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अविनाश, सिंघानिया, वालफोर्ट भी शामिल; 989 प्रोजेक्ट्स रहवासियों को नहीं सौंपने का आरोप

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595 बिल्डरों को रेरा का नोटिस : अविनाश, सिंघानिया, वालफोर्ट भी शामिल; 989 प्रोजेक्ट्स रहवासियों को नहीं सौंपने का आरोप

News Affair Team

Mon, Jun 8, 2026

रायपुर.

छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने राज्यभर के सैकड़ों बिल्डरों और कॉलोनाइजरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है। आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भी उनका प्रबंधन और सामान्य सुविधाएं रहवासियों को नहीं सौंपने के मामले में रेरा ने 595 बिल्डरों को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई राज्य की 989 परियोजनाओं से जुड़ी हुई है।

रेरा के अनुसार कई परियोजनाओं को नगर निगम अथवा संबंधित निकायों से पूर्णता प्रमाण पत्र (Completion Certificate) मिल चुका है, लेकिन इसके बावजूद परियोजनाओं का प्रबंधन आबंटितियों की समिति, संघ या सहकारी संस्था को हस्तांतरित नहीं किया गया है। यह स्थिति रेरा अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत मानी जा रही है।

रायपुर से लेकर कोरबा तक कार्रवाई

नोटिस प्राप्त करने वालों में रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, कोरबा और अन्य शहरों के कई बड़े बिल्डर शामिल हैं। इनमें अविनाश ग्रुप, सिंघानिया बिल्डकॉन, वालफोर्ट समेत अनेक प्रतिष्ठित रियल एस्टेट कंपनियों के नाम भी सामने आए हैं।

इसके अलावा श्री बिल्डकॉन, श्रीकृष्णा वाटिका महादेव घाट, सुमीत इंफ्रा, श्री विश्व भारती, पारस बिल्डकॉन, संसार बिल्डकॉन, संकल्प बिल्डकॉन, साईंनाथ बिल्डकॉन, नीलम होम्स तथा अन्य डेवलपर्स को भी नोटिस जारी किया गया है।

नियम क्या कहते हैं?

रेरा अधिनियम के तहत किसी भी आवासीय या व्यावसायिक परियोजना के पूर्ण होने के बाद बिल्डर को सामान्य क्षेत्र, सार्वजनिक सुविधाएं, रखरखाव व्यवस्था और संबंधित अभिलेखों का हस्तांतरण रहवासियों की समिति अथवा संघ को करना अनिवार्य होता है।

प्राधिकरण का कहना है कि कई मामलों में न तो आबंटितियों की समिति का गठन कराया गया और न ही प्रबंधन सौंपने की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बावजूद कुछ बिल्डर परियोजनाओं का रखरखाव अपने नियंत्रण में रखकर शुल्क वसूल रहे हैं।

हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम भी दायरे में

रेरा की कार्रवाई केवल निजी बिल्डरों तक सीमित नहीं है। विभिन्न शिकायतों और समीक्षा के आधार पर कुछ सरकारी संस्थाओं, जिनमें हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम की परियोजनाएं भी शामिल हैं, को नोटिस जारी किया गया है। आरोप है कि कई सरकारी परियोजनाओं में भी पूर्णता के बाद प्रबंधन हस्तांतरण की प्रक्रिया लंबित है।

15 दिन में देना होगा जवाब

प्राधिकरण ने सभी संबंधित बिल्डरों और कॉलोनाइजरों को 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। यदि निर्धारित अवधि में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया या जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो रेरा अधिनियम के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

रहवासियों की भी जिम्मेदारी

रेरा ने स्पष्ट किया है कि अधिनियम में केवल बिल्डरों की ही नहीं, बल्कि फ्लैट और प्लॉट खरीदारों की जिम्मेदारियां भी निर्धारित हैं। अधिनियम की धारा 19(9) के अनुसार प्रत्येक आबंटी का दायित्व है कि वह रहवासी समिति, संघ या सहकारी संस्था के गठन में सक्रिय सहयोग करे।

लंबे समय से उठ रहे थे सवाल

राज्य के कई शहरों में रहवासी लंबे समय से यह शिकायत करते रहे हैं कि परियोजनाओं के पूरा होने के वर्षों बाद भी क्लब हाउस, पार्क, सुरक्षा व्यवस्था, पानी आपूर्ति और अन्य सामुदायिक सुविधाओं का नियंत्रण बिल्डरों के पास ही बना हुआ है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

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