भारत-न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट : लेदर-टेक्सटाइल पर जीरो ड्यूटी, 15 साल में ₹1.8 लाख करोड़ निवेश; 5 हजार भारतीयों को हर साल वर्क वीजा
नई दिल्ली.
भारत और न्यूजीलैंड के बीच सोमवार (27 अप्रैल) को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर हो गए। इस समझौते के साथ ही दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। इस FTA के तहत भारत से न्यूजीलैंड को निर्यात किए जाने वाले कई उत्पादों पर अब एक्सपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी, जिससे भारतीय उद्योगों, खासतौर पर लेबर-इंटेंसिव सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे “एक पीढ़ी में एक बार होने वाला समझौता” बताया, वहीं भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे दोनों देशों के बीच विश्वास और साझा विकास के विजन का प्रतीक कहा।

लेदर, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सेक्टर को बड़ा फायदा
FTA के लागू होने के बाद भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले लेदर प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग गुड्स पर अब कोई एक्सपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी। इससे खासतौर पर आगरा, कानपुर और सूरत जैसे शहरों के निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत के MSME सेक्टर को भी नई ऊर्जा देगा, क्योंकि इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम उद्योग कार्यरत हैं।
15 साल में ₹1.8 लाख करोड़ निवेश का अनुमान
इस समझौते का एक अहम पहलू विदेशी निवेश को बढ़ावा देना भी है। FTA के तहत न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 20 बिलियन डॉलर (लगभग ₹1.8 लाख करोड़) का निवेश कर सकता है।
सरकार का लक्ष्य इस समझौते के जरिए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है। इससे न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

5 हजार भारतीयों को हर साल वर्क वीजा
FTA के तहत सर्विस सेक्टर में भी भारत को बड़ी सफलता मिली है। IT, शिक्षा, हेल्थकेयर, फाइनेंशियल सर्विसेज और टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में भारतीय प्रोफेशनल्स को न्यूजीलैंड के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
इसके अलावा एक नया टेम्परेरी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीजा प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत हर साल 5,000 भारतीय स्किल्ड प्रोफेशनल्स को न्यूजीलैंड में तीन साल तक काम करने का अवसर मिलेगा। आयुष विशेषज्ञों, योग प्रशिक्षकों, शेफ और म्यूजिक टीचर्स के लिए भी नए अवसर खुलेंगे।
भारतीय युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए मौके
इस समझौते से भारतीय युवाओं के लिए विदेश में काम और पढ़ाई के अवसर बढ़ेंगे। म्यूचुअल रिकग्निशन एग्रीमेंट (MRAs) के तहत भारतीय डिग्री और प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन को मान्यता मिलेगी, जिससे नौकरी पाना आसान होगा। IT और फार्मा सेक्टर को भी बेहतर एक्सेस मिलेगा, जिससे भारत की सर्विस एक्सपोर्ट क्षमता मजबूत होगी।
न्यूजीलैंड को कृषि उत्पादों में रियायत
भारत ने न्यूजीलैंड को अपने बाजार में सीमित रियायतें दी हैं। सेब, कीवीफ्रूट और मनुका हनी जैसे कृषि उत्पादों पर टैरिफ में छूट दी गई है, लेकिन ये कोटा और न्यूनतम आयात मूल्य की शर्तों के साथ होंगी।
इसके अलावा न्यूजीलैंड को अपने 54% से अधिक निर्यात पर तुरंत शून्य ड्यूटी का लाभ मिलेगा, जिसमें शीप मीट, ऊन, कोयला और फॉरेस्ट्री उत्पाद शामिल हैं।
डेयरी और संवेदनशील क्षेत्रों को रखा बाहर
भारत ने अपने घरेलू किसानों और उद्योगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डेयरी उत्पादों, जैसे दूध, पनीर और क्रीम को इस समझौते से बाहर रखा है।
इसके अलावा प्याज, दालें, चीनी, हथियार और कुछ धातु उत्पादों को भी रियायतों की सूची में शामिल नहीं किया गया है। यह कदम घरेलू बाजार को संभावित नुकसान से बचाने के लिए उठाया गया है।
सस्ते होंगे कीवी, वाइन और ऊन के उत्पाद
FTA का फायदा आम उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। न्यूजीलैंड से आने वाले कीवी, सेब, चेरी, एवोकाडो, ब्लूबेरी और मनुका हनी जैसे फल सस्ते हो सकते हैं।
इसके अलावा ऊन से बने कपड़े, प्रीमियम वाइन, सीफूड और लकड़ी के उत्पाद भी कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं। इससे भारतीय बाजार में विकल्प बढ़ेंगे।
2010 से शुरू हुई थी बातचीत
भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस समझौते पर बातचीत 2010 में शुरू हुई थी। कई दौर की चर्चा के बाद 2015 में यह प्रक्रिया रुक गई थी।
मार्च 2025 में बातचीत फिर से शुरू हुई और दिसंबर 2025 में इसे अंतिम रूप दिया गया। इस FTA में कुल 20 चैप्टर शामिल हैं, जिनमें गुड्स, सर्विसेज, कस्टम प्रोसेस और टेक्निकल नियम शामिल हैं।
FTA क्या होता है?
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) दो या अधिक देशों के बीच ऐसा समझौता होता है, जिसमें वे आपस में व्यापार किए जाने वाले अधिकांश उत्पादों पर आयात-निर्यात शुल्क कम या समाप्त कर देते हैं। इसका उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना, निवेश बढ़ाना और बाजारों का विस्तार करना होता है।
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