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28th August 2026

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पेट्रोल 105 के पार... छत्तीसगढ़ में बढ़ रही EV की रफ्तार : इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की डिमांड 30% तक बढ़ी; मिडिल क्लास और युवा सबसे बड़े खरीदार

News Affair Team

Sun, May 24, 2026

रायपुर.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के आम लोगों की जेब पर भी दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद देशभर में पेट्रोल महंगा हो रहा है। छत्तीसगढ़ में कई जगह पेट्रोल 105 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है। ऐसे में अब लोग पेट्रोल वाहनों से दूरी बनाकर इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

रायपुर समेत प्रदेश के बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और कारों की बिक्री में पिछले कुछ हफ्तों में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऑटोमोबाइल कारोबारियों का कहना है कि रोजाना आने-जाने वाले नौकरीपेशा लोग, छात्र और छोटे कारोबारी अब पेट्रोल के बढ़ते खर्च से बचने के लिए ई-स्कूटर को बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

रोज का सफर महंगा, EV बना राहत का रास्ता

रायपुर में प्राइवेट नौकरी करने वाले कई लोगों का कहना है कि रोज 30 से 50 किलोमीटर तक सफर करने पर महीने का पेट्रोल खर्च तेजी से बढ़ गया है। पहले जहां बाइक चलाने में सीमित खर्च आता था, अब वही खर्च घरेलू बजट पर दबाव डाल रहा है। ऐसे में कम रनिंग कॉस्ट वाले इलेक्ट्रिक वाहन लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।

ऑटो मोबाइल एक्सपर्ट मुकेश कौशल बताते हैं कि पहले लोग बैटरी बैकअप और रेंज को लेकर EV खरीदने से बचते थे, लेकिन अब बाजार में 150 से 500 किलोमीटर तक की रेंज देने वाले मॉडल उपलब्ध हैं। सरकार की सब्सिडी, टैक्स में राहत और चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ने से लोगों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।

प्रदेश में तेजी से बढ़ रहा EV नेटवर्क

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छत्तीसगढ़ में अब तक करीब 1 लाख 80 हजार से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। पूरे प्रदेश में 270 से ज्यादा पब्लिक चार्जिंग स्टेशन संचालित हो रहे हैं। इनमें रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे शहर सबसे आगे हैं।

रायपुर में फिलहाल EV चार्जिंग का औसत रेट करीब 18 रुपए प्रति यूनिट है। राज्य सरकार आने वाले समय में 1000 नए चार्जिंग स्टेशन शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा 60 हजार से ज्यादा वाहन मालिकों को करीब 125 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जा चुकी है।

सरकार की नीति से बाजार को मिल रहा बढ़ावा

राज्य सरकार की EV नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर गाड़ी की कीमत का 10 प्रतिशत या अधिकतम 1 लाख रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही लाइफ टाइम टैक्स में 50 प्रतिशत तक की छूट भी मिल रही है। यही वजह है कि अब मिडिल क्लास परिवार भी EV को भविष्य का विकल्प मानने लगे हैं।

महिलाएं, युवा और डिलीवरी सेक्टर सबसे आगे

ऑटो कारोबारियों के मुताबिक महिलाओं में इलेक्ट्रिक स्कूटर की मांग तेजी से बढ़ी है। हल्का वजन, आसान ड्राइविंग और कम मेंटेनेंस इसकी बड़ी वजह है। वहीं कॉलेज स्टूडेंट्स और युवा पर्यावरण के प्रति जागरूकता और नई तकनीक के आकर्षण के कारण EV खरीद रहे हैं।

डिलीवरी और ई-कॉमर्स सेक्टर में भी ई-स्कूटर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। फूड डिलीवरी और कूरियर कंपनियां अब पेट्रोल खर्च कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दे रही हैं।

पेट्रोल गाड़ियों से क्यों अलग हैं EV

इलेक्ट्रिक वाहन डीलर हेमंत गोयल बताते हैं कि EV में इंजन ऑयल, क्लच और गियर जैसे पार्ट्स नहीं होते, इसलिए मेंटेनेंस खर्च काफी कम आता है। आवाज कम होने से ध्वनि प्रदूषण भी घटता है और ड्राइविंग अनुभव ज्यादा स्मूद रहता है।

हालांकि चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में चार्जिंग स्टेशन की कमी, चार्जिंग में लगने वाला समय और बैटरी बदलने का खर्च अभी लोगों की चिंता बना हुआ है।

पूरी तरह EV पर शिफ्ट होना अभी आसान नहीं

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल भारत में पेट्रोल और इलेक्ट्रिक वाहन दोनों साथ-साथ चलते रहेंगे। शहरों में रोजमर्रा के उपयोग के लिए EV बेहतर विकल्प बनते जा रहे हैं, लेकिन लंबी दूरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी पेट्रोल वाहन ज्यादा सुविधाजनक माने जाते हैं।

इसके बावजूद जिस तेजी से बाजार बदल रहा है, उससे साफ है कि आने वाले वर्षों में भारत की सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ सकती है।

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