₹15 हजार कमाने वाले टेलर को ₹975 करोड़ का इनकम टैक्स नोटिस : पैन कार्ड से डायमंड कंपनी का डायरेक्टर बना दिया; बोला- न कंपनी चलाई, न कभी गुजरात गया
जयपुर.
राजस्थान के अजमेर में टेलरिंग का काम करने वाले एक व्यक्ति को आयकर विभाग का ऐसा नोटिस मिला है, जिसने पूरे परिवार की चिंता बढ़ा दी है। पीसांगन क्षेत्र के रेखराज ठाड़ा को करीब ₹975 करोड़ की टैक्स रिकवरी से जुड़ा नोटिस भेजा गया है। विभागीय रिकॉर्ड में उन्हें सूरत की एक डायमंड कंपनी का डायरेक्टर बताया गया है।
रेखराज का कहना है कि उन्होंने न तो कभी ऐसी कोई कंपनी संचालित की और न ही गुजरात जाकर किसी कंपनी में डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाली। उनका दावा है कि उनके PAN कार्ड का दुरुपयोग कर किसी और ने कंपनी से उनका नाम जोड़ दिया।

नोटिस मिला तो सामने आया डायमंड कंपनी का मामला
रेखराज के मुताबिक उन्हें 13 अगस्त को आयकर विभाग का नोटिस मिला। इसमें बड़ी रकम की टैक्स रिकवरी का उल्लेख करते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए 20 अगस्त तक जवाब देने को कहा गया था।
नोटिस मिलने के बाद परिवार ने दस्तावेजों की जानकारी जुटानी शुरू की। एक परिचित CA की मदद से कंपनी और आयकर रिकॉर्ड की पड़ताल कराई गई तो रेखराज का नाम सूरत की एक डायमंड कंपनी में डायरेक्टर के रूप में दर्ज मिला। रेखराज का कहना है कि उन्हें इस कंपनी के कारोबार, लेनदेन या डायरेक्टर बनाए जाने की कोई जानकारी नहीं थी।
दूसरी कंपनी में भी डायरेक्टर के तौर पर नाम
रिकॉर्ड की जांच के दौरान रेखराज का नाम सूरत की एक दूसरी कंपनी जय बाबेरी डायस प्राइवेट लिमिटेड में भी डायरेक्टर के रूप में सामने आने का दावा किया गया है। इसके बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई। रेखराज का कहना है कि उन्होंने कभी गुजरात में कारोबार नहीं किया और न ही इन कंपनियों से उनका कोई संबंध रहा है।

परिवार ने पुलिस में दी शिकायत
मामले को लेकर रेखराज ने पीसांगन थाने में शिकायत दी है। परिवार अब इस बात की जांच कराने में जुटा है कि उनका PAN कार्ड किस तरह इस्तेमाल हुआ और उनके नाम पर कंपनियों में डायरेक्टर पद कैसे दर्ज हो गया। रेखराज के साथ उनके दो बेटे और भाई भी मामले की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
टेलरिंग का काम, करोड़ों की कंपनी का रिकॉर्ड
रेखराज का कहना है कि वे सामान्य तौर पर टेलरिंग का काम करते हैं। उनके लिए इतनी बड़ी रकम का आयकर नोटिस मिलना ही अपने आप में हैरान करने वाला है। परिवार को आशंका है कि किसी ने उनके पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल कर वित्तीय लेनदेन या कंपनी से जुड़ी गतिविधियां की हैं।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि रेखराज का PAN और अन्य दस्तावेज किसने इस्तेमाल किए, कंपनियों में उनका नाम किस प्रक्रिया से दर्ज हुआ और करोड़ों के कथित लेनदेन का वास्तविक लाभार्थी कौन था।
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