भाजपा के पूर्व मंत्री के भाई पर ED की रेड : सुबह 5 बजे 12 से अधिक अधिकारी पहुंचे छापा मारने; भारतमाला घोटाले पर बड़ा एक्शन
रायपुर/धमतरी.
छत्तीसगढ़ के चर्चित भारतमाला परियोजना घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। सोमवार तड़के ईडी की टीम ने धमतरी जिले के कुरुद में पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के ठिकानों पर छापेमारी की। इसके साथ ही जमीन कारोबारी गोपाल गांधी और उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर भी एक साथ दबिश दी गई।
सुबह से जारी इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक प्रवर्तन निदेशालय की ओर से इस रेड की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई भारतमाला परियोजना में हुए कथित जमीन मुआवजा घोटाले से जुड़ी हुई है।

तड़के पहुंची ED टीम, घर के अंदर शुरू हुई जांच
जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 5 बजे तीन गाड़ियों में 12 से अधिक ईडी अधिकारी धमतरी के कुरुद स्थित सरोजिनी चौक के पास भूपेंद्र चंद्राकर के निवास पर पहुंचे। टीम ने पहुंचते ही घर को अपने नियंत्रण में लेकर अंदर से जांच शुरू कर दी।
सूत्रों के अनुसार, घर को अंदर से लॉक कर दिया गया है और किसी भी बाहरी व्यक्ति की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। सुरक्षा के मद्देनजर स्थानीय पुलिस बल भी मौके पर तैनात किया गया है।
ईडी की टीम घर के अंदर दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड्स की गहन जांच कर रही है। माना जा रहा है कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लग सकते हैं, जो पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे।

किन आरोपों के आधार पर हो रही कार्रवाई
भूपेंद्र चंद्राकर पर आरोप है कि उन्होंने भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में अनियमितताओं के जरिए अपने करीबियों को भारी मुआवजा दिलवाया। शिकायतों में यह दावा किया गया है कि केवल अभनपुर ही नहीं, बल्कि कायाबांधा (अभनपुर), दुर्ग, पाटन, राजनांदगांव के देवादा और मगरलोड जैसे क्षेत्रों में भी करोड़ों रुपए का मुआवजा संदिग्ध तरीके से वितरित किया गया।
इन आरोपों से संबंधित शिकायतें दस्तावेजों के साथ दर्ज कराई गई थीं, जिनके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने प्राथमिक जांच शुरू की और अब इसे व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
जमीन कारोबारी भी जांच के घेरे में
ईडी की कार्रवाई केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रही। जमीन कारोबारी गोपाल गांधी और उनसे जुड़े कई अन्य ठिकानों पर भी एक साथ छापेमारी की गई है। बताया जा रहा है कि इन लोगों की भूमिका जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में संदिग्ध पाई गई है।
इससे पहले भी रायपुर और अभनपुर क्षेत्र में ईडी ने गोपाल गांधी से जुड़े परिसरों पर छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज जब्त किए थे। अब ताजा कार्रवाई में उन कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
500 करोड़ से अधिक के घोटाले की आशंका
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण किया गया था। इसी प्रक्रिया में करीब 500 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस परियोजना में जमीन के मूल्यांकन और मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं।
जांच में सामने आईं चौंकाने वाली अनियमितताएं
प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोप है कि कृषि भूमि को बैकडेट में गैर-कृषि घोषित कर दिया गया, जिससे उसका मुआवजा कई गुना बढ़ गया।
इसके अलावा, एक ही खसरे की जमीन को कागजों में अलग-अलग हिस्सों में बांटकर विभिन्न लोगों के नाम पर भुगतान किया गया। इस तरह की प्रक्रियाओं से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाने की आशंका है।
सूत्रों का कहना है कि इस घोटाले में कई स्तरों पर मिलीभगत की संभावना है, जिसमें स्थानीय अधिकारियों, बिचौलियों और जमीन कारोबारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पहले भी हो चुकी हैं बड़ी कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय इससे पहले भी छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इस मामले को लेकर छापेमारी कर चुका है। जांच के दौरान करोड़ों रुपए की संपत्तियों को अटैच किया गया था।
ईडी की लगातार हो रही कार्रवाई से यह साफ है कि एजेंसी इस मामले को गंभीरता से ले रही है और पूरे नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश कर रही है।
अधिकारियों की चुप्पी, बढ़ी उत्सुकता
हालांकि इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। मीडिया से दूरी बनाए रखते हुए अधिकारी जांच पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।
इस बीच, राजनीतिक हलकों में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। चूंकि मामला एक पूर्व मंत्री के करीबी से जुड़ा है, इसलिए इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
माना जा रहा है कि इस छापेमारी के बाद आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो कई बड़े नाम इस मामले में सामने आ सकते हैं।
ईडी की कार्रवाई ने एक बार फिर यह संकेत दे दिया है कि भारतमाला परियोजना में हुए कथित घोटाले की परतें अभी खुलनी बाकी हैं।
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