Advertisment

News Affair में आपका हार्दिक स्वागत है — आपकी अपनी हिंदी न्यूज़ पोर्टल, जहाँ हर खबर मिलती है सही, सटीक और सबसे पहले।

हमारे साथ जुड़िए देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों, राजनीति, खेल, मनोरंजन, व्यापार और तकनीक की हर बड़ी अपडेट के लिए। हम हैं आपकी आवाज़, आपके सवाल और आपकी जिज्ञासा के साथ — निष्पक्ष, निर्भीक और नई सोच के साथ।

11th February 2026

ब्रेकिंग

X, YouTube, Facebook और Snapchat को लगाना होगा लेबल

काशी में होंगे 7 फेरे, IPL के बाद बजेगी शहनाई; सियासत से बचने को गेस्ट लिस्ट छोटी

पुलिस से की गाली-गलौज, बोले-10 थानों के अफसरों को जानता हूं, तुम कौन हो मुझे रोकने वाले

जनपद उपाध्यक्ष नीतेश सिंह पर 14 राउंड चलीं गोलियां; 2 घायल, 6 संदिग्ध पकड़े गए

10 ग्राम सोना ₹1,19,352 और चांदी ₹1,45,728 प्रति किलो; जानिए क्यों बढ़े दाम, निवेश करें या नहीं

केदारनाथ धाम के लिए बनेगी 7 किमी लंबी टनल : 16 किमी की जगह सिर्फ 5 किमी पैदल चलेंगे श्रद्धालु; हर मौसम में मंदिर तक मिलेगा सुरक्षित रास्ता

News Affair Team

Sat, Jul 26, 2025

रुद्रप्रयाग.

केदारनाथ मंदिर तक यात्रा अब और आसान और सुरक्षित होने जा रही है। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने केदारनाथ तक 7 किलोमीटर लंबी सुरंग (टनल) बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। यह सुरंग उत्तराखंड की कालीमठ घाटी में स्थित चौमासी गांव से लिंचोली तक बनेगी, जो केदारनाथ से लगभग 5 किलोमीटर पहले का पड़ाव है।

वर्तमान में केदारनाथ यात्रा गौरीकुंड से शुरू होकर रामबाड़ा और लिंचोली होते हुए 16 किलोमीटर के कठिन ट्रैक से पूरी होती है। लेकिन टनल बनने के बाद यह दूरी लगभग एक-तिहाई रह जाएगी, जिससे विशेष रूप से बुजुर्गों और आपातकालीन स्थितियों में राहत मिलेगी।

टनल से नया रूट: चौमासी से लिंचोली तक वाहन और फिर पैदल यात्रा

नई सुरंग 6562 फीट की ऊंचाई पर बनाई जाएगी। चौमासी गांव तक पहले से पक्की सड़क मौजूद है, जो गुप्तकाशी-कालीमठ मार्ग से जुड़ी है। इस रूट से यात्री वाहन से चौमासी पहुंच सकेंगे, फिर टनल के जरिए लिंचोली और वहां से पैदल 5 किलोमीटर में केदारनाथ मंदिर तक पहुंच सकेंगे।

राष्ट्रीय राजमार्ग उत्तराखंड के चीफ इंजीनियर मुकेश परमार ने बताया कि सर्वे और ड्राइंग का कार्य पूरा हो चुका है और केंद्र सरकार की टीम इसे अंतिम रूप दे रही है।

भूस्खलन से सुरक्षित होगा नया रूट

वर्तमान रूट के कई हिस्से भूस्खलन (लैंडस्लाइड) जोन में आते हैं। पिछले वर्षों में कई हादसे हो चुके हैं। लेकिन कालीमठ-चौमासी रूट पर कठोर चट्टानें और स्थिर भूगोल होने से यह रूट भविष्य में सुरक्षित साबित होगा। सितंबर 2024 में एक सर्वे टीम ने इस मार्ग की समीक्षा की थी और इसे 'भूस्खलन मुक्त ज़ोन' बताया था।

पहले रामबाड़ा से टनल की योजना थी

केदारनाथ की पूर्व विधायक शैलारानी रावत ने पहले रामबाड़ा से सुरंग की मांग की थी, लेकिन रामबाड़ा इलाका भूस्खलन जोन में आता है, जिससे इस रूट को खारिज कर दिया गया। चौमासी-लिंचोली मार्ग को भूगर्भीय दृष्टिकोण से बेहतर माना गया।

 केदारनाथ आपदा और सुरक्षा के नए इंतज़ाम

  • 2013 की त्रासदी में 6,000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी।

  • 2024 में भी भारी बारिश और लैंडस्लाइड से यात्रा बाधित रही।

  • मंदिर परिसर में सुरक्षा दीवार, घाट और चौड़ी सड़कें, साथ ही हेलिपैड, हॉस्पिटल, ध्यान गुफाएं आदि का निर्माण किया गया है।

  • मंदाकिनी और सरस्वती नदियों के किनारे 18 फीट ऊंची तीन परतों वाली कंक्रीट सेफ्टी वॉल बनाई गई है।

भविष्य की यात्रा ऐसे होगी

गौरीकुंड रूट: 16 KM (गौरीकुंड > रामबाड़ा > लिंचोली > केदारनाथ)

नया रूट:

  • वाहन से: कुंड > कालीमठ > चौमासी (41 KM)

  • टनल से: चौमासी > लिंचोली (7 KM सुरंग)

  • पैदल: लिंचोली > केदारनाथ (5 KM)

सबसे कठिन, सबसे श्रद्धापूर्ण धाम

  • चार धामों में सबसे कठिन पैदल यात्रा

  • हर मौसम में खतरे की संभावना

  • अब नए रूट से यात्रा होगी आसान, सुरक्षित और कम दूरी की

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन