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जस्टिस वर्मा कैश स्कैम : दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज के बंगले में अधजले नोट कांड में नए खुलासे; आग लगने के बाद नकदी हटाई

News Affair Team

Sat, May 31, 2025

नई दिल्ली.

दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश यशवंत वर्मा के लुटियंस स्थित सरकारी बंगले से अधजले नोट मिलने के मामले में जांच समिति की रिपोर्ट ने सनसनी फैला दी है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, आग लगने के बाद जिस स्टोर रूम से अधजली नकदी मिली, वह जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के कब्जे में था।

जांच समिति ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, गवाहों और बयान के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला। समिति ने 50 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए, जिनमें दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा और फायर सर्विस प्रमुख शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 मार्च की रात 11:35 बजे आग लगने के बाद स्टोर रूम से नकदी हटाई भी गई थी।

CJI ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच और महाभियोग की सिफारिश की

22 मार्च को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने एक जांच पैनल गठित किया, जिसने 4 मई को रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया गया, जिसके आधार पर CJI नेइन-हाउस प्रोसीजरके तहत उनके खिलाफ महाभियोग की सिफारिश की।
पैनल में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, हिमाचल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस संधवालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की जज जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थे।

सरकार महाभियोग पर विचार में, विपक्ष को किया जाएगा विश्वास में

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार मानसून सत्र में संसद में महाभियोग प्रस्ताव ला सकती है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने बताया, "हम चाहते हैं कि वे स्वयं इस्तीफा दें। मामला गंभीर है और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।"
इस बीच, जस्टिस वर्मा फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें किसी न्यायिक कार्य से रोक दिया गया है।

पुराना मामला: 2018 में भी घोटाले से जुड़ चुका है नाम

2018 में गाजियाबाद की सिंभावली शुगर मिल में 97.85 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के मामले में जस्टिस वर्मा का नाम आया था। उस वक्त वे मिल के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे। शिकायत ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने की थी, जिस पर CBI ने FIR दर्ज की थी।
हालांकि, जांच बाद में बंद कर दी गई जब सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया।

अधजले नोट और सफाईकर्मियों के बयान

इस घटना ने तब और तूल पकड़ा जब सफाईकर्मियों ने बताया कि 4-5 दिन पहले भी उन्हें 500-500 रुपए के अधजले नोट मिले थे। ये नोट सड़क पर पत्तों में पड़े हुए थे।
21
मार्च को जस्टिस वर्मा के बंगले से 15 करोड़ रुपए की नकदी मिलने की बात सामने आई थी। 14 मार्च को होली के दिन उनके घर में आग लगी थी, जिसके बाद फायर ब्रिगेड की टीम ने स्टोर रूम से बोरियों में भरे अधजले नोट बरामद किए थे।

जांच रिपोर्ट सार्वजनिक, वीडियो और फोटो जारी

22 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जिसमें अधजली नकदी का वीडियो और तीन तस्वीरें भी शामिल थीं। जस्टिस वर्मा ने खुद को फंसाने का आरोप लगाया और कहा, “स्टोर रूम कोई भी सकता है, ये पैसे मेरे नहीं हैं।

अब जस्टिस वर्मा की छह महीने की कॉल डिटेल्स की भी जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायपालिका और सरकार दोनों सतर्क हैं।

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