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9th October 2026

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नवरात्रि में हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा : सुख-समृद्धि और अच्छी बारिश का संकेत; 14 को अमृत और 18-19 अक्टूबर को सर्वार्थ सिद्धि योग

News Affair Team

Thu, Oct 8, 2026

धर्म डेस्क.

11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रही है। इस बार नवरात्रि को लेकर एक खास धार्मिक मान्यता है। रविवार को घटस्थापना होने के कारण देवी दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यता में हाथी पर देवी का आगमन सुख-समृद्धि, अच्छी बारिश और आर्थिक प्रगति का संकेत माना जाता है। हालांकि, ये व्याख्याएं धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, इनका वैज्ञानिक आधार नहीं है।

इस बार नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दशहरा के साथ समाप्त होगी। पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर रात से शुरू होकर 11 अक्टूबर रात तक रहेगी, इसलिए उदया तिथि के आधार पर घटस्थापना 11 अक्टूबर को होगी।

रविवार को शुरुआत, इसलिए हाथी बना माता का वाहन

देवी के वाहन को लेकर देवी भागवत में उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि नवरात्रि की शुरुआत जिस वार को होती है, उसी के आधार पर माता के आगमन का वाहन तय होता है।

धार्मिक श्लोक के अनुसार रविवार या सोमवार को नवरात्रि शुरू होने पर देवी हाथी पर, मंगलवार या शनिवार को घोड़े पर, गुरुवार या शुक्रवार को डोली पर और बुधवार को नाव पर आती हैं। इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार से हो रही है, इसलिए माता के हाथी पर आगमन की मान्यता है।

हाथी पर माता का आगमन क्या संकेत देता है?

धार्मिक मान्यता में देवी के वाहन को पूरे वर्ष के संकेतों से जोड़कर देखा जाता है। हाथी को शुभ वाहन माना गया है।

मान्यता के अनुसार माता जब हाथी पर आती हैं तो अच्छी बारिश, सुख-समृद्धि और खुशहाली के संकेत माने जाते हैं। इसी वजह से इस बार देवी के हाथी पर आगमन को विशेष शुभ माना जा रहा है।

इसके उलट घोड़े पर आगमन को प्राकृतिक आपदा और अशांति की आशंका से जोड़ा जाता है। नाव को सर्वसिद्धि और डोली को विपरीत परिस्थितियों से जोड़ने की धार्मिक मान्यता है। यह सभी व्याख्याएं पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

नवरात्रि में बनेंगे अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग

इस बार नवरात्रि के दौरान कई शुभ योग बनने की बात पंचांग में कही गई है। इनमें 14 अक्टूबर को अमृत सिद्धि योग, जबकि 18 और 19 अक्टूबर को सर्वार्थ सिद्धि योग विशेष माने जा रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यता में सर्वार्थ सिद्धि योग को नए काम शुरू करने, कारोबार, नौकरी, खरीदारी और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। अमृत सिद्धि योग में भी नए काम, व्यापारिक समझौते, आजीविका से जुड़े प्रयास और महत्वपूर्ण यात्राओं को शुभ माना जाता है।

जमीन, मकान, वाहन से लेकर सोना खरीदने तक शुभ

सर्वार्थ सिद्धि योग में नई शुरुआत के साथ भूमि, मकान, वाहन, सोना-चांदी और इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने की परंपरा है। इसी तरह व्यापार शुरू करने, नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने या नौकरी से जुड़े महत्वपूर्ण प्रयासों के लिए भी इस योग को शुभ माना जाता है। धार्मिक साधना की दृष्टि से मंत्र-जप, देवी आराधना और अनुष्ठान के लिए भी इन योगों को महत्वपूर्ण माना गया है।

अष्टमी 18 अक्टूबर सुबह शुरू होगी, 19 को महाअष्टमी

इस बार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर सुबह 8:27 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर सुबह 10:51 बजे तक रहेगी। पंचांग के अनुसार महाअष्टमी का पूजन 19 अक्टूबर को माना जा रहा है। 19 अक्टूबर को अष्टमी के साथ नवमी तिथि भी शुरू हो जाएगी। इसी वजह से कई जगहों पर अष्टमी-नवमी के पूजन और कन्या पूजन की परंपराएं एक ही दिन पूरी की जाएंगी।

19 अक्टूबर को कन्या पूजन, 20 को दशहरा

19 अक्टूबर को सुबह अष्टमी तिथि समाप्त होने तक कन्या पूजन किया जा सकता है। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त में कन्या भोज या अन्य शुभ धार्मिक कार्य करने की परंपरा भी कई स्थानों पर है।

नवमी तिथि 19 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू होगी। इसलिए 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा।

नौ दिनों में होगी मां के नौ रूपों की पूजा

11 अक्टूबर — मां शैलपुत्री
घटस्थापना के साथ नवरात्रि की शुरुआत होगी।

12 अक्टूबर — मां ब्रह्मचारिणी
तप, संयम और मन की शांति के लिए पूजा।

13 अक्टूबर — मां चंद्रघंटा
साहस, शक्ति और नकारात्मकता से रक्षा की आराधना।

14 अक्टूबर — मां कूष्मांडा
आरोग्य, ऊर्जा और समृद्धि की कामना। इसी दिन अमृत सिद्धि योग रहेगा।

15 अक्टूबर — मां स्कंदमाता
परिवार की खुशहाली और संतान सुख की कामना से पूजा।

16 अक्टूबर — मां कात्यायनी
विवाह संबंधी बाधाओं और मनोकामना पूर्ति के लिए आराधना।

17 अक्टूबर — मां कालरात्रि
भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की पूजा।

18 अक्टूबर — मां महागौरी की आराधना की तैयारी
इस दिन अष्टमी तिथि शुरू होगी और सर्वार्थ सिद्धि योग का प्रभाव रहेगा।

19 अक्टूबर — महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा
अष्टमी-नवमी के विशेष पूजन, कन्या पूजन और हवन का दिन।

घटस्थापना के लिए ये मुहूर्त बताए गए

11 अक्टूबर को घटस्थापना के लिए अलग-अलग शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। एक पंचांग स्रोत 11 अक्टूबर को सुबह 6:32 से 10:26 बजे तक घटस्थापना का शुभ समय बताता है और अभिजीत मुहूर्त 12:02 से 12:48 बजे तक बताया गया है। इसलिए पूजा के लिए स्थानीय शहर के पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना बेहतर रहेगा।

माता के लौटने का वाहन भी माना जाता है महत्वपूर्ण

धार्मिक मान्यता में सिर्फ देवी के आगमन का वाहन ही नहीं, बल्कि नवरात्रि के बाद उनके प्रस्थान के वाहन को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार दशहरा 20 अक्टूबर, मंगलवार को पड़ रहा है। कुछ धार्मिक परंपराओं में मंगलवार को देवी के प्रस्थान को चरणायुध/मुर्गा वाहन से जोड़ा गया है। इसे अस्थिरता या कठिन परिस्थितियों के संकेत के रूप में व्याख्यायित किया जाता है। यह भी पूरी तरह धार्मिक मान्यता है, कोई वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं।

धार्मिक मान्यता में इस बार नवरात्रि का सबसे बड़ा संकेत

11 अक्टूबर को हाथी पर माता का आगमन — शुभता और समृद्धि का संकेत
14 अक्टूबर — अमृत सिद्धि योग
18-19 अक्टूबर — सर्वार्थ सिद्धि योग
19 अक्टूबर — महाअष्टमी/नवमी के विशेष पूजन
20 अक्टूबर — विजयादशमी और दशहरा

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