Cash Case Controversy : जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग की तलवार; केंद्र सरकार मानसून सत्र में ला सकती है प्रस्ताव
नईदिल्ली.
केंद्र सरकार कैश कांड में फंसे दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू इस मुद्दे पर सभी दलों से बातचीत कर रहे हैं। मानसून सत्र में यह प्रस्ताव पेश किया जा सकता है। सरकार चाहती है कि इससे पहले जस्टिस वर्मा स्वयं इस्तीफा दे दें।
कैश कांड मामले का पर्दाफाश करीब ढाई महीने पहले हुआ। 14 मार्च, 2025 की रात को जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित बंगले में आग लग गई थी। जब फायर ब्रिगेड पहुंची, तो स्टोर रूम में जले हुए ₹500 के नोटों से भरे बोरे मिले। इसके बाद जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया।


जांच, रिपोर्ट और महाभियोग की सिफारिश
22 मार्च को तत्कालीन CJI ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। 3 मई को समिति ने रिपोर्ट तैयार की और अगले दिन CJI को सौंपी। रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया गया। 8 मई को तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर महाभियोग प्रस्ताव लाने की सिफारिश की।
महाभियोग प्रक्रिया: कैसे हटते हैं हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज
राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों और लोकसभा में 100 सांसदों के हस्ताक्षर से प्रस्ताव पेश किया जा सकता है।
दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित होने पर CJI के माध्यम से जांच समिति बनाई जाती है।
जांच समिति में होते हैं – सुप्रीम कोर्ट के एक जज, एक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक कानूनी विशेषज्ञ।
पुराना मामला भी आया चर्चा में
2018 में सिम्भावली शुगर मिल में ₹97.85 करोड़ के घोटाले के मामले में जस्टिस वर्मा का नाम आया था।
CBI ने उस समय FIR दर्ज की थी।
फरवरी 2024 में एक अदालत ने CBI को जांच दोबारा शुरू करने को कहा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पलट दिया और जांच बंद हो गई।
जस्टिस वर्मा से जुड़े मुख्य घटनाक्रम
14 मार्च – आवास में आग और नकदी बरामद।
22 मार्च – CJI ने जांच समिति बनाई।
24 मार्च – सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने ट्रांसफर की सिफारिश की।
5 अप्रैल – इलाहाबाद हाईकोर्ट में शपथ ली, कोई कार्य नहीं सौंपा गया।
3-4 मई – जांच रिपोर्ट CJI को सौंपी गई।
8 मई – पीएम और राष्ट्रपति को महाभियोग की सिफारिश भेजी गई।
कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा?
जन्म: 6 जनवरी 1969, इलाहाबाद
शिक्षा: हंसराज कॉलेज (दिल्ली), LLB – रीवा यूनिवर्सिटी
वकालत की शुरुआत: 1992
सीनियर वकील: 2013
जज नियुक्ति:
एडिशनल जज – 2014 (इलाहाबाद हाईकोर्ट)
परमानेंट जज – 2016
दिल्ली हाईकोर्ट – अक्टूबर 2021
सरकार की अगली रणनीति
सूत्रों के अनुसार, सरकार इस संवेदनशील मामले पर विपक्ष को विश्वास में लेकर ही आगे बढ़ना चाहती है। मानसून सत्र के दौरान प्रस्ताव लाने की संभावना है, लेकिन सरकार चाहती है कि जस्टिस वर्मा पहले इस्तीफा दे दें।
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