रोजमर्रा के सामान हो सकते हैं महंगे : तेल, पैकेजिंग और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का दबाव; कंपनियां कर सकती हैं ‘श्रिंकफ्लेशन’
नई दिल्ली.
आने वाले महीनों में आम लोगों की जेब पर महंगाई का असर और बढ़ सकता है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले कई कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसे तेल, साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट और पैकेज्ड फूड महंगे होने की आशंका जताई गई है। रिसर्च फर्म सिस्टेमेट्रिक्स रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है और वे कीमतें बढ़ाने या पैकेट का वजन घटाने जैसे कदम उठा सकती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक से दो महीनों में कई कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम 3% से 7% तक बढ़ा चुकी हैं। इसकी बड़ी वजह रॉ मटीरियल कॉस्ट में करीब 10% की औसत बढ़ोतरी बताई गई है।
रिटेल महंगाई फिर बढ़ी
देश में खुदरा महंगाई दर अप्रैल में बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई। मार्च में यह 3.40% थी। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेजी इसका मुख्य कारण रही। फूड इन्फ्लेशन अप्रैल में बढ़कर 4.20% दर्ज की गई, जबकि मार्च में यह 3.87% थी।
महंगाई में लगातार बढ़ोतरी से FMCG कंपनियों के सामने लागत और मुनाफे के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती बनता जा रहा है।

कंपनियां अपना सकती हैं ‘ग्रामेज कट’ का तरीका
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कंपनियां केवल कीमतें ही नहीं बढ़ाएंगी, बल्कि ‘श्रिंकफ्लेशन’ या ‘ग्रामेज कट’ का सहारा भी ले सकती हैं।
इसका मतलब है कि पैकेट की कीमत वही रहेगी, लेकिन उसके अंदर मिलने वाले सामान का वजन कम कर दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर 1 किलो की जगह 900 ग्राम या 100 ग्राम की जगह 85 ग्राम पैक बेचा जा सकता है।
पाम ऑयल और पैकेजिंग कॉस्ट में तेज उछाल
कुछ प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में बड़ी तेजी दर्ज की गई है।
HDPE प्लास्टिक, जिसका इस्तेमाल शैंपू बोतल, डिटर्जेंट कंटेनर और पैकेजिंग में होता है, उसकी कीमतों में 56% तक की बढ़ोतरी हुई है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम करीब 32% तक चढ़े हैं।
पाम ऑयल की कीमतें भी 11% तक बढ़ चुकी हैं।
इन लागतों का सीधा असर खाने-पीने के तेल, कॉस्मेटिक्स, पैकेज्ड फूड और घरेलू इस्तेमाल के सामानों पर पड़ सकता है।
कंपनियों के मुनाफे पर दबाव
मार्च तिमाही में ही कई बड़ी कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन पर असर दिखाई देने लगा था। रिपोर्ट के मुताबिक, सालाना आधार पर मार्जिन में करीब 0.50% की गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। कंपनियां दाम बढ़ाकर नुकसान कम करने की कोशिश करेंगी, लेकिन लगातार बढ़ती लागत के कारण मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है।
खपत घटने की भी आशंका
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर महंगाई इसी तरह बढ़ती रही तो उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे बाजार में कुल खपत और बिक्री पर असर पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महंगे होते जरूरी सामान का असर सबसे ज्यादा मध्यम और निम्न आय वर्ग पर दिखाई देगा, क्योंकि उनकी मासिक जरूरतों का बड़ा हिस्सा रोजमर्रा के उपभोग में ही खर्च होता है।
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन