीय बैडमिंटन में जुलाई 2026 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने घरेलू प्रतियोगिताओं में 21 पॉइंट की जगह 15 पॉइंट स्कोरिंग सिस्टम लागू करने का फैसला किया है। नए नियमों की शुरुआत 7 से 14 जुलाई के बीच केरल के एर्नाकुलम स्थित रीजनल स्पोर्ट्स सेंटर में आयोजित ऑल इंडिया सीनियर रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट से होगी।
इसके बाद यही फॉर्मेट देशभर में होने वाली सभी जोनल चैंपियनशिप, घरेलू रैंकिंग प्रतियोगिताओं और राष्ट्रीय चैंपियनशिप में लागू रहेगा। नए नियम अंडर-11 से लेकर मास्टर्स वर्ग तक सभी आयु वर्गों के खिलाड़ियों पर लागू होंगे।

क्या होगा नया स्कोरिंग सिस्टम?
नए प्रारूप में मुकाबले पहले की तरह बेस्ट ऑफ-3 गेम होंगे, लेकिन अब प्रत्येक गेम 21 की बजाय 15 अंक का होगा।
यदि स्कोर 14-14 की बराबरी पर पहुंचता है तो जीत के लिए दो अंकों की बढ़त जरूरी होगी। वहीं यदि मुकाबला 20-20 तक पहुंच जाता है तो अगला अंक हासिल करने वाला खिलाड़ी गेम जीत जाएगा। यानी किसी भी गेम की अधिकतम सीमा 21 अंक तक रहेगी।

ब्रेक और कोर्ट बदलने के नियम भी बदले
नए नियमों के तहत खिलाड़ियों को मिलने वाला मिड-गेम ब्रेक अब 11 की बजाय 8 अंक पर मिलेगा और इसकी अवधि 60 सेकेंड होगी।
तीसरे और निर्णायक गेम में खिलाड़ी 8 अंक पूरे होने पर कोर्ट बदलेंगे। जबकि गेम समाप्त होने के बाद मिलने वाला 120 सेकेंड का ब्रेक पहले की तरह जारी रहेगा। अगले गेम की पहली सर्विस पिछले गेम का विजेता ही करेगा।
अंतरराष्ट्रीय बदलाव से पहले घरेलू तैयारी
BAI महासचिव संजय मिश्रा ने कहा कि घरेलू स्तर पर इस फॉर्मेट को पहले लागू करने का उद्देश्य खिलाड़ियों, कोचों और तकनीकी अधिकारियों को समय रहते नए सिस्टम के अनुरूप तैयार करना है।
उन्होंने बताया कि बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) जनवरी 2027 से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी इसी स्कोरिंग सिस्टम को लागू करने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों को पहले से इस प्रारूप का अनुभव मिल सकेगा।

तेज और रोमांचक होंगे मुकाबले
विशेषज्ञों का मानना है कि 15 पॉइंट फॉर्मेट लागू होने से मैचों की अवधि कम होगी और हर अंक का महत्व पहले से अधिक बढ़ जाएगा। खिलाड़ियों को शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनानी होगी, क्योंकि वापसी के लिए पहले की तुलना में कम अवसर मिलेंगे।
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