सौरभ हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी : पति के शव के 5 टुकड़े कर नीले ड्रम में भरे थे; मां बोली- दोनों फंदे पर लटकेंगे तभी मिलेगा न्याय
News Affair Team
Fri, Oct 16, 2026
मेरठ.
पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मेरठ की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। सजा का ऐलान होते ही सौरभ की मां रेनू देवी रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से उन्हें राहत मिली है, लेकिन बेटे को न्याय पूरी तरह तभी मिलेगा, जब दोषियों को फांसी दी जाएगी।
सौरभ की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। अभियोजन के मुताबिक, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में रखकर सीमेंट का घोल डाला गया था, ताकि अपराध के सबूत मिटाए जा सकें।
सजा सुनाते हुए जज ने कहा-
अधर्म के काम पर सजा देना धर्म होता है। मुस्कान-साहिल आप दोनों ने ही सौरभ की नृशंस हत्या की है। इसलिए माफी स्वीकार नहीं होगी।
सजा सुनते ही रोने लगे मुस्कान और साहिल
फैसला सुनाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। सुनवाई के दौरान दोनों भावुक होकर रोने लगे।

अदालत ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या कहना चाहती है। मुस्कान ने अपनी बच्चियों का ख्याल रखने की बात कही। इसके बाद वह खामोश हो गई। साहिल से भी सवाल किया गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।
फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि दोनों ने सौरभ की नृशंस हत्या की है और उन्हें माफी नहीं दी जा सकती। अदालत की टिप्पणी और सजा के ऐलान के बाद सौरभ के परिवार ने फैसले पर प्रतिक्रिया दी।
मां बोलीं- फांसी के दिन मिलेगा पूरा न्याय
फैसले के बाद सौरभ की मां रेनू देवी ने कहा कि अदालत ने उन्हें न्याय दिया है, लेकिन उनकी पीड़ा तब खत्म होगी जब दोनों को फांसी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वह शुरू से ही दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग कर रही थीं।

सौरभ के भाई राहुल उर्फ बबलू ने भी कहा कि जिस बेरहमी से उनके भाई की हत्या की गई, उसमें फांसी से कम सजा उन्हें मंजूर नहीं थी। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला न्याय की दिशा में अहम कदम है, लेकिन परिवार दोषियों को फांसी पर लटकते देखना चाहता है।
मेरठ कोर्ट परिसर के बाहर फैसले के बाद कुछ वकीलों ने लड्डू बांटे। उनका कहना था कि जघन्य अपराध के मामले में अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है।
नीले ड्रम में मिला था सौरभ का शव

सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में अभियोजन के अनुसार, मुस्कान और साहिल ने हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए और उन्हें नीले ड्रम में रखा। इसके बाद ड्रम में सीमेंट का घोल डाला गया था।
जांच के बाद दोनों के खिलाफ मुकदमा चला। अदालत ने सुनवाई के बाद दोनों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। हालांकि, मौत की सजा पर अंतिम फैसला कानूनी पुष्टि और अपील की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू हो सकता है।
फांसी की सजा पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की पुष्टि जरूरी
जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे के मुताबिक, मृत्युदंड के फैसले को हाईकोर्ट से पुष्टि मिलना जरूरी है। इसके बाद दोषियों को सुप्रीम कोर्ट में अपील का अवसर भी मिल सकता है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दया याचिका का विकल्प भी उपलब्ध रहता है।

इस प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, यह अदालतों में होने वाली सुनवाई और आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्भर करेगा। फिलहाल सजा सुनाए जाने के बाद मामला अगले कानूनी चरण में जाएगा।
मुस्कान की छोटी बेटी को लेकर भी चर्चा
मुस्कान ने जेल में रहते हुए 24 नवंबर 2025 को बेटी को जन्म दिया था। सरकारी वकील के मुताबिक, बच्ची की उम्र छह साल होने तक मुस्कान को फांसी नहीं दी जाएगी। इस संबंध में अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के लिखित फैसले और लागू प्रावधानों के आधार पर स्पष्ट होगी।
सौरभ के परिवार ने बच्ची की देखभाल और उसके भविष्य को लेकर भी चिंता जताई है। राहुल ने कहा कि परिवार पहले बच्ची का DNA टेस्ट कराने पर विचार कर रहा था, लेकिन बाद में उसने इस दिशा में आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया।
मुस्कान के माता-पिता प्रमोद रस्तोगी और कविता ने भी अदालत को पत्र भेजकर कहा था कि वे मुस्कान और उसकी छोटी बेटी से संबंध नहीं रखना चाहते। बच्ची की देखभाल और रहने की व्यवस्था को लेकर आगे संबंधित अधिकारियों की भूमिका अहम होगी।


मेरठ जेल में आखिरी फांसी 1975 में हुई थी
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में आखिरी बार 1975 में मुजफ्फरनगर के करम सिंह को फांसी दी गई थी। उसके बाद यहां किसी को फांसी नहीं दी गई।
मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद जेल में फांसी की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, दोनों की सजा पर अंतिम स्थिति हाईकोर्ट और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
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