छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : कारोबारी विजय भाटिया दिल्ली से गिरफ्तार; दुर्ग-भिलाई में EOW की छापेमारी
News Affair Team
Sun, Jun 1, 2025
रायपुर.
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ACB-EOW) ने शराब कारोबारी विजय भाटिया को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। भाटिया को रायपुर लाया जा रहा है। इस बीच दुर्ग-भिलाई में भाटिया के छह से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, सुबह 6 बजे से ही ईओडब्ल्यू की टीम ने भिलाई के नेहरू नगर स्थित भाटिया के घर में दबिश दी। दो गाड़ियों में आए सात अधिकारियों ने पूरे घर को घेरकर छानबीन शुरू की। घर के नौकरों से भी पूछताछ की जा रही है, हालांकि उन्हें काम करने की अनुमति दी गई है। मौके पर महिला पुलिस भी मौजूद है।

ED की पूर्व छापेमारी के बाद से था फरार
विजय भाटिया दो साल पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद से फरार चल रहा था। 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन पर ED ने उनके राजनीतिक सलाहकार, OSD और भाटिया समेत चार स्थानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस पर कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी भी हुई थी।

12 दिन पहले 39 जगहों पर एक साथ रेड
ACB और EOW ने 12 दिन पहले दुर्ग, भिलाई, धमतरी और महासमुंद सहित 39 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस दौरान 90 लाख रुपए नकद, सोना-चांदी और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद की गईं थीं।
ईओडब्ल्यू की टीमों ने आम्रपाली अपार्टमेंट, नेहरू नगर और खुर्सीपार में अग्रवाल परिवारों के ठिकानों पर दस्तावेजों की जांच की थी।
क्या है शराब घोटाले का मामला?
ED की जांच के मुताबिक, 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले के तहत डुप्लीकेट होलोग्राम के जरिए सरकारी दुकानों से नकली शराब बेची गई। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और शराब सिंडिकेट ने अवैध रूप से 2100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की।
इस सिंडिकेट में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर की अहम भूमिका थी। FIR भी ED की शिकायत पर ACB ने दर्ज की है।

ED का आरोप - लखमा भी सिंडिकेट का हिस्सा
ED का दावा है कि पूर्व मंत्री कवासी लखमा इस शराब सिंडिकेट का प्रमुख हिस्सा थे। उन्हें हर महीने 2 करोड़ रुपये कमीशन मिलता था, जो उनके बेटे के घर निर्माण और सुकमा में कांग्रेस भवन निर्माण में खर्च किया गया।
FL-10 लाइसेंस से भी हुआ फायदा
ED ने बताया कि इस घोटाले के दौरान शराब नीति में बदलाव कर FL-10 और FL-10A लाइसेंस शुरू किए गए, जिसके जरिए विदेशी शराब के कारोबार में भी अवैध तरीके से कमीशन लिया गया। थर्ड पार्टी सप्लायर्स को लाइसेंस देकर शराब खरीद-बिक्री और परिवहन का अधिकार दिया गया।
2100 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई
ED की रिपोर्ट में कहा गया है कि शराब घोटाले से सिंडिकेट को 2100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई हुई है। इस पूरे घोटाले के तार सत्ता के उच्च पदों से जुड़े हुए हैं।
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