15 साल सुरक्षा कैंप रहा, वही अब बच्चों का हॉस्टल : अबूझमाड़ में बदली तस्वीर; 153 आदिवासी विद्यार्थी रहकर कर रहे पढ़ाई
News Affair Team
Mon, Oct 5, 2026
नारायणपुर.
अबूझमाड़ के भाटपाल में कभी सुरक्षा बलों का कैंप रहा परिसर अब आदिवासी विद्यार्थियों के लिए छात्रावास बन गया है। करीब 15 साल तक सुरक्षा गतिविधियों का केंद्र रहे इस परिसर में 11 अगस्त 2026 से बच्चों के रहने की व्यवस्था शुरू हुई। अब यहां दूरस्थ गांवों से आए 153 विद्यार्थी रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।
बस्तर संभाग में अपनी तरह की इस पहली पहल में पुराने कैंप को दो छात्रावासों में बदला गया है। प्री-मैट्रिक छात्रावास में कक्षा 6वीं से 10वीं तक के लिए 100 सीटें स्वीकृत हैं, जबकि पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास में कक्षा 11वीं-12वीं के लिए 50 सीटें हैं। वर्तमान में इनमें क्रमश: 114 और 39 विद्यार्थी, यानी कुल 153 विद्यार्थी रह रहे हैं।

स्कूल से सिर्फ 50 मीटर की दूरी
भाटपाल का शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छात्रावास से महज 50 मीटर दूर है। इससे दूरस्थ गांवों से आने वाले विद्यार्थियों को रोज लंबी दूरी तय करने या स्कूल के आसपास अलग से रहने की जरूरत नहीं पड़ती।
राजबेड़ा के कक्षा 12वीं के विद्यार्थी कोमेंद्र करीब 22 किलोमीटर दूर से पढ़ने आते हैं। पहले स्कूल के पास रहने की अलग व्यवस्था करनी पड़ती थी, जिससे परिवार पर अतिरिक्त खर्च आता था। अब छात्रावास की सुविधा मिलने से यह परेशानी कम हुई है। कक्षा 9वीं के रितेश सोनी भी छात्रावास की व्यवस्था से खुश हैं। उनके मुताबिक, सुरक्षित माहौल और स्कूल की नजदीकी से पढ़ाई करना आसान हुआ है।

कलेक्टर ने किया औचक निरीक्षण
कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन ने छात्रावास का औचक निरीक्षण कर कमरों, भोजन, स्वच्छता और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी जरूरतें जानीं और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
किचन में पहुंचकर उन्होंने बच्चों के लिए तैयार भोजन की गुणवत्ता भी देखी। चावल-सब्जी की जांच के साथ निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन और नाश्ता देने तथा साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए।

सुरक्षा की जगह शिक्षा ने ली
भाटपाल का यह परिसर अबूझमाड़ में बदलती प्राथमिकताओं की तस्वीर दिखाता है। जिस जगह की पहचान कभी सुरक्षा कैंप के रूप में थी, आज वहां स्कूल यूनिफॉर्म में बच्चे किताबों के साथ अपने भविष्य की तैयारी कर रहे हैं।
दूरस्थ आदिवासी गांवों के विद्यार्थियों को स्कूल के पास सुरक्षित आवास मिलने से उनकी पढ़ाई जारी रखने की राह आसान हुई है। खासकर 10वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए बाहर रहने वाले विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।

बदलते अबूझमाड़ की नई तस्वीर
लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले अबूझमाड़ में विकास की तस्वीर अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और आजीविका के साथ आगे बढ़ रही है। भाटपाल इसी बदलाव का एक प्रतीक बनकर सामने आया है।
करीब 15 साल तक सुरक्षा कैंप रहे परिसर में अब 153 विद्यार्थी रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। सुरक्षा के लिए इस्तेमाल हुई अधोसंरचना का यह नया उपयोग दूरस्थ इलाकों के बच्चों के लिए शिक्षा और बेहतर भविष्य का रास्ता खोल रहा है।
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