घरेलू LPG सिलेंडर के दाम ₹29 बढ़े : तीन महीने में ₹89 की बढ़ोतरी; सरकार बोली- दुनिया के मुकाबले भारत में अब भी सस्ती
नईदिल्ली.
महंगाई के मोर्चे पर आम उपभोक्ताओं को एक और झटका लगा है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹29 की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दरें रविवार रात 12 बजे से लागू हो गई हैं। इसके बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू गैस सिलेंडर ₹913 से बढ़कर ₹942 का हो गया है।
यह पिछले तीन महीनों में दूसरी बार है जब रसोई गैस की कीमतों में इजाफा किया गया है। इससे पहले 7 मार्च को सिलेंडर ₹60 महंगा हुआ था। नई बढ़ोतरी के साथ तीन महीने के भीतर घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत कुल ₹89 बढ़ चुकी है।
क्यों बढ़े दाम?
तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में तेज उछाल और घरेलू बिक्री पर बढ़ते नुकसान के कारण कीमतों में संशोधन करना पड़ा है।
ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच एलपीजी आयात की लागत लगातार बढ़ रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, ऐसे में वैश्विक कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
सरकार का दावा- दुनिया के मुकाबले भारत में गैस सस्ती
कीमत बढ़ने के बावजूद सरकार का कहना है कि भारतीय उपभोक्ताओं को दुनिया के कई देशों की तुलना में सस्ती रसोई गैस उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी के बाद एक सिलेंडर प्रभावी रूप से करीब ₹642 में मिल रहा है। वहीं पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में घरेलू गैस की कीमतें इससे काफी अधिक हैं।
सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय लागत बढ़ने के बावजूद पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को राहत
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रति सिलेंडर ₹300 की अतिरिक्त सब्सिडी मिलती है। यह लाभ वर्ष के शुरुआती चार रिफिल तक उपलब्ध रहता है।
देश में 10 करोड़ से अधिक परिवार इस योजना से जुड़े हुए हैं। सरकार का कहना है कि सब्सिडी के कारण गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को राहत मिल रही है।
हर सिलेंडर पर कंपनियों को घाटे का दावा
सूत्रों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने के बाद एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति लागत ₹1600 से अधिक पहुंच चुकी है।
इसके मुकाबले उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली कीमत काफी कम है। ऐसे में सरकारी तेल कंपनियों को प्रति सिलेंडर लगभग ₹700 तक की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले वित्त वर्ष में घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर लगभग ₹60 हजार करोड़ तक पहुंच गई। सरकार ने तेल कंपनियों को राहत देने के लिए आंशिक वित्तीय सहायता को भी मंजूरी दी है।
पश्चिम एशिया संकट का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधाओं ने एलपीजी की वैश्विक कीमतों को प्रभावित किया है।
भारत में एलपीजी आयात की कीमत सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) से जुड़ी होती है। फरवरी के मुकाबले जून तक यह अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क करीब 46 प्रतिशत तक बढ़ चुका है। इसके कारण आयात लागत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
होर्मुज मार्ग बना चिंता का कारण
भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट ऊर्जा आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। देश के एलपीजी आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है।
हालिया क्षेत्रीय तनाव के दौरान इस मार्ग को लेकर चिंताएं बढ़ीं, लेकिन सरकार का कहना है कि बेहतर समन्वय और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों के कारण देश में गैस की उपलब्धता प्रभावित नहीं हुई।
कॉमर्शियल सिलेंडर पहले ही महंगा हो चुका
घरेलू गैस से पहले होटल, रेस्टोरेंट और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी कई बार बढ़ोतरी की जा चुकी है।
दिल्ली में कॉमर्शियल सिलेंडर का दाम ₹3,100 से अधिक पहुंच चुका है। इसका असर खाद्य व्यवसायों और छोटे व्यापारियों की लागत पर भी पड़ रहा है।
पेट्रोल, डीजल और CNG भी हुए महंगे
पिछले कुछ सप्ताह में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ईंधन कीमतों में लगातार वृद्धि का असर परिवहन लागत और रोजमर्रा के खर्चों पर दिखाई देने लगा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक ऊर्जा बाजार में जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले महीनों में ईंधन और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

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