25 साल में सिंचाई का दायरा 25 हजार हेक्टेयर से ज्यादा बढ़ा : दुर्ग संभाग में 118 परियोजनाएं, 1,349 किमी नहरें; 42 हजार से अधिक किसानों को मिला लाभ
News Affair Team
Fri, Oct 16, 2026
दुर्ग.
छत्तीसगढ़ गठन के बाद बीते 25 वर्षों में तांदुला जल संसाधन संभाग ने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है। वर्ष 2000 में संभाग के अंतर्गत 97 सिंचाई परियोजनाएं संचालित थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर 118 हो गई है। नहरों का नेटवर्क भी 1,148 किलोमीटर से बढ़कर 1,349 किलोमीटर तक पहुंच गया है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, अविभाजित दुर्ग जिले में सिंचित रकबा 87,930 हेक्टेयर से बढ़कर 1,13,538 हेक्टेयर हो गया है।
विभाग का कहना है कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, जल संरक्षण और तकनीकी सुधारों से किसानों को लाभ पहुंचा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों के तहत जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और अंतिम खेत तक पानी पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

25 साल में 21 सिंचाई परियोजनाएं बढ़ीं
राज्य गठन के समय तांदुला जल संसाधन संभाग के अंतर्गत 97 सिंचाई परियोजनाएं थीं। अब यह संख्या 118 हो गई है। इस दौरान नहरों की लंबाई में भी करीब 201 किलोमीटर की वृद्धि हुई है।
सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नहरों की लाइनिंग, जल वितरण संरचनाओं की मरम्मत, गेट स्वचालन और अन्य तकनीकी उपाय अपनाए गए हैं। विभाग के अनुसार, इन प्रयासों का उद्देश्य नहरों में पानी की बर्बादी कम करना और खेतों तक जल की आपूर्ति बेहतर बनाना है।

खरखरा-शिवनाथ पाइपलाइन और तांदुला योजना पर जोर
दुर्ग और बालोद क्षेत्र में जलापूर्ति तथा सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए दो प्रमुख परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
खरखरा-शिवनाथ नदी पाइपलाइन योजना: करीब ₹1,520 करोड़ की परियोजना।
तांदुला ऑगुमेंटेशन सहगांव उद्वहन सिंचाई योजना: करीब ₹238 करोड़ की परियोजना।
विभागीय जानकारी के मुताबिक, इन परियोजनाओं से लगभग 18 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिली है। उद्वहन सिंचाई व्यवस्था के जरिए उन क्षेत्रों तक भी पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, जहां भौगोलिक स्थिति के कारण सामान्य नहर प्रणाली से जलापूर्ति कठिन होती है।
42 हजार से ज्यादा किसानों को सिंचाई सुविधा
तांदुला जल संसाधन संभाग के अनुसार, उसकी सिंचाई व्यवस्था से 42 हजार से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। सिंचाई उपलब्ध होने से किसानों को फसल उत्पादन की बेहतर संभावनाएं मिलती हैं और खेती के लिए वर्षा पर निर्भरता कम हो सकती है।
विभाग ने फसलों में पानी के बेहतर इस्तेमाल के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा देने की बात कही है। कृषक जल उपयोगिता समितियों के माध्यम से जल वितरण में किसानों की भागीदारी बढ़ाने का भी प्रयास किया जा रहा है। सिंचाई आधारित कृषि के साथ प्रसंस्करण, छोटे कृषि उद्योग और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी ग्रामीण आजीविका के अवसरों से जोड़ने पर जोर है।
भू-जल बढ़ाने के लिए 565 रिचार्ज और सोक पिट
जल संरक्षण के तहत विभाग ने इस वर्ष भू-जल पुनर्भरण के लिए 265 रिचार्ज पिट और 300 सोक पिट के निर्माण की जानकारी दी है। इसके अलावा तालाबों, बांधों और अन्य जल संरचनाओं के रखरखाव, गाद निकालने और मरम्मत जैसे काम किए जा रहे हैं।
विभाग का लक्ष्य वर्षा जल को अधिक से अधिक जमीन में समाहित कर भू-जल स्तर को सहारा देना और उपलब्ध जल संसाधनों का संतुलित उपयोग करना है। जल शक्ति अभियान के तहत लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने की गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं।
ड्रोन सर्वे से डिजिटल निगरानी तक
जल संसाधनों के प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाने के लिए विभाग ने DGPS, ड्रोन सर्वेक्षण और GIS मैपिंग जैसी तकनीकों को अपनाया है। इनके जरिए परियोजनाओं के स्थलों का सर्वेक्षण और जल संरचनाओं का मानचित्रण किया जा रहा है।
विभागीय विवरण के मुताबिक, रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम (RTMS) से नहरों और जलाशयों की निगरानी में मदद मिल रही है। वहीं ई-ऑफिस और ऑनलाइन प्रोजेक्ट ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
आगे नहरों का आधुनिकीकरण और सौर पंपों पर फोकस
विभाग की आगामी योजनाओं में सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का विस्तार, नहरों का आधुनिकीकरण और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंपों को बढ़ावा देना शामिल है। इसके साथ ही कुछ एनीकट को बैराज में बदलने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
तांदुला जल संसाधन संभाग के सामने अब चुनौती बढ़े हुए सिंचाई नेटवर्क का प्रभावी रखरखाव करने, जल का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने और बदलती जरूरतों के अनुसार जल प्रबंधन को मजबूत बनाने की है।
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