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24th October 2026

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मुर्मू ने कहा- बस्तर के युवा जीत सकते हैं अंतरराष्ट्रीय मेडल; जंगल बचाने की अपील

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राष्ट्रपति से बच्ची बोली- कलेक्टर बनूंगी : मुर्मू ने कहा- बस्तर के युवा जीत सकते हैं अंतरराष्ट्रीय मेडल; जंगल बचाने की अपील

News Affair Team

Fri, Oct 23, 2026

जगदलपुर.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर नक्सलवाद से निकलकर विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। यहां के युवाओं में इतनी क्षमता है कि वे अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में देश के लिए मेडल जीत सकते हैं। उन्होंने लोगों से पेड़-पौधों और जंगलों को बचाने की अपील करते हुए कहा कि प्रकृति की रक्षा करना सभी का कर्तव्य है।

राष्ट्रपति गुरुवार को अपने दो दिवसीय बस्तर दौरे के दौरान जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित आमसभा को संबोधित कर रही थीं। इससे पहले उन्होंने मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन-पूजन किया और सिरहासार भवन में आयोजित मुरिया दरबार में मांझी-चालकियों तथा जनजातीय प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने बस्तर दशहरा और जनजातीय संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

राष्ट्रपति बोलीं- मुरिया दरबार जैसी परंपराएं लोकतंत्र का गौरव

राष्ट्रपति ने मुरिया दरबार की परंपरा को लोकतंत्र की ताकत बताया। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान का रास्ता निकालने से जुड़ी है। इससे समाज की खुशहाली का मार्ग प्रशस्त होता है।

उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा की खासियत पूरे समाज की भागीदारी और करीब 75 दिनों तक चलने वाले अनुष्ठान हैं। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन जनजातीय रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

तस्वीरो में देखिए कार्यक्रम...

बोलीं- बस्तर ओलंपिक के युवा अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचें

राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की प्रतिभा और युवाओं की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अवसर मिलने पर यहां के बेटे-बेटियां कई क्षेत्रों में देश का गौरव बढ़ा सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बस्तर ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले युवा आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक में भी मेडल जीतेंगे।

पर्यावरण संरक्षण पर उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे प्रकृति की अनमोल देन हैं। एक पौधे को बड़ा पेड़ बनने में कई साल लगते हैं, इसलिए जंगलों को बचाना और अधिक से अधिक पौधे लगाना जरूरी है। उन्होंने आदिवासी समाज से प्रकृति के प्रति अपनी परंपरागत आस्था को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की अपील की।

प्रदर्शनी में बच्ची से पूछा- बड़ी होकर क्या बनोगी?

आमसभा से पहले राष्ट्रपति ने लालबाग मैदान में बस्तर दशहरा और जनजातीय संस्कृति पर आधारित स्टॉल देखे। इस दौरान वे एक बच्ची से मिलीं और उससे पूछा कि बड़ी होकर क्या बनना चाहती हो। बच्ची ने जवाब दिया- कलेक्टर बनूंगी।

राष्ट्रपति की इस मुलाकात ने प्रदर्शनी में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। बस्तर की संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाजों और जनजातीय विरासत से जुड़ी वस्तुओं को भी उन्होंने करीब से देखा। मुरिया दरबार में शामिल होने वाली वे देश की पहली राष्ट्रपति हैं।

CM साय बोले- माओवाद से मुक्ति के बाद बस्तर का यह दशहरा खास

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बस्तर आना प्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने बस्तर दशहरा को जनजातीय संस्कृति और सामूहिक उत्साह का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवाद से मुक्ति के बाद इस बार का दशहरा खास है और बस्तर पंडुम के माध्यम से यहां की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान मिल रही है।

साय ने कहा कि सरकार बस्तर के अंदरूनी इलाकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रही है। गांवों में बस और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने रायपुर से रावघाट तक रेल सेवा, रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे, जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी और गीदम में मेडिकल कॉलेज का भी उल्लेख किया।

मुरिया दरबार के बाद संपन्न होता है बस्तर दशहरा

धर्म एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बस्तर दशहरा की परंपरा के बारे में बताया कि मुरिया दरबार के बाद पर्व का समापन होता है। इस आयोजन में मांझी-चालकियों, जनजातीय समाज और राजपरिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यह परंपरा बस्तर की विशिष्ट आदिवासी संस्कृति और सामुदायिक व्यवस्था को दर्शाती है।

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