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सीतापुर में मंदिर की मूर्ति हटाने पर बवाल : ग्रामीणों ने नायब तहसीलदार सहित राजस्व टीम को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा; गांव में तनाव, फोर्स तैनात

News Affair Team

Sun, Jun 1, 2025

सीतापुर.

शनिवार दोपहर सीतापुर जिले के रामपुर मथुरा थाना क्षेत्र के गांव सरैया मसूदपुर में उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब राजस्व विभाग की टीम द्वारा मंदिर में स्थापित भगवान बालाजी की मूर्ति हटाने पर ग्रामीणों ने विरोध करते हुए बवाल कर दिया। मामला इतना बढ़ गया कि ग्रामीणों ने नायब तहसीलदार राकेश कुमार, ग्राम प्रधान राधेलाल और उनकी टीम पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। तहसीलदार को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग की टीम ने फावड़े और बेलचे से जबरन मूर्ति को हटाया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि ग्राम प्रधान राधेलाल ने जानबूझकर मंदिर की भूमि को श्मशान घाट घोषित करने की साजिश रची और उसी के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई।

गांव में पुलिस बल तैनात, तनाव बरकरार

घटना के बाद गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई थी, जिसे काबू में करने के लिए प्रशासन को तुरंत अतिरिक्त फोर्स बुलानी पड़ी। फिलहाल हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है।

तीन लोगों को मामूली चोटें, प्रधान पक्ष ने दी सफाई

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि प्रदीप कुमार ने बताया कि विवादित भूमि पर श्मशान घाट पहले से दर्ज है और चकबंदी के समय से ही गाटा संख्या में इसका उल्लेख है। उन्होंने कहा कि उस समय मौके पर प्रधान पक्ष का कोई नहीं था, केवल मजदूर काम कर रहे थे। उनके अनुसार, मारपीट में तीन लोगों को हल्की चोटें आई हैं, जिनका इलाज करा दिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण महिलाओं ने नायब तहसीलदार पर भी हमला कर दिया।

ग्रामीण बोलेहमारी धार्मिक भावनाएं आहत

गांव के संजय गिरी सहित कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्राचीन मंदिर के पास श्मशान घाट बनाया जा रहा था, जबकि यह स्थान धार्मिक रूप से पवित्र है और यहाँ हर वर्ष मेला भी लगता है। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में किसी दुर्घटना में मृत्यु होती है, तो मेले के दौरान अंतिम संस्कार नहीं किया जा सकेगा। जब बार-बार मना करने के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रोका गया, तो ग्रामीणों ने खुद मंदिर स्थापित कर मूर्ति रख दी।

शनिवार को जब राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मूर्ति हटाने लगी, तो इसका विरोध हुआ और माहौल हिंसक हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग है कि श्मशान घाट कहीं और स्थानांतरित किया जाए।

प्रशासन का पक्षनिर्माण कार्य पर लगी रोक

एएसपी दक्षिणी दुर्गेश कुमार ने बताया कि मंदिर के पास श्मशान घाट का निर्माण कराया जा रहा था, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया है। फिलहाल निर्माण कार्य रुकवा दिया गया है और मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। प्रशासन की ओर से यह तय किया जाएगा कि निर्माण स्थल को बदला जाए या नहीं।

वहीं नायब तहसीलदार राकेश कुमार ने सभी आरोपों को झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि टीम केवल बातचीत के लिए गई थी, लेकिन कुछ लोग पहले से माहौल बिगाड़ने के लिए तैयार बैठे थे।

नायब तहसीलदार की सफाई

नायब तहसीलदार राकेश कुमार ने कहा कि ग्रामीणों के आरोप निराधार हैं। टीम केवल श्मशान घाट निर्माण में रही बाधाओं को समझने के लिए गई थी। कुछ लोगों ने विरोध किया, जिससे हल्का विवाद हुआ।

मूर्ति हटाने पर ग्रामीणों का विरोध

ग्रामीणों ने बताया कि विवादित भूमि पर एक मंदिर पहले से स्थापित था, जहां भगवान बालाजी की मूर्ति स्थापित की गई थी। आरोप है कि ग्राम प्रधान राधेलाल ने उस ज़मीन को श्मशान घाट घोषित करवाने की साजिश रची, और प्रशासनिक कार्रवाई उसी के इशारे पर की गई।

जब राजस्व टीम मूर्ति को हटाने पहुंची, तो ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। आरोप है कि प्रधान पक्ष के लोगों ने पथराव और लाठी-डंडे चलाए, जिससे कई ग्रामीण घायल हो गए।

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