ED रेड के बाद हरीश रावत का बड़ा फैसला : बोले- मेरे किसी मामले से कांग्रेस की लड़ाई कमजोर होती है तो पद छोड़ दूंगा
News Affair Team
Sat, Sep 12, 2026
देहरादून.
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने सहयोगी और पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद बड़ा राजनीतिक कदम उठाने की पेशकश की है। रावत ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखकर कहा कि अगर उनके किसी मामले की वजह से भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस की लड़ाई कमजोर होती है, तो वह पार्टी में मिली अपनी दोनों जिम्मेदारियों से हटना चाहते हैं।
रावत फिलहाल कांग्रेस प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं। उन्होंने साफ किया कि वह कांग्रेस की सदस्यता नहीं छोड़ रहे हैं।
10 सितंबर को ED ने चंदन सिंह जीना के देहरादून स्थित ठिकाने पर छापेमारी की थी। एजेंसी ने करीब 1.28 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त और फ्रीज करने की जानकारी दी थी। जीना वर्तमान में हरीश रावत के पर्सनल असिस्टेंट (PA) हैं और 2014 से 2017 के बीच रावत के मुख्यमंत्री रहते OSD भी रह चुके हैं।
‘इस्तीफे का सवाल नहीं, मैं सरकारी पद पर नहीं हूं’
हरीश रावत ने कहा कि वह इस समय किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए वहां से इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि चंदन सिंह जीना उनके OSD रह चुके हैं और उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान पार्टी तथा सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते थे। जीना पर लगे मौजूदा आरोपों को लेकर रावत ने कहा कि फिलहाल उन्हें इन आरोपों पर विश्वास नहीं है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक तथ्य सामने आएंगे।
‘चुनाव से पहले CBI मेरे दरवाजे पर दस्तक देगी’
रावत ने अपनी पोस्ट में आगामी विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब लोग उनसे चुनाव की तारीख पूछते थे तो वह मजाक में कहते थे कि चुनाव तब होंगे, जब CBI उनके दरवाजे पर दस्तक देगी।
रावत के मुताबिक इस बार उनके घर की बजाय एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर चुनाव से पहले एक नरेटिव बनाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड चुनाव में बहुत कुछ दांव पर लगा है और कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूती से लड़ रहे हैं।
‘मेरे खिलाफ सबूत हैं तो जांच एजेंसियों को दें’
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में हुई सरकारी भर्तियों का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। रावत के मुताबिक उनके करीब तीन साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल में 42 हजार से ज्यादा सरकारी पदों पर भर्तियां हुई थीं।
उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में कोई ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ हो तो वह उत्तराखंड की जनता से माफी मांगते हैं। हालांकि व्यक्तिगत हस्तक्षेप के आरोपों को लेकर उन्होंने चुनौती दी कि यदि किसी के पास उनकी संलिप्तता के प्रमाण हैं तो उन्हें CBI, ED या राज्य पुलिस को सौंपा जाना चाहिए।
UKSSSC चेयरमैन की नियुक्ति पर भी दी सफाई
रावत ने अपने कार्यकाल में UKSSSC के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पूर्व सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी। इस संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी से भी उन्हें सलाह मिली थी।
रावत ने दावा किया कि शिकायत मिलने के बाद उन्होंने ही संबंधित व्यक्ति को पद से हटाया था या उनसे इस्तीफा मांगा था। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के भविष्य में गलत आचरण करने का अनुमान पहले से लगाना संभव नहीं है।
‘भर्ती में गड़बड़ी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़’
रावत ने कहा कि सरकारी नियुक्तियों और परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी राज्य की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि अगर जाने-अनजाने में उनकी ओर से ऐसा कोई कृत्य हुआ है, जिससे युवाओं के भविष्य पर असर पड़ा हो, तो वह खुद को जवाबदेही और दंड का पात्र मानेंगे।
साथ ही उन्होंने दोहराया कि अगर किसी के पास भर्ती या नियुक्तियों में उनके हस्तक्षेप अथवा संलिप्तता के प्रमाण हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखा जाना चाहिए। कानून से ऊपर कोई नहीं है।
ED ने जीना के घर से नकदी, सोना और लग्जरी घड़ियां मिलने की बात कही
ED की कार्रवाई UKSSSC की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) परीक्षा-2016 में कथित OMR हेरफेर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई थी। ED के मुताबिक चंदन सिंह जीना के घर से करीब 32 लाख रुपए की बेहिसाबी नकदी, 200.5 ग्राम सोना और 52.16 लाख रुपए के बैंक बैलेंस को फ्रीज किया गया। एजेंसी ने 12 लग्जरी घड़ियां भी बरामद करने की बात कही है।
बरामद सोने में 13 गोल्ड कॉइन और 7 गोल्ड चेन शामिल हैं। घड़ियों में Rolex, Rado, Piaget, Movado, Tissot और Casio Edifice जैसे ब्रांड बताए गए हैं। ED ने जीना का मोबाइल फोन भी जब्त किया है, जिसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। एजेंसी के अनुसार जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों का मौजूदा मूल्य करीब 1.28 करोड़ रुपए है। इसमें 12 लग्जरी घड़ियों की कीमत शामिल नहीं है।
OMR शीट सुरक्षित कस्टडी से निजी घर पहुंचाने का आरोप
ED की जांच VPDO परीक्षा-2016 में OMR शीट से कथित छेड़छाड़ से जुड़ी है। एजेंसी के मुताबिक UKSSSC की सुरक्षित कस्टडी में रखी OMR शीट को कथित तौर पर आयोग के तत्कालीन सचिव के निजी आवास तक पहुंचाया गया।
जांच के अनुसार यहां कम भरी गई OMR शीट के रोल नंबर नोट किए गए और उन्हें निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों तक पहुंचाया गया। आरोप है कि खाली छोड़े गए उत्तरों के गोले भरकर OMR शीट में हेरफेर की गई और बाद में उन्हें दोबारा सील कर दिया गया। ED का दावा है कि यह पूरा काम अवैध रकम के बदले किया गया और पैसा बिचौलियों के जरिए पहुंचाया गया।
पूर्व अधिकारियों और बिचौलियों के ठिकानों पर भी छापे
ED ने तत्कालीन UKSSSC अध्यक्ष, सचिव, परीक्षा नियंत्रक, निजी कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और मामले से जुड़े बिचौलियों के परिसरों की भी तलाशी ली। एजेंसी के मुताबिक कई ठिकानों से बेहिसाबी नकदी और सोने के आभूषण मिले हैं। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच देहरादून विजिलेंस में दर्ज FIR और इससे जुड़े तीन अन्य मामलों के आधार पर की जा रही है। मामले की जांच अभी जारी है।
‘कांग्रेस की सदस्यता मेरे खून और हड्डियों में’
ED की कार्रवाई के बाद रावत ने एक और सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कांग्रेस पार्टी की सदस्यता उनके लिए सिर्फ राजनीतिक पहचान नहीं है। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस की सदस्यता उनके ‘खून और हड्डियों’ में है और हरीश रावत जो कुछ भी हैं, उसका निर्माण कांग्रेस ने किया है।
उन्होंने फिर स्पष्ट किया कि देहरादून में ED की कार्रवाई के बाद उन्होंने केवल कांग्रेस प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य और AICC वर्किंग कमेटी के स्थायी आमंत्रित सदस्य पद से हटने की पेशकश की है। उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है। रावत ने मीडिया से भी उनकी पूरी पोस्ट पढ़कर खबर प्रकाशित करने की अपील की है।
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन