छत्तीसगढ़ राज्योत्सव पर विकास-संस्कृति की झलक : मांडविया बोले- छत्तीसगढ़ बना टूरिज्म हब; CM ने बताया नक्सलवाद का खात्मा बड़ी उपलब्धि
News Affair Team
Sun, Nov 1, 2026
रायपुर.
छत्तीसगढ़ के 26वें स्थापना दिवस पर रविवार से नवा रायपुर में तीन दिवसीय राज्योत्सव की शुरुआत हो गई है। उद्घाटन समारोह में प्रदेश की बदलती तस्वीर, नक्सलवाद के खात्मे और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि कभी छत्तीसगढ़ की पहचान नक्सलवाद से जुड़ी थी, लेकिन अब प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। मल्टीनेशनल कंपनियां भी यहां निवेश की इच्छुक हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नक्सलवाद के खात्मे को पिछले तीन साल की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।

पहले दिन भारतीय वायुसेना के एयर शो ने दर्शकों को रोमांचित किया। आकाशगंगा टीम के आठ जवानों ने C-295 विमान से करीब 8 हजार फीट की ऊंचाई से पैराशूट जंप किया। इसके बाद सारंग टीम के पांच हेलिकॉप्टरों ने आसमान में डायमंड, हार्ट और डॉल्फिन जैसी आकृतियां बनाईं। शाम को शिल्पग्राम मंच पर पंडवानी, लोकसंगीत, शास्त्रीय नृत्य और फ्यूजन बैंड की प्रस्तुतियां हुईं।
तस्वीरों में देखें राज्योत्सव...





मांडविया बोले- पर्यटन और निवेश की ओर बढ़ रहा छत्तीसगढ़

राज्योत्सव के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ का नाम आते ही नक्सलवाद की चर्चा होती थी। अब प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है और मल्टीनेशनल कंपनियां यहां निवेश करना चाहती हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पिछले तीन साल में नक्सलवाद का खात्मा प्रदेश की सबसे बड़ी उपलब्धि रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद विकास की राह में बड़ी बाधा था। खनिज संपदा और प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध होने के बावजूद प्रदेश के कई क्षेत्रों तक विकास नहीं पहुंच पा रहा था। डबल इंजन सरकार में इस चुनौती को दूर करने की दिशा में काम किया गया।
सारंग टीम ने आसमान में बनाए दिल और डायमंड


राज्योत्सव के पहले दिन सुबह भारतीय वायुसेना के एयर शो ने लोगों का ध्यान खींचा। आकाशगंगा टीम के 8 जवान C-295 विमान से करीब 8 हजार फीट की ऊंचाई से पैराशूट के जरिए नीचे उतरे। इसके बाद MI-17 हेलिकॉप्टर से जवानों ने रस्सी के सहारे उतरने का प्रदर्शन किया।
एयर शो में सारंग टीम के पांच हेलिकॉप्टरों ने अलग-अलग करतब दिखाए। हेलिकॉप्टरों ने आसमान में डायमंड, हार्ट और डॉल्फिन जैसी आकृतियां बनाईं। छत्तीसगढ़ में सारंग टीम का यह पहला प्रदर्शन था। आयोजन की सुरक्षा के लिए 700 से 800 पुलिस जवानों की तैनाती की गई।
पलक मुच्छाल के लोकप्रिय गीतों पर झूमे युवा

बॉलीवुड की पार्श्व गायिका पलक मुच्छाल की प्रस्तुति सांस्कृतिक संध्या का बड़ा आकर्षण रही। उनके लोकप्रिय गीतों की धुन पर युवा दर्शक झूमते नजर आए। पलक की सुरीली आवाज और मंचीय अंदाज ने कार्यक्रम में बॉलीवुड संगीत का रंग जोड़ दिया।
शिल्पग्राम मंच पर पंडवानी की गूंज, सुनाई महाभारत की कथा

राज्योत्सव के शिल्पग्राम मंच पर लोककला और संगीत की प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया। दुर्ग के श्री चेतन देवांगन और रायपुर की सुश्री दुर्गा साहू ने पंडवानी की प्रस्तुति दी। महाभारत की कथाओं को गायन, अभिनय और कथा-वाचन के जरिए मंच पर उतारा गया। पंडवानी की ओजस्वी प्रस्तुति कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही।
गिटार, फ्यूजन बैंड और शास्त्रीय नृत्य ने जोड़े संगीत के नए रंग

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पारंपरिक संगीत के साथ आधुनिक धुनों का मेल भी देखने को मिला। रायपुर के शिवेन्द्र मण्डावी ने लोकसंगीत और गिटार वादन की प्रस्तुति दी। राजीव श्रीवास्तव के नेतृत्व में रिदम ट्विंस बैंड और संतोष कुमार सिन्हा के फ्यूजन बैंड ने आधुनिक संगीत की धुनों से दर्शकों का मनोरंजन किया। अनुप्रिया सुल्ताना ने शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। भावपूर्ण मुद्राओं और लयबद्ध पदचाप के जरिए उन्होंने भारतीय नृत्य परंपरा की झलक पेश की।
आरू साहू ने छत्तीसगढ़ी लोकधुनों पर झुमाया
गायक अनुराग शर्मा ने प्रसिद्ध गीत ‘गीत कोनो गाहु तोर नाम के’ गाकर छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत का रंग घोल दिया। इसके बाद रिदम क्वीन बैंड ने अपनी संगीतमय प्रस्तुति से माहौल में उत्साह भर दिया। लोक गायिका आरू साहू ने भक्तिमय गीत से अपनी प्रस्तुति शुरू की। इसके बाद छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। उनकी आवाज और गीतों पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साह जताया।
लावणी से लेकर पंडवानी तक, शिल्पग्राम मंच पर दिखी सांस्कृतिक विविधता
शिल्पग्राम मंच पर महाराष्ट्र के पारंपरिक लावणी नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को आकर्षित किया। पारंपरिक वेशभूषा, लयबद्ध नृत्य और भावपूर्ण मुद्राओं के जरिए कलाकारों ने महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति की झलक दिखाई।
छत्तीसगढ़ की लोकगाथा पंडवानी में दुर्ग के चेतन देवांगन और रायपुर की दुर्गा साहू ने महाभारत के प्रसंगों को गायन, कथा-वाचन और अभिनय के जरिए प्रस्तुत किया। वहीं, रायपुर के शिवेन्द्र मण्डावी ने लोकसंगीत के साथ गिटार वादन किया। राजीव श्रीवास्तव के नेतृत्व में रिदम ट्विंस बैंड और संतोष कुमार सिन्हा के फ्यूजन बैंड ने आधुनिक संगीत की धुनें पेश कीं।
अनुप्रिया सुल्ताना ने शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। दुर्ग की रजनी रजक ने लोकमंच और ढोलमारू के जरिए पारंपरिक लोकगाथाओं को मंच पर उतारा। बिलासपुर की वंदिता साहू ने लोकसंगीत और पायल साहू ने लोकमंच की प्रस्तुति दी।
राज्योत्सव की सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं के साथ दूसरे राज्यों की कला और आधुनिक संगीत का संगम देखने को मिला। कलाकारों की प्रस्तुतियों और दर्शकों के उत्साह ने पहले दिन के आयोजन को यादगार बना दिया।
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