खेत में बनी रहस्यमयी खाई : दुर्ग में 20 फीट गहरा, 12 फीट चौड़ा सिंकहोल बना; प्रशासन ने बनाया सुरक्षा घेरा
News Affair Team
Mon, Jul 28, 2025
दुर्ग (छत्तीसगढ़).
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम पेड्री में एक अप्रत्याशित घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। धमधा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले इस गांव में एक खेत की जमीन अचानक 20 फीट गहराई और 12 फीट चौड़ाई में धंस गई। यह घटना जहां ग्रामीणों में डर और आशंका का कारण बनी, वहीं भूवैज्ञानिक इसे एक संभावित सिंकहोल (Sinkhole) मान रहे हैं।
प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा घेरे बनाए गए हैं और लोगों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील की गई है।

यह घटना स्थानीय किसान जगदीश साहू के खेत में हुई। रोज़ की तरह जब वह खेत का निरीक्षण कर रहे थे, तभी उन्होंने जमीन में कुछ हलचल महसूस की। कुछ ही पलों में मिट्टी धंसने लगी और देखते-देखते एक विशाल गड्ढा बन गया।
जगदीश साहू ने तुरंत गांववालों को सूचना दी। गांव के निवासी विशंभर ठाकुर ने बताया कि यह नज़ारा बेहद डरावना था, क्योंकि जमीन बिना किसी चेतावनी के अचानक धंस गई।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
धमधा एसडीएम सोनम डेविड ने मीडिया को बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत सुरक्षा घेरा बनवाया और मुनादी कराई गई कि कोई भी व्यक्ति गड्ढे के पास न जाए।
गांव वालों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हमने घटना स्थल को घेर दिया है और संबंधित विभागों को सूचित किया गया है
– सोनम डेविड, SDM
गांव में डर का माहौल
घटना के बाद से गांव में भय और भ्रम का माहौल है। कुछ ग्रामीण इसे प्राकृतिक आपदा मान रहे हैं, तो कुछ पुरानी सुरंग या जमीन के नीचे के जल स्तर में बदलाव को इसका कारण मान रहे हैं।
हालांकि, प्रशासन और भूवैज्ञानिकों ने अफवाहों से बचने और सतर्कता बरतने की अपील की है।

क्या होता है सिंकहोल?
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, सिंकहोल एक सामान्य भू-प्राकृतिक प्रक्रिया है जो खासकर कार्स्ट क्षेत्रों (karst regions) में होती है। जब वर्षा का पानी ज़मीन के नीचे चट्टानों में समा जाता है और वहां की मिट्टी, रेत या खनिज घुलकर बह जाते हैं, तब वहां रिक्त स्थान बन जाते हैं। समय के साथ इन स्थानों पर ज़मीन की सतह कमजोर हो जाती है और अचानक धंस जाती है।
मुख्य कारण
भूमिगत जल स्तर में गिरावट
चूना पत्थर या जिप्सम जैसी घुलनशील चट्टानों की मौजूदगी
बारिश का अधिक जल या जलप्रवाह
पुरानी भूमिगत सुरंगें या मानव निर्मित संरचनाएं
क्या यह खतरे की घंटी है?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना फिलहाल अकेली और नियंत्रित है, लेकिन यदि आस-पास और ऐसे गड्ढे बनने लगें, तो भूगर्भीय सर्वेक्षण कराना आवश्यक हो सकता है। ऐसे मामलों में जनजीवन और खेती पर प्रभाव पड़ सकता है।
दुर्ग जिले में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है। पहले भी कुछ ग्रामीण इलाकों में छोटे स्तर पर धंसाव की घटनाएं दर्ज की गई थीं, लेकिन पेड्री का यह गड्ढा अब तक का सबसे बड़ा और गहरा है।
ग्रामीणों की मांग और सरकार की ज़िम्मेदारी
ग्रामीणों ने मांग की है कि
इस क्षेत्र में भूगर्भीय जांच करवाई जाए
भविष्य के खतरों का आकलन किया जाए
यदि भूमि असुरक्षित पाई जाए, तो मुआवजा और पुनर्वास का प्रावधान किया जाए
प्रशासन ने फिलहाल भू-वैज्ञानिकों की टीम बुलाने की बात कही है और लोगों को संयम बरतने की सलाह दी है।
सतर्क रहें, डरें नहीं
ग्राम पेड्री में अचानक बना यह सिंकहोल न केवल प्राकृतिक बदलावों की चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि स्थानीय प्रशासन, वैज्ञानिक चेतना और जनजागरूकता की कितनी ज़रूरत है।
प्राकृतिक घटनाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सतर्कता, समय पर जांच और प्रशासनिक एक्शन से किसी बड़ी आपदा को टाला जा सकता है।
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