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1st October 2026

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6 साल बाद लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू : पहला जत्था 4 जुलाई को रवाना; अब सिर्फ 38 किमी ट्रेक करना होगा

देहरादून.

करीब छह साल के अंतराल के बाद उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू होने जा रही है। यात्रा का पहला जत्था 4 जुलाई को दिल्ली से रवाना होगा। 50 श्रद्धालुओं का यह दल उसी दिन टनकपुर पहुंचेगा, जहां से 5 जुलाई की सुबह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हरी झंडी दिखाकर उन्हें पिथौरागढ़ के लिए रवाना करेंगे।

इस वर्ष लिपुलेख मार्ग से कुल 10 दलों में 500 श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा करेंगे। प्रत्येक दल में 50 यात्री शामिल होंगे।

धारचूला में होगा पारंपरिक स्वागत

टनकपुर से पिथौरागढ़ पहुंचने के बाद श्रद्धालु धारचूला जाएंगे। यहां कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) और जिला प्रशासन ने यात्रियों के स्वागत की विशेष तैयारियां की हैं। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक छलिया नृत्य के साथ श्रद्धालुओं का स्वागत किया जाएगा।

रात्रि भोजन में स्थानीय पहाड़ी व्यंजन झंगोरे की खीर परोसी जाएगी, जबकि अगले दिन नाश्ते में उपमा, पोहा, आलू के पराठे और पुदीने की चटनी शामिल रहेगी।

गुंजी में होगी स्वास्थ्य जांच, 10 जुलाई को चीन में प्रवेश

यात्रा कार्यक्रम के अनुसार 6 जुलाई को पहला दल गुंजी पहुंचेगा, जहां सभी यात्रियों की अनिवार्य मेडिकल जांच होगी। डॉक्टर उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों की जानकारी भी देंगे।

इसके बाद 8 जुलाई को दल नाभीढांग पहुंचेगा और 10 जुलाई को लिपुलेख दर्रे से होकर तिब्बत (चीन) में प्रवेश करेगा। कैलाश पर्वत की परिक्रमा पूरी करने के बाद पहला जत्था 18 जुलाई को भारत लौटेगा।

सड़क बनने से यात्रा पहले से कहीं आसान

इस बार यात्रा का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि श्रद्धालुओं को अब लंबी पैदल चढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी। भारत और चीन, दोनों ओर सड़क बनने के बाद अधिकांश दूरी वाहन से तय की जाएगी।

यात्रियों को लिपुलेख दर्रे तक मैक्स, बोलेरो और कैंपर वाहनों से पहुंचाया जाएगा। वहां से करीब 200 मीटर पैदल चलने के बाद चीनी प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए वाहनों से आगे की यात्रा होगी।

सिर्फ 38 किलोमीटर का रहेगा ट्रेक

इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा की कुल दूरी करीब 1,738 किलोमीटर होगी। इसमें लगभग 1,690 किलोमीटर वाहन से और केवल 38 किलोमीटर पैदल ट्रेक करना होगा।

2019 से पहले श्रद्धालुओं को धारचूला से लिपुलेख दर्रे तक 60 किलोमीटर से अधिक कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती थी। ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी और दुर्गम रास्तों के कारण यह सफर काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता था। नई सड़क बनने के बाद बुजुर्गों और पहली बार यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मार्ग पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम हो गया है।

सुरक्षा और चिकित्सा के विशेष इंतजाम

यात्रा मार्ग पर भोजन, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था की गई है। गुंजी और नाभीढांग में डॉक्टरों, ऑक्सीजन सिलेंडर और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) संभालेगी।

प्रशासन का कहना है कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और यात्रियों को सुरक्षित, व्यवस्थित एवं सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं।

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