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2nd June 2026

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वैभव सूर्यवंशी पर IIM इंदौर करेगा रिसर्च : ‘वैभव मॉडल’ से समझेगा कम उम्र में बड़ी सफलता का फॉर्मूला; 15 साल में कैसे बने सिक्सर किंग

इंदौर.

महज 15 साल की उम्र में क्रिकेट जगत में तहलका मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी अब देश के प्रमुख प्रबंधन संस्थानों के लिए भी अध्ययन का विषय बन गए हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) इंदौर ने वैभव की सफलता को समझने और उसका वैज्ञानिक विश्लेषण करने के लिए एक विशेष केस स्टडी शुरू करने का फैसला किया है।

इस अध्ययन को ‘वैभव मॉडल’ नाम दिया गया है। संस्थान का दावा है कि यह देश की पहली ऐसी मल्टी-डिसिप्लिनरी स्टडी होगी, जिसमें खेल, मनोविज्ञान, नेतृत्व और प्रबंधन के विशेषज्ञ मिलकर यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर इतनी कम उम्र में कोई खिलाड़ी असाधारण सफलता तक कैसे पहुंचता है।

सफलता के पूरे इकोसिस्टम का होगा विश्लेषण

IIM इंदौर के निदेशक हिमांशु रॉय के मुताबिक यह अध्ययन केवल वैभव के रिकॉर्ड और प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें उनके परिवार, प्रशिक्षण, मानसिक मजबूती, सामाजिक माहौल, कोचिंग सिस्टम और सपोर्ट नेटवर्क जैसे पहलुओं को भी विस्तार से समझा जाएगा।

उन्होंने कहा कि असाधारण प्रतिभा जन्मजात हो सकती है, लेकिन उसे लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन में बदलने के लिए अनुशासन, सही मार्गदर्शन, मजबूत पारिवारिक समर्थन और दीर्घकालिक सोच की जरूरत होती है। वैभव का सफर इन सभी तत्वों का एक अनूठा उदाहरण है।

क्रिकेट मैदान से मैनेजमेंट क्लासरूम तक

संस्थान की मैनेजमेंट फैकल्टी डॉ. आरती चोपड़ा का मानना है कि यह अध्ययन भविष्य के प्रबंधकों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं के लिए भी उपयोगी साबित होगा। उनका कहना है कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में प्रतिभा को पहचानना और उसे सही दिशा देना सबसे बड़ी चुनौती है।

वैभव की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सीमित उम्र और अनुभव के बावजूद सही माहौल मिलने पर युवा प्रतिभाएं किस तरह असाधारण परिणाम दे सकती हैं।

0.3 सेकंड में फैसला, गेंदबाजों पर भारी

वैभव की बल्लेबाजी का सबसे चर्चित पहलू उनका तेज निर्णय लेने का कौशल माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार वे गेंद को पढ़ने और शॉट चुनने का फैसला लगभग 0.3 सेकंड में कर लेते हैं।

बचपन के कोच मनीष ओझा ने उनकी तकनीक को निखारा, जबकि राजस्थान रॉयल्स के हाई परफॉर्मेंस सेटअप में उनकी बैट स्पीड और शॉट चयन पर लगातार काम हुआ। पूर्व भारतीय बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर और राहुल द्रविड़ भी उनकी मानसिक दृढ़ता और संतुलन की सराहना कर चुके हैं।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव की सबसे बड़ी ताकत निडर मानसिकता है। दबाव की परिस्थितियों में भी उनका खेल स्वाभाविक बना रहता है, जो कम उम्र के खिलाड़ियों में दुर्लभ माना जाता है।

सफलता की ‘डार्क साइड’ भी समझेगा IIM

अध्ययन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उन चुनौतियों पर भी केंद्रित होगा जो कम उम्र में मिली लोकप्रियता के साथ आती हैं। करोड़ों रुपये के कॉन्ट्रैक्ट, सोशल मीडिया की चर्चा, बढ़ती अपेक्षाएं और लगातार प्रदर्शन का दबाव कई युवा खिलाड़ियों के करियर को प्रभावित कर सकता है।

हिमांशु रॉय का कहना है कि संस्थान यह समझना चाहता है कि ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को लंबे समय तक संतुलित और सफल बनाए रखने के लिए किस तरह की संरचना विकसित की जानी चाहिए।

उनके अनुसार यह मॉडल केवल खेल जगत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कॉरपोरेट सेक्टर को भी टैलेंट मैनेजमेंट और लीडरशिप डेवलपमेंट के नए दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है।

IPL 2026 में रिकॉर्डों की झड़ी

वैभव सूर्यवंशी ने IPL 2026 में ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने उन्हें सीजन का सबसे बड़ा सितारा बना दिया। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने 16 पारियों में 776 रन बनाए। उनका औसत 48.50 और स्ट्राइक रेट 237.30 रहा, जो टूर्नामेंट के इतिहास के सबसे विस्फोटक प्रदर्शनों में गिना जा रहा है।

सीजन में उन्होंने एक शतक और पांच अर्धशतक लगाए। सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज के रूप में उन्हें ऑरेंज कैप भी मिली।

क्रिस गेल का रिकॉर्ड तोड़ा

वैभव ने पूरे सीजन में 72 छक्के जड़कर IPL इतिहास का नया रिकॉर्ड बना दिया। इससे पहले एक सीजन में सबसे ज्यादा 59 छक्के लगाने का रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम था, जो 14 वर्षों से कायम था।

इसके अलावा उन्हें ‘सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन’ और ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन’ सहित कुल पांच बड़े अवॉर्ड मिले।

प्रतिभा से आगे की कहानी

IIM इंदौर का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी की कहानी केवल एक क्रिकेटर की सफलता नहीं है, बल्कि यह उस प्रक्रिया का उदाहरण है जिसमें प्रतिभा, मेहनत, परिवार, कोचिंग और मानसिक मजबूती मिलकर असाधारण उपलब्धियां पैदा करती हैं।

यही कारण है कि अब उनका सफर क्रिकेट मैदान से निकलकर देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान के शोध का विषय बनने जा रहा है।

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