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16th October 2026

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AI की ट्रेनिंग के लिए 20 लाख दुर्लभ किताबें खरीदने की तैयारी : स्कैनिंग के बाद किताबें नष्ट कर रहीं टेक कंपनियां; वजह- इंटरनेट पर इंसानी कंटेंट की कमी

News Affair Team

Wed, Aug 19, 2026

सैन फ्रांसिस्को.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इंसानों की तरह सोचने और लिखने में सक्षम बनाने की होड़ अब दुर्लभ और पुरानी किताबों तक पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ टेक कंपनियां आउट-ऑफ-प्रिंट और दुर्लभ किताबें खरीदकर उन्हें हाई-स्पीड स्कैनर से डिजिटल कर रही हैं। इसके बाद किताबों की मूल प्रतियों को नष्ट कर दिया जाता है।

इस पूरे अभियान को लेकर टेक इंडस्ट्री में सवाल भी उठ रहे हैं। खासकर इसलिए क्योंकि जिन किताबों को वर्षों तक सुरक्षित रखा गया, उनका इस्तेमाल AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए करने के बाद उनकी फिजिकल कॉपी खत्म की जा रही है।

एंथ्रोपिक की 20 लाख किताबें खरीदने की योजना

रिपोर्ट के मुताबिक, AI कंपनी Anthropic के आंतरिक दस्तावेजों में छह महीने के भीतर करीब 20 लाख किताबें खरीदने की योजना का जिक्र मिला है। इन किताबों को स्कैन कर AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डेटा में शामिल करने की तैयारी थी।

इस प्रक्रिया में किताबों की बाइंडिंग काटकर पन्नों को अलग किया जाता है। इसके बाद पन्नों को हाई-स्पीड स्कैनर से डिजिटल फॉर्म में बदला जाता है। स्कैनिंग पूरी होने के बाद मूल किताबों को दोबारा इस्तेमाल करने की स्थिति में नहीं रखा जाता।

‘प्रोजेक्ट पनामा’ के नाम से अभियान

जांच रिपोर्टों में इस अभियान को ‘प्रोजेक्ट पनामा’ नाम से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में किताबों को डिजिटल स्वरूप में बदलकर AI मॉडल के लिए उच्च गुणवत्ता वाला मानव-लिखित डेटा तैयार करना बताया गया है।

‘404 Media’ की जांच में करीब 1,000 दुर्लभ किताबों की एक खेप को ट्रैक किए जाने का भी दावा किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, ये किताबें Amazon के बुक-स्कैनिंग वेयरहाउस VGT तक पहुंचीं, जहां बड़े पैमाने पर किताबों की कटिंग और स्कैनिंग का काम किया जा रहा था।

AI को इंसानी डेटा की जरूरत क्यों?

AI मॉडल की क्षमता काफी हद तक उस डेटा पर निर्भर करती है, जिस पर उन्हें प्रशिक्षित किया जाता है। इंटरनेट पर उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाली मानव-लिखित सामग्री AI कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण डेटा स्रोत है।

लेकिन अब इंटरनेट पर AI से तैयार सामग्री की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में कंपनियों के सामने असली मानव-लिखित सामग्री को पहचानने और उसे प्रशिक्षण डेटा के रूप में सुरक्षित रखने की चुनौती बढ़ गई है।

AI के AI से सीखने पर ‘मॉडल कोलैप्स’ का खतरा

विशेषज्ञों के बीच एक बड़ी चिंता ‘मॉडल कोलैप्स’ को लेकर है। अगर नए AI मॉडल लगातार ऐसे डेटा से प्रशिक्षित होते रहें, जिसे पहले के AI मॉडल ने तैयार किया है, तो गलतियां और पूर्वाग्रह अगली पीढ़ी के मॉडल में दोहराए जा सकते हैं।

समय के साथ मॉडल की मौलिकता और प्रदर्शन प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसी वजह से मानव द्वारा तैयार किए गए मूल कंटेंट की अहमियत AI इंडस्ट्री में बढ़ रही है।

कानूनी तरीके से खरीदी किताब को नष्ट करना संभव

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में किसी व्यक्ति या कंपनी ने कोई किताब वैध तरीके से खरीदी है तो First-Sale Doctrine के तहत उस भौतिक कॉपी के साथ कुछ अधिकार मिलते हैं। इसी आधार पर कंपनियां किताबों को खरीदकर डिजिटल रूप में स्कैन करने और फिर मूल प्रति को नष्ट करने का रास्ता अपना सकती हैं।

हालांकि, किताब खरीद लेने से उसकी कॉपीराइट सामग्री को हर तरह से इस्तेमाल करने का अधिकार अपने आप नहीं मिल जाता। AI ट्रेनिंग में कॉपीराइट सामग्री के इस्तेमाल को लेकर अमेरिका में पहले से कई कानूनी विवाद चल रहे हैं।

किताब प्रेमियों ने जताई चिंता

दुर्लभ और ऐतिहासिक किताबों को स्कैनिंग के बाद नष्ट किए जाने की खबरों ने पुस्तक प्रेमियों और इतिहासकारों के बीच चिंता बढ़ा दी है। उनका तर्क है कि ऐसी किताबें केवल जानकारी का स्रोत नहीं होतीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत भी होती हैं।

AI कंपनियों के लिए जहां इन किताबों का डिजिटल डेटा भविष्य के मॉडल विकसित करने में उपयोगी हो सकता है, वहीं आलोचकों का सवाल है कि इसके लिए मूल और दुर्लभ किताबों को नष्ट करना कितना उचित है।

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