15 सितंबर तक फाइल कर सकेंगे रिटर्न : इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ITR-1 और ITR-4 के एक्सेल यूटिलिटी वर्जन किए जारी; ITR फाइलिंग की प्रक्रिया शुरू
News Affair Team
Fri, May 30, 2025
नई दिल्ली.
वित्त वर्ष 2024-25 (असेसमेंट ईयर 2025-26) के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ITR-1 और ITR-4 फॉर्म की Excel यूटिलिटी को जारी कर दिया है। अब टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर इन फॉर्म्स को डाउनलोड कर सकते हैं और रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
टैक्स डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “टैक्सपेयर्स ध्यान दें, ITR-1 और ITR-4 के लिए Excel यूटिलिटी अब अवेलेबल है।” यह कदम खासतौर पर टैक्सपेयर्स को फाइलिंग में आसानी और डिजिटल प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए उठाया गया है।
कौन-सा ITR फॉर्म किसके लिए?
ITR-1 (सहज फॉर्म)
यह फॉर्म उन रेजिडेंट इंडिविजुअल्स के लिए है,
· जिनकी सालाना आय ₹50 लाख तक है
· आय के स्रोत: सैलरी, एक मकान से आय, ब्याज, अन्य स्रोत
· साथ ही 1.25 लाख तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (112A) और ₹5,000 तक की कृषि आय की अनुमति
ITR-4 (सुगम फॉर्म)
यह फॉर्म उन टैक्सपेयर्स के लिए है:
· जो छोटे कारोबार या प्रोफेशनल इनकम (जैसे दुकानदार, फ्रीलांसर, डॉक्टर आदि) से कमाते हैं
· रेजिडेंट इंडिविजुअल्स, HUF और फर्म्स (LLP को छोड़कर) भर सकते हैं
· कुल इनकम ₹50 लाख से कम होनी चाहिए
· इनकम का कैलकुलेशन सेक्शन 44AD, 44ADA या 44AE के तहत होना चाहिए
· इसमें भी 1.25 लाख रुपए तक का LTCG (112A) शामिल किया जा सकता है
अब 15 सितंबर 2025 तक फाइल कर सकते हैं रिटर्न
27 मई को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने घोषणा की थी कि ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर 2025 कर दी गई है। इस साल ITR फॉर्म और यूटिलिटीज में देरी के कारण रिटर्न फाइलिंग भी देरी से शुरू हुई।

e-Filing यूटिलिटी क्या है और क्यों जरूरी है?
e-Filing यूटिलिटीज वे डिजिटल टूल्स हैं जो टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइलिंग में मदद करते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:
· ऑनलाइन यूटिलिटी: आसान इंटरफेस के साथ, सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए प्री-फिल्ड डेटा वाला टूल
· Excel/JSON यूटिलिटी: प्रोफेशनल्स के लिए, जो डेटा ऑफलाइन भरते हैं और बाद में पोर्टल पर अपलोड करते हैं
ये टूल्स डेटा वैलिडेशन, सही फॉर्मेटिंग और फाइलिंग के लिए जरूरी होते हैं।
समय पर रिटर्न न भरने पर क्या होगा?
अगर 15 सितंबर 2025 तक टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया गया, तो टैक्सपेयर्स को लेट फाइन और ब्याज का सामना करना पड़ेगा:
· आय ₹5 लाख से कम: ₹1,000 लेट फीस
· आय ₹5 लाख से ज्यादा: ₹5,000 लेट फीस
· बकाया टैक्स पर: सेक्शन 234A के तहत हर महीने 1% ब्याज
· लॉस कैरी फॉरवर्ड नहीं होगा, अगर समय से फाइल न किया गया (हाउस प्रॉपर्टी को छोड़कर)
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