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7th October 2026

ब्रेकिंग

8-9 अक्टूबर को जगदलपुर में जुटेंगे 15 राज्यों के सचिव; एम-पैक्स, डिजिटल सेवा और भंडारण पर मंथन

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बस्तर में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन : 8-9 अक्टूबर को जगदलपुर में जुटेंगे 15 राज्यों के सचिव; एम-पैक्स, डिजिटल सेवा और भंडारण पर मंथन

News Affair Team

Tue, Oct 6, 2026

रायपुर.

बस्तर में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन होने जा रहा है। 8 और 9 अक्टूबर को जगदलपुर में होने वाले सम्मेलन में 15 राज्यों के सहकारिता सचिव और 14 राज्यों के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार शामिल होंगे। केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी ‘सहकार से समृद्धि’ की दिशा में अगले चरण की कार्ययोजना पर चर्चा करेंगे।

सम्मेलन की अध्यक्षता भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी करेंगे। अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) के प्रबंध संचालक पंकज बंसल और भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ जैन भी इसमें शामिल होंगे।

एम-पैक्स से लेकर सहकारी बैंकिंग तक पर चर्चा

दो दिवसीय सम्मेलन में मल्टीपर्पस प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (एम-पैक्स) के गठन और विस्तार पर प्रमुख रूप से चर्चा होगी। इसके साथ एम-पैक्स के कंप्यूटरीकरण, डिजिटल तकनीक, दुग्ध समितियों के गठन, सहकारी बैंकिंग और ग्रामीण स्तर पर वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के मुद्दे भी एजेंडे में रहेंगे।

एम-पैक्स के माध्यम से उर्वरक और अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता बढ़ाने तथा बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं के साथ समितियों का जुड़ाव मजबूत करने पर भी विचार होगा। सम्मेलन में अगले तीन महीनों की प्राथमिक कार्ययोजना तैयार करने पर जोर रहेगा।

पहले दिन योजनाओं की समीक्षा, दूसरे दिन वित्तीय रोडमैप

सम्मेलन के पहले दिन सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। अलग-अलग राज्य एम-पैक्स और दुग्ध समितियों के गठन, सदस्यता विस्तार, डिजिटल सेवाओं और किसानों को ऋण उपलब्ध कराने के अपने अनुभव साझा करेंगे।

विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना, सहकारी समितियों के कारोबार में विविधीकरण और प्राथमिक समितियों को राष्ट्रीय निर्यात, जैविक और बीज सहकारी संस्थाओं से जोड़ने पर भी चर्चा होगी।

दूसरे दिन नाबार्ड और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम आगामी पांच वर्षों के वित्तीय सहयोग और राज्यवार लक्ष्यों की रूपरेखा रखेंगे। अधिकारियों को बस्तर की एम-पैक्स, लघु वनोपज और जनजातीय सहकारी समितियों का जमीनी मॉडल भी दिखाया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में 515 नए एम-पैक्स

सहकारिता विभाग के अनुसार ‘सहकार से समृद्धि’ अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में 515 नए एम-पैक्स गठित किए गए हैं। इसके अलावा 356 मत्स्य, 364 दुग्ध, 153 लघु वनोपज और 63 महिला बहुउद्देशीय सहकारी समितियां भी बनाई गई हैं।

‘सहकारिताओं में सहकार’ अभियान के तहत जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में 3.18 लाख नए किसानों के खाते खोले गए हैं। एम-पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया गया है। राज्य के 2,058 एम-पैक्स में माइक्रो एटीएम उपलब्ध हैं। इनके माध्यम से अब तक 324 करोड़ रुपए से ज्यादा के लेनदेन किए जाने की जानकारी दी गई है।

725 एम-पैक्स में बने गोदाम

सहकारी समितियों की भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए भी काम किया जा रहा है। आरआईडीएफ योजना के तहत 725 एम-पैक्स में गोदाम बनाए गए हैं। प्रत्येक नए गोदाम की क्षमता 200 मीट्रिक टन रखी जा रही है। जर्जर या गोदाम विहीन 100 एम-पैक्स में नए गोदाम निर्माण की योजना स्वीकृत की गई है। नवगठित 515 एम-पैक्स में भी गोदाम निर्माण प्रस्तावित है।

विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 46 एम-पैक्स चयनित किए गए हैं। इनमें 20 के लिए ऋण स्वीकृत हो चुका है, 9 को एएमआई सब्सिडी मिली है और 6 में निर्माण शुरू हो गया है।

राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं से जुड़ रहे एम-पैक्स

राज्य में उपार्जन के लिए एनसीसीएफ को 14 और नाफेड को 15 जिलों में एजेंसी बनाया गया है। एनसीसीएफ में 2,058 और नाफेड में 412 एम-पैक्स के पंजीयन की जानकारी दी गई है। इसके अलावा 1,681 एम-पैक्स राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति, 1,633 राष्ट्रीय जैविक सहकारी समिति और 1,746 भारतीय बीज सहकारी समिति से जुड़े हैं।

इससे प्राथमिक स्तर की समितियों को सिर्फ कृषि उपज की खरीद तक सीमित रखने के बजाय निर्यात, जैविक उत्पाद और बीज कारोबार जैसी गतिविधियों से जोड़ने का रास्ता तैयार हो रहा है।

एथेनॉल प्लांट से मक्का और गन्ने को मिलेगा बाजार

सहकारी मॉडल के जरिए कृषि उपज का स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन भी सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के प्रमुख उदाहरणों में शामिल होगा। कोंडागांव में 80 KLPD क्षमता का एथेनॉल प्लांट स्थानीय मक्का के उपार्जन और रोजगार से जुड़ा है। वहीं भोरमदेव में PPP मॉडल पर संचालित 80 KLPD संयंत्र सहकारी शक्कर कारखाने के लिए आय का स्रोत बना है।

पंडरिया, अंबिकापुर और बालोद में तीन और एथेनॉल संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। इन परियोजनाओं से कृषि उपज के बेहतर उपयोग, स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की उम्मीद है।

बस्तर का सहकारी मॉडल देश के सामने होगा

जगदलपुर में होने वाले सम्मेलन का एक अहम हिस्सा बस्तर की जमीनी सहकारी व्यवस्था को देश के दूसरे राज्यों के सामने रखना होगा। अधिकारी एम-पैक्स के साथ लघु वनोपज और जनजातीय सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली को समझेंगे।

दो दिन की चर्चा में तय होगा कि सहकारी समितियों को सिर्फ ऋण और उपार्जन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें डिजिटल सेवाओं, भंडारण, कृषि आदानों, प्रसंस्करण, निर्यात और स्थानीय रोजगार से कैसे जोड़ा जाए। यही सम्मेलन की आगामी तीन महीने की कार्ययोजना का आधार बनेगा।

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