कनॉट प्लेस में प्रदर्शन से रोज ₹200 करोड़ का कारोबार प्रभावित : व्यापारियों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से तुरंत राहत नहीं, कहा- सब समझदारी दिखाएं
नई दिल्ली.
दिल्ली के कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित होने की आशंका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया। व्यापारियों ने दावा किया कि प्रदर्शन और सेंट्रल पार्क बंद होने से बाजार में रोजाना करीब ₹200 करोड़ से ₹250 करोड़ तक का कारोबार प्रभावित हो सकता है। याचिका दिल्ली किराना कमेटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिएशन ने दायर की थी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने मामला उठाया गया। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि प्रदर्शन करने, मूंगफली बेचने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत जैसे मुद्दे आपस में जुड़े हैं। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे और छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी प्रभावित नहीं होगी। मामले पर विस्तृत सुनवाई दशहरा अवकाश के बाद 26 अक्टूबर को किए जाने की बात सामने आई है।

सेंट्रल पार्क बंद, व्यापारियों ने जताई नुकसान की आशंका
CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने 16 और 17 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क बंद रखने का आदेश दिया। व्यापारियों का कहना है कि कनॉट प्लेस में त्योहार और शादी के सीजन के दौरान बड़ी संख्या में ग्राहक आते हैं। ऐसे समय में प्रदर्शन, रास्तों पर प्रतिबंध और पार्क बंद होने से दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और दूसरे छोटे कारोबारियों की कमाई प्रभावित हो सकती है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने यह भी दावा किया कि 10 अक्टूबर से जारी प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों को करीब ₹2,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। यह आंकड़ा व्यापारिक संगठनों की ओर से पेश किया गया दावा है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

कोर्ट बोला- छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी भी अहम
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के अधिकार और कारोबार पर उसके असर के बीच संतुलन की जरूरत पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि छोटे दुकानदार इन्हीं दिनों में अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं और उनके नुकसान का असर पूरे परिवार पर पड़ सकता है।
पीठ ने तत्काल राहत देने से इनकार किया, लेकिन यह भी संकेत दिया कि यदि प्रदर्शन या प्रशासनिक पाबंदियों के कारण कारोबारियों को गैरकानूनी या असंगत नुकसान पहुंचता है, तो मुआवजे के सवाल पर विचार किया जा सकता है।
व्यापारियों की तीन प्रमुख मांगें

व्यापारियों का तर्क है कि विरोध दर्ज कराने का अधिकार बना रहना चाहिए, लेकिन इसकी वजह से छोटे दुकानदारों और रोज कमाकर खाने वाले लोगों की आजीविका पर गंभीर असर नहीं पड़ना चाहिए।
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने की कार्रवाई
CJP ने 10 अक्टूबर को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। दिल्ली पुलिस ने उस प्रदर्शन को रोकने के लिए कार्रवाई की। पार्टी के नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं।
इसके बाद CJP ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम का आह्वान किया। इस प्रदर्शन को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की और पार्क बंद रखने का फैसला लिया।

दिल्ली में सुरक्षा और यातायात पर भी असर
प्रदर्शन को देखते हुए कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई। दिल्ली पुलिस ने यातायात के लिए एडवाइजरी जारी की और लोगों को प्रभावित सड़कों से बचने तथा वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी। सेंट्रल पार्क को दो दिन बंद रखने के फैसले से भी इलाके में आवाजाही और कारोबार को लेकर चिंता बढ़ी।
प्रदर्शन रोकने के लिए पुलिस की ओर से की गई व्यापक तैयारियों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में केंद्रीय बलों की तैनाती, बैरिकेडिंग और निगरानी बढ़ाने की जानकारी दी गई है। हालांकि, ट्रेनों को बड़े पैमाने पर रद्द करने, बस बुकिंग की जांच और हजारों लोगों की हिरासत जैसे सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
प्रदर्शन का अधिकार और कारोबार की सुरक्षा, दोनों पर नजर
कनॉट प्लेस का मामला अब केवल एक प्रदर्शन स्थल तक सीमित नहीं है। इसमें शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था, यातायात और व्यापारियों की आजीविका जैसे सवाल एक साथ सामने आए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल आदेश नहीं दिया है। अब आगे की सुनवाई में यह देखा जाएगा कि प्रदर्शन और प्रशासनिक पाबंदियों से कारोबार पर कितना असर पड़ा और यदि नुकसान हुआ, तो उसके लिए मुआवजे या अन्य राहत का आधार बनता है या नहीं।
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