CBSE चेयरमैन और सचिव हटाए गए : ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की जांच के निर्देश; री-इवैल्यूएशन शुरू होते ही साइबर अटैक
नईदिल्ली.
CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया। इसके साथ ही OSM सेवा से जुड़े टेंडर और खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी गई है।
उधर, री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही CBSE के पोर्टल पर कथित साइबर हमले की भी जानकारी सामने आई है। बोर्ड का दावा है कि पोर्टल खुलने के कुछ ही समय बाद लाखों की संख्या में एक्सेस प्रयास किए गए, जिनमें बड़ी संख्या अनधिकृत पहुंच से जुड़े थे।
रिजल्ट के बाद शुरू हुआ विवाद
13 मई को CBSE ने 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित किए थे। इस वर्ष पहली बार बड़े पैमाने पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल माध्यम से जांचा गया।
परिणाम जारी होने के बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने मूल्यांकन में गड़बड़ी, गलत उत्तर पुस्तिका अपलोड होने और कम अंक मिलने जैसी शिकायतें दर्ज कराईं। इसके बाद मामला धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर हमले का दावा
CBSE के अनुसार, री-इवैल्यूएशन पोर्टल शुरू होते ही असामान्य ट्रैफिक दर्ज किया गया। बोर्ड का कहना है कि कुछ ही मिनटों में लाखों बार पोर्टल तक पहुंचने का प्रयास किया गया, जबकि सिस्टम फाइलों तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिशें भी सामने आईं।
हालांकि बोर्ड ने दावा किया कि सुरक्षा उपायों के कारण पोर्टल बंद नहीं हुआ और निर्धारित समय तक हजारों छात्र आवेदन करने में सफल रहे।

छात्र ने संसदीय समिति के सामने रखीं आपत्तियां
OSM प्रणाली पर सवाल उठाने वाले छात्रों में रांची के 17 वर्षीय सार्थक सिद्धांत का नाम प्रमुखता से सामने आया है। उन्हें मंगलवार को संसद की स्थायी समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।
सूत्रों के अनुसार, उन्होंने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में कई तकनीकी और प्रक्रियागत कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों के बाद शिक्षा मंत्रालय ने भी पूरे मामले पर CBSE से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
डिजिटल मूल्यांकन पर चार बड़े सवाल
विवाद के दौरान बोर्ड पर कई प्रकार के आरोप लगाए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख आरोप उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली, धुंधली स्कैन कॉपियों के आधार पर मूल्यांकन, टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितता और डेटा सुरक्षा से जुड़े हैं।
दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने दावा किया था कि री-इवैल्यूएशन के दौरान उन्हें जो फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका दिखाई गई, वह उनकी नहीं थी। बाद में CBSE ने तकनीकी त्रुटि की बात स्वीकार की और गलती सुधारने का आश्वासन दिया।
वहीं कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि कई स्कैन कॉपियां इतनी अस्पष्ट थीं कि उन्हें पढ़ना मुश्किल था। इस पर बोर्ड ने कहा कि तकनीकी कारणों से प्रभावित कुछ उत्तर पुस्तिकाओं को प्रक्रिया से अलग किया गया था।
टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
विवाद का एक बड़ा हिस्सा OSM सेवा के लिए चुनी गई कंपनी को लेकर भी है। कुछ छात्रों और तकनीकी विशेषज्ञों ने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही।
हालांकि CBSE ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि टेंडर पूरी तरह सरकारी नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत दिया गया था।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब टेंडर और खरीद प्रक्रिया की अलग से जांच कराई जा रही है।
IIT विशेषज्ञों से भी ली जाएगी मदद
बोर्ड ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और तकनीकी ढांचे की समीक्षा के लिए देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों की सहायता लेने का फैसला किया है।
सूत्रों के अनुसार, सिस्टम की तकनीकी जांच और सुरक्षा ऑडिट के लिए विशेषज्ञों की राय ली जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो।
OSM प्रणाली कैसे करती है काम
ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में सबसे पहले उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया जाता है। इसके बाद उन्हें सुरक्षित सर्वर पर अपलोड किया जाता है। परीक्षक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कॉपी देखकर अंक देते हैं और अंत में सॉफ्टवेयर स्वतः कुल अंक जोड़ देता है।
CBSE का दावा है कि इससे मानवीय त्रुटियों में कमी आती है और परिणाम प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनती है। हालांकि इस वर्ष सामने आए विवादों ने इसकी विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है।
राजनीतिक रंग भी पकड़ रहा मामला
परीक्षाओं और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। इंडियन यूथ कांग्रेस ने देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज करने की घोषणा की है।
संगठन का कहना है कि वह छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न राज्यों में अभियान चलाएगा। इस दौरान छात्र संपर्क कार्यक्रम, प्रदर्शन और अन्य गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
आगे क्या
CBSE के लिए यह विवाद केवल तकनीकी समस्या तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ छात्रों का भरोसा बहाल करने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे सवालों का जवाब देना भी जरूरी हो गया है।
अब सभी की नजरें जांच समिति की रिपोर्ट, तकनीकी ऑडिट और बोर्ड द्वारा उठाए जाने वाले सुधारात्मक कदमों पर टिकी हैं। इन रिपोर्टों से ही तय होगा कि OSM प्रणाली भविष्य में जारी रहेगी या इसमें बड़े बदलाव किए जाएंगे।
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