राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 23 अक्टूबर को आएंगी बस्तर : ऐतिहासिक मुरिया दरबार में होंगी शामिल, मांझी-चालकी समुदाय से करेंगी मुलाकात
News Affair Team
Sat, Oct 17, 2026
जगदलपुर.
बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल होंगी। उनका 23 अक्टूबर को जगदलपुर पहुंचने का कार्यक्रम तय हुआ है। प्रवास के दौरान राष्ट्रपति मांझी-चालकी समुदाय के लोगों से मुलाकात करेंगी। इसके बाद लालबाग मैदान में आयोजित आमसभा को संबोधित करेंगी।
राष्ट्रपति के दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बस्तर सांसद और बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने उन्हें दशहरा में शामिल होने का न्योता दिया था, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है। अब प्रशासन कार्यक्रम को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने की तैयारियों में जुटा है।
कलेक्टर-एसपी ने ली अधिकारियों की बैठक
राष्ट्रपति के प्रवास की तैयारियों की समीक्षा के लिए कलेक्टर आकाश छिकारा और एसपी शलभ सिन्हा ने कलेक्ट्रेट के प्रेरणा कक्ष में अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें सुरक्षा, यातायात, प्रोटोकॉल, बैठक व्यवस्था और अन्य जरूरी इंतजामों पर चर्चा हुई।
दोनों अधिकारियों ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम से जुड़ी सभी तैयारियां तय समयसीमा में पूरी की जाएं। राष्ट्रपति के दौरे के दौरान सुरक्षा और आम लोगों की सुविधा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
लालबाग मैदान में मंच से पार्किंग तक व्यवस्था की जांच
बैठक के बाद कलेक्टर और एसपी ने लालबाग मैदान पहुंचकर कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने मंच निर्माण, वीआईपी और आम लोगों के प्रवेश व निकास मार्ग, पेयजल, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा और पार्किंग व्यवस्था का जायजा लिया।
कलेक्टर ने कार्यक्रम में पहुंचने वाले लोगों के लिए जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा। वहीं, एसपी ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने और यातायात प्रबंधन को लेकर आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए।
क्या है मुरिया दरबार की परंपरा?
मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक परंपरा है। बस्तर रियासत के समय राजा दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं और शिकायतें सुनते थे। गांवों के मांझी और मुखिया अपने क्षेत्र की जरूरतें और लोगों की परेशानियां राजा तक पहुंचाते थे।
बस्तर दशहरा की रस्में पूरी होने के बाद आयोजित होने वाला यह दरबार स्थानीय समुदायों और राजसत्ता के बीच संवाद का माध्यम था। इसमें क्षेत्र की समस्याओं और मांगों पर चर्चा की जाती थी।
राजशाही खत्म हुई, परंपरा आज भी जारी
देश में राजशाही समाप्त होने और लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू होने के बाद भी मुरिया दरबार की परंपरा कायम है। अब इसमें प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में स्थानीय समस्याओं, विकास से जुड़ी मांगों और दूसरे मुद्दों पर चर्चा होती है। राजपरिवार के सदस्य भी इस अवसर पर मौजूद रहते हैं।
बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक परंपराओं का भी प्रतीक है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की प्रस्तावित मौजूदगी से इस ऐतिहासिक आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष ध्यान मिलने की उम्मीद है।
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन