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6th October 2026

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छत्तीसगढ़ के EWS-LIG आवास मॉडल को राष्ट्रीय सम्मान; PMAY-U की ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ बनी पहल

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25,413 घरों के लिए बिना सरकारी खर्च जमीन : छत्तीसगढ़ के EWS-LIG आवास मॉडल को राष्ट्रीय सम्मान; PMAY-U की ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ बनी पहल

News Affair Team

Mon, Oct 5, 2026

रायपुर.

शहरी गरीबों के घर के लिए जमीन जुटाने का छत्तीसगढ़ मॉडल अब देश के सामने उदाहरण बना है। निजी कॉलोनियों में EWS और LIG परिवारों के लिए भूमि आरक्षण के जरिए 25,413 आवासों के लिए बिना सरकारी खर्च जमीन उपलब्ध कराने की पहल को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत जमीन उपलब्ध कराने से लेकर किफायती घर बनाने की इस व्यवस्था को ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिली है।

विश्व पर्यावास दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार प्रदान किया। राज्य की ओर से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और SUDA के CEO-सह-राज्य मिशन संचालक, PMAY-U सुमित अग्रवाल ने सम्मान ग्रहण किया।

25,413 घरों के लिए जमीन, सरकारी खजाने पर खर्च नहीं

शहरी क्षेत्रों में EWS और LIG परिवारों के लिए आवास बनाने में सबसे बड़ी चुनौती जमीन की उपलब्धता रही है। छत्तीसगढ़ ने निजी कॉलोनियों में इन वर्गों के लिए भूमि आरक्षण के प्रावधान को प्रभावी तरीके से लागू कर इसका समाधान निकाला।

सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत 25,413 आवासों के लिए जमीन बिना सरकारी खर्च के उपलब्ध हुई है। इसमें PMAY-U 1.0 के तहत 17,790 और PMAY-U 2.0 के तहत 7,623 आवास शामिल हैं।

यानी आवास के लिए जमीन जुटाने का पूरा बोझ सरकारी जमीन खरीदने पर नहीं पड़ा। निजी कॉलोनियों में निर्धारित भूमि आरक्षण के जरिए कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवासीय जमीन उपलब्ध कराई गई।

गरीबों के घर शहर से बाहर नहीं, विकसित कॉलोनियों में

इस व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह है कि EWS-LIG परिवारों के आवास केवल शहरों के बाहरी हिस्सों तक सीमित नहीं रहेंगे। निजी और नियोजित कॉलोनियों में भूमि आरक्षण से इन परिवारों को विकसित शहरी क्षेत्रों में घर मिलने का रास्ता खुला है।

ऐसे आवासों के आसपास सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और दूसरी नागरिक सुविधाओं तक पहुंच भी बेहतर होने की संभावना है। इससे किफायती आवास को शहर के मुख्य विकास से जोड़ने की कोशिश की गई है।

जमीन से निर्माण तक निगरानी

छत्तीसगढ़ में PMAY-U के Affordable Housing in Partnership यानी AHP मॉडल के तहत सिर्फ जमीन उपलब्ध कराने पर ही फोकस नहीं किया गया। परियोजना स्वीकृति, निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और समय पर काम पूरा कराने तक निगरानी की व्यवस्था बनाई गई है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और SUDA ने नगरीय निकायों के साथ समन्वय कर इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इसी समग्र व्यवस्था को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ माना है।

CM साय बोले- पक्का घर सुरक्षा और सम्मान का आधार

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस सम्मान के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, SUDA और नगरीय निकायों की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि EWS और LIG परिवारों के लिए भूमि आरक्षण और AHP के जरिए किफायती आवास उपलब्ध कराने की पहल को राष्ट्रीय पहचान मिलना प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रहा है। उनके मुताबिक पक्का घर सिर्फ चार दीवारें और छत नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे और जरूरतमंदों को मूलभूत सुविधाओं से युक्त बेहतर घर मिलें।

अरुण साव बोले- जमीन से घर तक बनाई व्यवस्था

उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने शहरी गरीबों के आवास के लिए केवल योजना बनाने तक खुद को सीमित नहीं रखा। जमीन की उपलब्धता से लेकर किफायती घर के निर्माण तक प्रभावी व्यवस्था विकसित की गई।

उन्होंने कहा कि EWS-LIG के लिए भूमि आरक्षण और AHP मॉडल को मिला राष्ट्रीय सम्मान विभाग और नगरीय निकायों की टीम के ठोस प्रयासों की पहचान है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि जरूरतमंद परिवारों को तेजी से सम्मानजनक और किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए टीम को और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करेगी।

क्यों खास है छत्तीसगढ़ का मॉडल?

छत्तीसगढ़ की पहल में तीन बातें सबसे अहम हैं, निजी कॉलोनियों में EWS-LIG के लिए भूमि आरक्षण, सरकारी खर्च के बिना आवास के लिए जमीन की उपलब्धता और AHP के जरिए किफायती आवास का निर्माण।

इससे एक तरफ सरकार के सामने जमीन जुटाने की चुनौती कम हुई, वहीं दूसरी ओर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विकसित शहरी क्षेत्रों में आवास उपलब्ध कराने का रास्ता बना। इसी व्यवस्था को विश्व पर्यावास दिवस पर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना छत्तीसगढ़ के आवास मॉडल की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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