शारदीय नवरात्र... 9 दिन में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा : जानें किस दिन किस देवी की आराधना, पूरे व्रत नहीं रख सकते तो 3 दिन का भी विधान
धर्म डेस्क.
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर से हो गई है। अगले नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होगी। पहले दिन घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। हर दिन देवी के एक अलग स्वरूप की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता में इन नौ रूपों को शक्ति, तप, साहस, समृद्धि, मातृत्व और सिद्धि का प्रतीक माना जाता है।
इस बार 19 अक्टूबर को महाष्टमी और महानवमी की पूजा एक ही दिन पड़ रही है, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। जो श्रद्धालु पूरे नौ दिन व्रत नहीं रख पाते, उनके लिए देवी भागवत पुराण से जुड़ी मान्यताओं में तीन दिन उपवास का विधान भी बताया जाता है।
नौ दिन, नौ देवियां: जानें हर स्वरूप की विशेषता

1. मां शैलपुत्री — पर्वतराज की पुत्री
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री और मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है। मां के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल होता है। वे वृषभ यानी बैल पर सवार रहती हैं। उनकी पूजा को दृढ़ता, धैर्य और नई शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है।
2. मां ब्रह्मचारिणी — तप और संयम की प्रतीक
दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल रहता है। यह स्वरूप तपस्या, साधना, त्याग और आत्मसंयम का प्रतीक माना जाता है। भक्त उनसे कठिन परिस्थितियों में धैर्य और संकल्प बनाए रखने की प्रेरणा लेते हैं।
3. मां चंद्रघंटा — साहस और शक्ति का स्वरूप
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है। उन्हें साहस, पराक्रम और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है। उनका स्वरूप भक्तों को निर्भय होकर कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा देता है।
4. मां कूष्मांडा — सृजन और ऊर्जा की देवी
चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसलिए उन्हें सृष्टि, ऊर्जा और प्रकाश से जोड़कर देखा जाता है। भक्त उनसे जीवन में उत्साह, सकारात्मकता और समृद्धि की कामना करते हैं।
5. मां स्कंदमाता — ममता और वात्सल्य का प्रतीक
पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। वे अपनी गोद में भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद को धारण करती हैं। उनका स्वरूप मातृत्व, स्नेह और करुणा का प्रतीक है। श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और संतान के कल्याण की कामना से उनकी आराधना करते हैं।
6. मां कात्यायनी — पराक्रम और धर्म की रक्षा
छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। उन्हें देवी दुर्गा का योद्धा स्वरूप माना जाता है। धार्मिक कथाओं में उन्होंने दुष्ट शक्तियों के विरुद्ध युद्ध किया। उनका स्वरूप साहस, न्याय और धर्म की रक्षा का संदेश देता है।
7. मां कालरात्रि — भय और अंधकार का नाश
सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना होती है। उनका स्वरूप उग्र माना जाता है, लेकिन भक्तों के लिए वे शुभ फल देने वाली देवी हैं। उन्हें भय, अज्ञान और नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण उन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।
8. मां महागौरी — पवित्रता और शांति की देवी
आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है। उनका स्वरूप श्वेत वस्त्रों और शांति से जुड़ा है। धार्मिक मान्यता में वे पवित्रता, शांति और करुणा का प्रतीक हैं। महाष्टमी पर कई परिवार विशेष पूजा, हवन और कन्या पूजन भी करते हैं।
9. मां सिद्धिदात्री — सिद्धि और पूर्णता का स्वरूप
नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। उनके नाम का अर्थ है सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी। उन्हें ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। महानवमी पर भक्त विशेष पूजा-अर्चना, हवन और कन्या पूजन के साथ नवरात्रि साधना का समापन करते हैं।
नवरात्रि में रोज कैसे करें पूजा?
सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल की सफाई करें और दीपक जलाकर भगवान गणेश का स्मरण करें। इसके बाद कलश और मां दुर्गा की पूजा करें। प्रतिदिन संबंधित देवी के स्वरूप का ध्यान कर चंदन, रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप और फल-मिठाई अर्पित की जा सकती है।
श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दुर्गा चालीसा, देवी स्तुति, दुर्गा मंत्र या दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। शाम को आरती कर प्रसाद बांटने की परंपरा है। पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है।
पूरे नौ दिन व्रत नहीं रख सकते तो तीन दिन का विधान

देवी भागवत पुराण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर उपवास कर देवी की आराधना करने का विकल्प बताया जाता है। इन दिनों मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। हालांकि, व्रत रखने का निर्णय अपनी सेहत और क्षमता के अनुसार लेना चाहिए। पूरे नौ दिन उपवास करना अनिवार्य मानकर स्वास्थ्य की अनदेखी न करें।
19 अक्टूबर को अष्टमी-नवमी, 20 को दशहरा
इस वर्ष महाष्टमी और महानवमी की पूजा 19 अक्टूबर को एक ही दिन पड़ रही है। 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। तिथि और पूजा के समय में स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए कन्या पूजन, हवन और व्रत पारण का समय तय करने से पहले अपने क्षेत्र का पंचांग देखना उचित रहेगा।
नवरात्रि केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति, संयम और आत्मविश्वास की साधना भी है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा के जरिए श्रद्धालु जीवन में साहस, धैर्य, करुणा और सकारात्मकता का संदेश ग्रहण करते हैं।
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