10 दिन बाद फिर निकले प्रेमानंद महाराज : भक्तों के बीच शुरू की पदयात्रा; बोले थे- चिंता मत करो, हम हमेशा साथ हैं
News Affair Team
Thu, May 28, 2026
मथुरा.
वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज ने 10 दिन बाद एक बार फिर अपनी पदयात्रा शुरू कर दी। स्वास्थ्य कारणों से 17 मई से बंद हुई रात्रि पदयात्रा बुधवार तड़के दोबारा शुरू हुई तो हजारों भक्तों में खुशी की लहर दौड़ गई। महाराज केली कुंज आश्रम से निकलकर NRI ग्रीन बिल्डिंग तक पहुंचे और फिर अपने शिष्यों के साथ करीब एक किलोमीटर पैदल चले।
पदयात्रा के दौरान सड़क के दोनों ओर खड़े श्रद्धालु लगातार ‘श्री राधे-राधे’ के जयकारे लगाते रहे। कई भक्त महाराज के दर्शन कर भावुक नजर आए। यात्रा पूरी करने के बाद प्रेमानंद महाराज वापस आश्रम लौट आए।
दरअसल, लगातार खराब स्वास्थ्य के चलते 17 मई से उनकी पदयात्रा और एकांतिक दर्शन स्थगित कर दिए गए थे। उनके शिष्यों ने बताया था कि महाराज की तबीयत ठीक नहीं है और उन्हें आराम की जरूरत है।

दोनों किडनी खराब, नियमित डायलिसिस जारी
प्रेमानंद महाराज लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। बताया जाता है कि उनकी दोनों किडनी प्रभावित हैं और उन्हें सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है। इसी वजह से पिछले दिनों उन्होंने भक्तों से मुलाकात भी सीमित कर दी थी।
17 मई की रात बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन हर दिन की तरह सुबह 3 बजे महाराज पदयात्रा पर नहीं निकले। इसके बाद शिष्यों ने लाउडस्पीकर से घोषणा कर कहा था कि स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण यात्रा अनिश्चितकाल के लिए रोकी जा रही है।
भावुक वीडियो में भक्तों को दिया था संदेश
तीन दिन पहले प्रेमानंद महाराज ने अपने भक्तों के लिए एक भावुक वीडियो संदेश जारी किया था। केली कुंज आश्रम ट्रस्ट के यूट्यूब चैनल पर जारी वीडियो में उन्होंने कहा था कि भक्त चिंता न करें।
उन्होंने कहा था, “हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, लेकिन हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। बिना बोले भी हम आपके मन में रहेंगे।”
वीडियो सामने आने के बाद भक्त लगातार उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे थे।

सौभरी वन तक करते हैं रात्रि पदयात्रा
प्रेमानंद महाराज रोज तड़के करीब 3 बजे वृंदावन स्थित श्रीराधा केली कुंज आश्रम से निकलकर सुनरख खादर के सौभरी वन तक पदयात्रा करते रहे हैं। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी इस यात्रा में हजारों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए जुटते हैं।
सौभरी वन पहुंचने के बाद महाराज श्रद्धालुओं को दर्शन देते और फिर आश्रम लौटकर सत्संग करते थे। आम दिनों में भी दर्शनार्थियों की संख्या हजारों में रहती है, जबकि सप्ताहांत और पर्वों पर यह आंकड़ा लाखों तक पहुंच जाता है।
अब 10 दिन बाद उनकी वापसी से भक्तों में उत्साह लौट आया है। हालांकि आश्रम प्रबंधन ने संकेत दिए हैं कि महाराज की पदयात्रा फिलहाल स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सीमित रखी जाएगी।
13 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर
प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था। उनका बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। तीन भाइयों में वह मंझले हैं।
बताया जाता है कि बचपन से ही उनका झुकाव अध्यात्म की ओर था। कक्षा 8 तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने कम उम्र में ही घर छोड़ दिया और काशी पहुंच गए।
13 साल की उम्र में उन्होंने ब्रह्मचर्य का मार्ग अपनाया। शुरुआती दिनों में उनका नाम ‘आरयन ब्रह्मचारी’ रखा गया। बाद में गुरु गौरी शरण जी महाराज से दीक्षा लेने के बाद वह वृंदावन पहुंचे।

कैसे बने राधावल्लभी संत
वृंदावन पहुंचने के बाद प्रेमानंद महाराज नियमित रूप से बांके बिहारी मंदिर जाने लगे। धीरे-धीरे उनका झुकाव राधावल्लभ संप्रदाय की ओर बढ़ा।
कहा जाता है कि एक दिन परिक्रमा के दौरान उन्होंने एक सखी को राधारससुधानिधि का श्लोक गाते सुना। उस श्लोक का भाव उनके मन में इतना उतर गया कि उन्होंने संन्यास मार्ग छोड़कर राधावल्लभ परंपरा को अपना लिया।
आज प्रेमानंद महाराज देश के सबसे चर्चित संतों में गिने जाते हैं। सोशल मीडिया पर उनके करोड़ों अनुयायी हैं और विराट कोहली-अनुष्का शर्मा समेत कई सेलिब्रिटी भी उनके शिष्य माने जाते हैं।
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