वंदे मातरम् से ‘दिमागी नक्सलवाद’ तक : विजय शर्मा बोले- भाजपा का विरोध करते-करते देश का विरोध न करें; कांग्रेस पर साधा निशाना
News Affair Team
Fri, Aug 21, 2026
दुर्ग.
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस के रुख से लेकर नक्सलवाद और जेल में बंद नक्सल मामलों के आरोपियों तक, गृहमंत्री विजय शर्मा ने गुरुवार को सरकार का पक्ष साफ किया। उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रगीत को लेकर जो व्यवस्था तय है, उसका पालन होना चाहिए। वंदे मातरम् और तिरंगा किसी राजनीतिक दल की पहचान नहीं, बल्कि पूरे देश के सम्मान और स्वाभिमान के प्रतीक हैं।
दुर्ग में भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में शामिल होने पहुंचे विजय शर्मा ने कांग्रेस के दो पैरा वंदे मातरम् गाने के बयान पर कहा कि पहले राष्ट्रगीत पूरा गाया जाता था। बाद में तुष्टीकरण की राजनीति के कारण इसे सीमित किया गया। अब देश अपने मान-बिंदुओं और स्वाभिमान के साथ खड़ा है, इसलिए पुरानी व्यवस्था बहाल होनी चाहिए।

‘भाजपा का विरोध करें, लेकिन देश का विरोध न करें’
गृहमंत्री ने कहा कि राष्ट्र से जुड़े विषयों को राजनीतिक विवाद नहीं बनाया जाना चाहिए। भाजपा का विरोध करना राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन इसके चक्कर में देश का विरोध नहीं होना चाहिए। उन्होंने तिरंगा यात्रा को लेकर कहा कि यह किसी पार्टी की यात्रा नहीं, बल्कि देश के नागरिकों की यात्रा है।
‘नक्सल जंगल में ही नहीं, दिमाग में भी होता है’
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के ‘दिमागी नक्सलवाद’ वाले बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद केवल जंगलों तक सीमित नहीं है। जब किसी व्यक्ति के भीतर नक्सली विचारधारा जन्म लेती है, तभी वह हथियार उठाने की दिशा में बढ़ता है।
उन्होंने बस्तर में नक्सली हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि आईईडी विस्फोटों में लोगों ने अपने पैर गंवाए हैं और कई परिवारों ने अपनों को खोया है। ताड़मेटला में 76 जवानों की मौत का उल्लेख करते हुए उन्होंने नक्सलवाद के प्रति सहानुभूति रखने वालों पर भी सवाल उठाए।
सरकार के खिलाफ बोलना अपराध नहीं, हिंसा स्वीकार नहीं
विजय शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करने और सवाल पूछने की पूरी स्वतंत्रता है। लेकिन राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, समाज में वैमनस्य पैदा करना या अराजकता फैलाने की कोशिश को लोकतांत्रिक अधिकार नहीं माना जा सकता।

1300 नक्सल मामलों की समीक्षा, केस के आधार पर होगा फैसला
जेल में लंबे समय से बंद नक्सल मामलों के आरोपियों को लेकर गृहमंत्री ने बताया कि करीब 1300 लोगों के मामलों की समीक्षा की जा रही है। इसके लिए मामलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।
पहले यह देखा जा रहा है कि संबंधित मामले में किसी व्यक्ति की जान गई है या नहीं। जिन मामलों में जनहानि नहीं हुई, उनमें भी केंद्रीय कानून लागू होने और नहीं होने के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं।
फिलहाल उन मामलों की समीक्षा की जा रही है, जिनमें जनहानि नहीं हुई और केंद्रीय कानून भी लागू नहीं हैं। सरकार ऐसे मामलों की कानूनी स्थिति और रिकॉर्ड का परीक्षण कर रही है।
‘पिछली सरकार ने नक्सल मामलों में किसी को रिहा नहीं किया’
विजय शर्मा ने पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके कार्यकाल में नक्सलवाद से जुड़े मामलों में किसी आरोपी को रिहा नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि कुछ ऐसे लोगों को जरूर छोड़ा गया, जिनके मामलों का नक्सलवाद से संबंध नहीं था। गृहमंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार नियम और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही नक्सल मामलों में आगे की कार्रवाई करेगी।
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