100 साल पुरानी ‘मिरर अणुओं’ की पहेली सुलझी : कागन और सोआई को केमिस्ट्री नोबेल; दवाओं की रिसर्च में मिली बड़ी मदद
News Affair Team
Thu, Oct 8, 2026
स्टॉकहोम.
2026 का केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार फ्रांस के वैज्ञानिक हेनरी बी. कागन और जापान के केन्सो सोआई को दिया गया है। दोनों वैज्ञानिकों को असममित ऑर्गेनिक सिंथेसिस में नॉन-लीनियर इफेक्ट्स और ऑटोकैटलिसिस की खोज के लिए सम्मानित किया गया है।
उनके काम ने रसायन विज्ञान की एक पुरानी पहेली को समझने में अहम भूमिका निभाई है, एक जैसे दिखने वाले दो मिरर-इमेज अणुओं में से प्रकृति आखिर एक को ही क्यों चुनती है। इस खोज का सीधा महत्व दवाओं के निर्माण में भी है, क्योंकि किसी दवा के एक मिरर रूप का असर उपयोगी हो सकता है, जबकि दूसरा कम प्रभावी या नुकसानदायक हो सकता है।

दोनों वैज्ञानिक पुरस्कार की 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर की राशि साझा करेंगे। उन्हें मेडल और डिप्लोमा भी दिया जाएगा। नोबेल पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में होगा।
हाथों की तरह होते हैं कुछ अणु, लेकिन दोनों एक जैसे नहीं
इस खोज को समझने के लिए अपने दोनों हाथों की कल्पना कीजिए। बायां और दायां हाथ देखने में लगभग एक जैसे हैं, लेकिन दोनों को एक-दूसरे के ऊपर पूरी तरह फिट नहीं किया जा सकता।
रसायन विज्ञान में कुछ अणुओं के साथ भी ऐसा ही होता है। इनके दो रूप होते हैं, जो एक-दूसरे की मिरर इमेज होते हैं। इस गुण को चिरैलिटी (Chirality) कहा जाता है।
अमीनो एसिड इसके उदाहरण हैं। वे दो मिरर रूपों में मौजूद हो सकते हैं, लेकिन जीवित प्राणियों के प्रोटीन में मुख्य रूप से इनमें से सिर्फ एक रूप इस्तेमाल होता है। वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि प्रकृति ने एक रूप को ही क्यों चुना।
दवाओं के लिए क्यों जरूरी है यह खोज?
मिरर इमेज वाले दो अणु दिखने में बहुत समान हो सकते हैं, लेकिन मानव शरीर में उनका व्यवहार अलग हो सकता है। यही वजह है कि दवा बनाने वाली कंपनियों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि किसी रासायनिक प्रक्रिया से कौन-सा मिरर रूप तैयार हो रहा है।
कागन और सोआई के काम ने वैज्ञानिकों को रासायनिक प्रतिक्रियाओं को इस तरह नियंत्रित करने की दिशा दी कि जरूरत वाले अणु का रूप ज्यादा मात्रा में बनाया जा सके। इससे आधुनिक फार्मास्युटिकल रिसर्च और दवा निर्माण में महत्वपूर्ण मदद मिली है।
कागन ने दिखाया- छोटे फर्क को बड़ा किया जा सकता है
हेनरी कागन ने 1980 के दशक में यह दिखाया कि किसी रासायनिक प्रतिक्रिया में मिरर-इमेज वाले अणुओं के बीच मौजूद छोटा-सा अंतर भी आगे चलकर काफी बड़ा हो सकता है। यानी शुरुआत में अगर किसी एक रूप की मात्रा दूसरे से थोड़ी ज्यादा है, तो सही रासायनिक परिस्थितियों में उस अंतर को बढ़ाया जा सकता है।
उनके प्रयोगों ने असममित ऑर्गेनिक सिंथेसिस को नियंत्रित करने के नए रास्ते खोले। यह आगे चलकर ऐसी रासायनिक प्रक्रियाएं विकसित करने की नींव बना, जिनमें वैज्ञानिक मनचाहे मिरर रूप को प्राथमिकता दे सकें।
सोआई ने खोज को अगले स्तर तक पहुंचाया
केंसो सोआई ने कागन के काम को आगे बढ़ाते हुए ऑटोकैटलिसिस का इस्तेमाल किया। इसका आसान मतलब है- प्रतिक्रिया से बनने वाला उत्पाद खुद उसी तरह के नए उत्पाद बनने में मदद करने लगे।
इसे ऐसे समझिए कि शुरुआत में किसी एक मिरर रूप के अणु थोड़े ज्यादा बन गए। इसके बाद वही अणु आगे की प्रतिक्रिया को अपने जैसे अणु बनाने की दिशा में धकेलने लगे। फिर नए बने अणु भी यही काम करने लगे। इस तरह छोटा-सा शुरुआती अंतर लगातार बढ़ता गया।
1995 में मिला बड़ा संकेत, 2003 में हासिल हुई बड़ी सफलता
सोआई ने 1995 में ऐसी ऑटोकैटलिटिक प्रतिक्रिया की खोज की, जिसमें बनने वाला चिरल उत्पाद खुद आगे की प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता था। इसके बाद 2003 में उन्होंने ऐसी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया, जिसमें प्रतिक्रिया लगभग पूरी तरह एक ही मिरर-इमेज रूप की ओर जा सकती थी। नोबेल समिति के मुताबिक यह महत्वपूर्ण इसलिए था क्योंकि इससे पहली बार रसायन विज्ञान में यह दिखा कि एक मिरर रूप खुद अपनी बढ़त को लगातार बढ़ा सकता है।
यही समझाती है कि जीवन में एक ही ‘हाथ’ क्यों हावी है
कागन और सोआई की खोज सिर्फ दवा बनाने की तकनीक तक सीमित नहीं है।जीवित दुनिया में मौजूद कई महत्वपूर्ण अणु एक खास ‘हाथ’ यानी एक खास चिरल रूप में पाए जाते हैं। इसे होमोचिरैलिटी (Homochirality) कहा जाता है।
नोबेल समिति के मुताबिक दोनों वैज्ञानिकों के काम ने यह समझने का एक महत्वपूर्ण रास्ता दिया कि ऐसी रासायनिक असमानता बिना किसी बाहरी दिशा-निर्देश के कैसे पैदा और बढ़ सकती है। यही सवाल रसायन विज्ञान में एक सदी से ज्यादा समय से चर्चा का विषय रहा है।
नोबेल समिति ने बताया- दवा निर्माण में बड़ा असर
नोबेल समिति के अनुसार कई दवा अणु दो मिरर रूपों में मौजूद होते हैं। इनमें से एक शरीर में चिकित्सीय प्रभाव दे सकता है, जबकि दूसरा कम उपयोगी या नुकसानदायक प्रभाव पैदा कर सकता है।
इसलिए ऐसी तकनीक, जो रासायनिक प्रतिक्रिया को मनचाहे रूप की तरफ मोड़ सके, फार्मास्युटिकल उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कागन और सोआई का काम इसी नियंत्रण को समझने और विकसित करने में मील का पत्थर माना गया है।
2026 के केमिस्ट्री नोबेल का सार
विजेता: हेनरी बी. कागन और केन्सो सोआई
देश: फ्रांस और जापान
क्षेत्र: असममित ऑर्गेनिक सिंथेसिस
सम्मान: नॉन-लीनियर इफेक्ट्स और ऑटोकैटलिसिस की खोज
मुख्य समस्या: मिरर-इमेज अणुओं में एक रूप की बढ़त कैसे होती है
बड़ा उपयोग: दवाओं और अन्य चिरल रसायनों का अधिक सटीक निर्माण
पुरस्कार राशि: 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर
पुरस्कार समारोह: 10 दिसंबर, स्टॉकहोम
कागन और सोआई का काम यह दिखाता है कि रसायन विज्ञान में कभी-कभी बहुत छोटा शुरुआती अंतर भी सही प्रक्रिया के जरिए बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। यही समझ आज दवा निर्माण से लेकर जीवन की रासायनिक उत्पत्ति को समझने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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