23 साल बाद फिर खुला CGPSC-2003 भर्ती घोटाले का चैप्टर : 15 से ज्यादा अफसर जांच के घेरे में; EOW जल्द पेश कर सकती है चालान
News Affair Team
Fri, Aug 21, 2026
डिप्टी कलेक्टर-DSP चयन में अंकों की गड़बड़ी के आरोप; एक अभ्यर्थी को एक पेज पर 55 नंबर मिलने का दावा
रायपुर.
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की 2003 की भर्ती परीक्षा का विवाद 23 साल बाद एक बार फिर सुर्खियों में है। जोगी सरकार के कार्यकाल में हुई इस भर्ती में डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत अहम पदों पर चयन को लेकर उठे सवाल अब जांच और कानूनी कार्रवाई के अगले पड़ाव तक पहुंच गए हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) इस मामले में जल्द कोर्ट में चालान पेश करने की तैयारी में है।
मामले में 15 से ज्यादा प्रशासनिक अधिकारी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। आरोप है कि मुख्य उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और अभ्यर्थियों को दिए गए अंकों में गड़बड़ी हुई। इसके अलावा स्केलिंग प्रक्रिया में कथित हेरफेर कर कुछ उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने और उनकी मेरिट बदलने के आरोप भी लगाए गए हैं।

एक पेज लिखा, 60 में 55 अंक मिलने का दावा
इस भर्ती को लेकर सबसे ज्यादा सवाल मूल्यांकन में अंकों के अंतर पर उठे थे। दस्तावेजों के मुताबिक, एक अभ्यर्थी ने कथित तौर पर सिर्फ एक पेज का उत्तर लिखा, लेकिन उसे 60 में से 55 अंक दे दिए गए। दूसरी ओर, पूरी उत्तर पुस्तिका लिखने वाले कुछ अभ्यर्थियों को 10 से 15 अंक मिलने की बात सामने आई। अंकों के इस कथित अंतर ने परीक्षा की मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए और मामला अदालत तक पहुंचा।
RTI से सामने आई जानकारी, 2005 में हाईकोर्ट पहुंचे अभ्यर्थी
परीक्षा में चयन और मूल्यांकन को लेकर उम्मीदवार रविंद्र सिंह, वर्षा डोंगरे समेत अन्य अभ्यर्थियों ने RTI के जरिए परीक्षा से संबंधित दस्तावेज और मूल्यांकन की जानकारी जुटाई। इसके बाद 2005 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने के बाद PSC की ओर से कथित तौर पर चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी स्वीकार किए जाने की बात भी सामने आई।
2016 में हाईकोर्ट ने दिया था री-स्केलिंग का आदेश
करीब 11 साल बाद 2016 में बिलासपुर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने 2003 PSC मेंस परीक्षा के सभी वैकल्पिक विषयों की दोबारा स्केलिंग और एंथ्रोपोलॉजी की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनः जांच के निर्देश दिए थे। इसके साथ संशोधित मेरिट सूची जारी करने का आदेश भी दिया गया था।
147 अधिकारियों की नियुक्तियों पर पड़ सकता था असर
हाईकोर्ट के आदेश के बाद 2003 बैच के 147 चयनित अधिकारियों की नियुक्तियां प्रभावित होने की स्थिति बनी। इसके खिलाफ तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर पद्मिनी भोई, संजय चंदन त्रिपाठी समेत कई अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के री-स्केलिंग संबंधी आदेश पर रोक लगा रखी है। मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।
अब EOW की जांच से फिर गरमाया मामला
एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है, वहीं दूसरी ओर EOW की जांच और संभावित चालान ने 23 साल पुराने विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। जांच एजेंसी की कार्रवाई से यह साफ होगा कि भर्ती प्रक्रिया में लगाए गए आरोपों को लेकर जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं। हालांकि, जांच और अदालत की अंतिम प्रक्रिया पूरी होने तक आरोपों को साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता।
क्या है स्केलिंग?
अलग-अलग विषयों के प्रश्नपत्रों की कठिनाई के अंतर को संतुलित कर अभ्यर्थियों के अंकों को एक समान पैमाने पर लाने की प्रक्रिया को स्केलिंग कहा जाता है। इसका उद्देश्य अलग-अलग विषय चुनने वाले अभ्यर्थियों के अंकों की तुलनात्मक मेरिट तैयार करना होता है।
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