सोशल मीडिया पर AI कंटेंट अब बिना पहचान नहीं चलेगा : X, YouTube, Facebook और Snapchat को लगाना होगा लेबल
अगर आप सोशल मीडिया पर वीडियो देखते हैं और सोचते हैं कि ये असली है या AI से बना—तो अब कन्फ्यूजन कम होने वाला है।
सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को साफ-साफ कह दिया है कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बने कंटेंट पर लेबल लगाना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, डीपफेक फोटो और वीडियो 3 घंटे के भीतर हटाने होंगे।

IT Rules 2021 में बदलाव, 20 फरवरी से लागू
MeitY ने जारी किया आधिकारिक आदेश
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया।
इसके तहत IT Rules 2021 में संशोधन किया गया है।
ड्राफ्ट: 22 अक्टूबर 2025
नियम लागू होंगे: 20 फरवरी 2026 से
सरकार का कहना है कि ये बदलाव AI से फैलने वाली गलत जानकारी, फेक वीडियो और चुनावी धांधली पर लगाम लगाने के लिए जरूरी थे।
AI कंटेंट पर साफ लिखना होगा – “ये असली नहीं है”
लेबल और ट्रेसिंग दोनों जरूरी
नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई कंटेंट AI से बनाया गया है, तो उसमें साफ-साफ बताना होगा कि—
“यह कंटेंट AI द्वारा जनरेट किया गया है।”
इसका मकसद यही है कि यूजर जान सके कि जो वो देख या सुन रहा है, वो असली नहीं है।
Rule 3(3): हर AI ऑडियो-वीडियो पर लेबल जरूरी
मेटाडेटा हटाना या छेड़छाड़ अब मुमकिन नहीं
नए Rule 3(3) के तहत:
AI से बना हर वीडियो, फोटो और ऑडियो
‘Synthetically Generated Information’ माना जाएगा
उस पर प्रॉमिनेंट लेबल लगाना अनिवार्य होगा
लेबल कैसे दिखेगा?
वीडियो/फोटो में कम से कम 10% स्क्रीन एरिया
ऑडियो में शुरुआती 10% टाइम में सुनाई देना जरूरी
साथ ही हर कंटेंट में Permanent Unique Metadata / Identifier एम्बेड करना होगा,
जिसे कोई हटा, छिपा या बदल नहीं सकेगा।
डीपफेक कंटेंट 3 घंटे में हटाना होगा
प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ी जिम्मेदारी
सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर कोई डीपफेक फोटो या वीडियो सामने आता है, तो सोशल मीडिया कंपनी को उसे 3 घंटे के भीतर हटाना होगा।
इसके लिए प्लेटफॉर्म्स को AI डिटेक्शन और वेरिफिकेशन सिस्टम पहले से मजबूत करने होंगे।

नए IT नियमों में ये 3 बड़े बदलाव भी
कंपनियों के लिए सख्ती, यूजर्स के लिए चेतावनी
1. लेबल हटाना अब अपराध
AI कंटेंट पर लगाया गया लेबल या मेटाडेटा
अब हटाया या छिपाया नहीं जा सकेगा।
2. भ्रामक और गैर-कानूनी कंटेंट पर रोक
कंपनियों को ऐसे ऑटोमेटेड टूल्स इस्तेमाल करने होंगे,
जो अश्लील, फेक, फ्रॉड या गैर-कानूनी AI कंटेंट को रोक सकें।
3. हर 3 महीने में यूजर्स को चेतावनी
प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स को बताना होगा कि
AI का गलत इस्तेमाल करने पर
जुर्माना या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
यूजर्स और क्रिएटर्स पर क्या असर पड़ेगा?
यूजर्स के लिए फायदा
फेक और असली कंटेंट में फर्क आसान
मिसइनफॉर्मेशन कम होगी
चुनाव और पब्लिक ओपिनियन पर गलत असर घटेगा
क्रिएटर्स और इंडस्ट्री के लिए चुनौती
एक्स्ट्रा टेक्निकल स्टेप्स
मेटाडेटा और वेरिफिकेशन पर खर्च
ऑपरेशन्स थोड़े महंगे हो सकते हैं
लेकिन सरकार मानती है कि लॉन्ग टर्म में ये नियम जरूरी और फायदेमंद हैं।
मंत्रालय ने क्या कहा?
“सेफ और ट्रस्टेड इंटरनेट की दिशा में कदम”
आईटी मंत्रालय ने कहा कि ये नियम Open, Safe, Trusted और Accountable Internet बनाने के लिए लाए गए हैं।
जनरेटिव AI से जुड़ी
मिसइनफॉर्मेशन
इम्पर्सनेशन
इलेक्शन मैनिपुलेशन
जैसी रिस्क्स को कंट्रोल करना अब जरूरी हो गया है।
क्या होता है डीपफेक?
जब चेहरा, आवाज और एक्सप्रेशन सब फेक हों
डीपफेक एक ऐसी तकनीक है, जिसमें AI की मदद से किसी इंसान का चेहरा, आवाज और हाव-भाव किसी और वीडियो पर फिट कर दिया जाता है।
एडिटिंग इतनी साफ होती है कि असली और नकली में फर्क करना आम यूजर के लिए मुश्किल हो जाता है।
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