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8th September 2026

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बस्तर में मिली 3.65 अरब साल पुरानी चट्टान : भारत की सबसे पुरानी शिला होने का दावा, धरती के शुरुआती दौर का खुलेगा राज

रायपुर.

कभी माओवादी हिंसा के लिए सुर्खियों में रहने वाला छत्तीसगढ़ का बस्तर अब धरती के अरबों साल पुराने इतिहास की खोज को लेकर चर्चा में है। भोपालपट्टनम के पास वैज्ञानिकों को करीब 3.65 अरब साल पुराना शिलाखंड मिला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह भारत में अब तक पहचाना गया सबसे पुराना चट्टानी टुकड़ा है।

इस खोज से यह समझने में मदद मिल सकती है कि पृथ्वी के शुरुआती दौर में चट्टानों और टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियां किस तरह विकसित हुईं। शोधकर्ताओं ने बस्तर क्षेत्र में भूगर्भीय इतिहास की तीन अलग-अलग घटनाओं के प्रमाण भी दर्ज किए हैं।

जियोसाइंस फ्रंटियर्स में प्रकाशित हुआ शोध

इस खोज से जुड़ा शोध प्रतिष्ठित जर्नल जियोसाइंस फ्रंटियर्स में प्रकाशित हुआ है। शोध पत्र का शीर्षक "इओआर्कियन सबडक्शन पर पेट्रोक्रोनोलॉजिकल सीमाएं: दक्षिण-पश्चिम बस्तर क्रेटन, भारत से साक्ष्य" है।

शोध में IISER भोपाल के पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रीतम नासिपुरी और कौशिक सत्पथी, IIT खड़गपुर के पूर्व प्रोफेसर अभिजीत भट्टाचार्य और दक्षिण कोरिया के बेसिक साइंस इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर कीवू यी शामिल रहे।

3.65 अरब साल पहले से लेकर 3.40 अरब साल तक का इतिहास

वैज्ञानिकों के अध्ययन में बस्तर क्षेत्र के प्रारंभिक भूगर्भीय इतिहास की तीन प्रमुख घटनाओं के प्रमाण मिले हैं। पहली घटना करीब 3.65 अरब साल पहले, दूसरी 3.64 से 3.60 अरब साल पहले और तीसरी 3.44 से 3.40 अरब साल पहले हुई मानी गई है। शोधकर्ताओं ने दो तरह की प्रमुख चट्टानों की पहचान की है। इनमें सबसे पुरानी नीस यानी परतदार चट्टानें हैं।

30-50 किमी नीचे बनीं चट्टानें, तापमान 1000°C से ज्यादा रहा होगा

वैज्ञानिकों के मुताबिक ये चट्टानें अपने निर्माण के बाद लंबे और जटिल भूगर्भीय बदलावों से गुजरीं। अत्यधिक तापमान और दबाव के कारण इनमें गर्म होने, आंशिक रूप से पिघलने और दोबारा बनने की प्रक्रियाएं हुईं।

अनुमान है कि ये प्रक्रियाएं धरती की सतह से करीब 30 से 50 किलोमीटर नीचे हुईं। उस समय तापमान 1000 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहा होगा। इन चट्टानों का अध्ययन प्रारंभिक पृथ्वी पर टेक्टोनिक प्लेट जैसी गतिविधियों के विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बस्तर क्रेटन में मिली तीन प्रमुख चट्टानी इकाइयां

शोध के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम बस्तर क्रेटन के क्षेत्र में तीन प्रमुख चट्टानी इकाइयां सामने आती हैं। इनमें सुकमा समूह, बेंगपाल समूह और भोपालपट्टनम ग्रैनुलाइट बेल्ट शामिल हैं। भोपालपट्टनम ग्रैनुलाइट बेल्ट उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा में फैली है। इसमें मैग्मैटिक चार्नोकाइट प्रमुख चट्टान के रूप में मौजूद है।

अब तक सिंहभूम की चट्टान मानी जाती थी भारत की सबसे पुरानी

इस खोज से पहले झारखंड के सिंहभूम जिले में मिली चट्टानों को भारत की सबसे पुरानी चट्टानों में माना जाता था। उनकी उम्र करीब 3.3 से 3.5 अरब साल आंकी गई है।

बस्तर की नई खोजी गई चट्टान की उम्र करीब 3.65 अरब साल होने का अनुमान है। इस लिहाज से यह भारत के भूगर्भीय इतिहास की सबसे पुरानी पहचानी गई चट्टान हो सकती है।

दुनिया में सिर्फ तीन जगह इससे भी पुरानी चट्टानों के प्रमाण

वैज्ञानिकों के मुताबिक दुनिया में इससे भी पुरानी चट्टानों के प्रमाण बेहद सीमित हैं। ग्रीनलैंड में करीब 4.4 अरब साल पुरानी चट्टान, जबकि कनाडा और दक्षिण अफ्रीका में भी अत्यंत प्राचीन चट्टानी संरचनाएं मिली हैं। ऐसे में बस्तर की यह खोज पृथ्वी की शुरुआती संरचना और अरबों साल पुराने भूगर्भीय बदलावों को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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