पाकिस्तान में फसल बर्बादी का खतरा : सिंधु नदी में जल प्रवाह 21% घटा; चीन की भारत को धमकी, कहा- हम भी रोक सकते हैं ब्रह़मपुत्र का पानी
इंटरनेशनल डेस्क.
पाकिस्तान इस समय भीषण जल संकट का सामना कर रहा है। सिंधु नदी सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) की रिपोर्ट के अनुसार, सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों में जल प्रवाह में 21% की गिरावट आई है, जिससे खरीफ सीजन की बुवाई पर असर पड़ा है।
2 जून 2025 को पंजाब प्रांत में पानी की उपलब्धता केवल 1,28,800 क्यूसेक रही, जो पिछले साल से 14,800 क्यूसेक कम है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सिंधु प्रणाली में जल उपलब्धता 10.3% घट चुकी है।
मानसून में देरी, बिजली संकट और बढ़ी परेशानी
खैबर पख्तूनख्वा के मंगला और तरबेला बांध, जो देश के प्रमुख हाइड्रोपावर स्रोत हैं, उनमें पानी का स्तर 50% से नीचे चला गया है। इससे न सिर्फ बिजली उत्पादन, बल्कि घरेलू जल आपूर्ति और औद्योगिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
पाकिस्तान में मानसून पहुंचने में अभी कम से कम 4 हफ्ते का समय है। वहीं, देश के ऊपर बना एंटी-साइक्लोन गर्मी को और बढ़ा रहा है। बलूचिस्तान के इलाकों में 16 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों पर असर पड़ रहा है।
भारत ने जल प्रवाह आंकड़े साझा करने बंद किए
22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद 65 साल पुरानी सिंधु जल संधि को स्थगित किया गया।
इसके बाद 7 मई को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी। संघर्ष के 4 दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने 10 मई को सीजफायर की घोषणा की।
4.7 करोड़ एकड़ कृषि भूमि सिंधु प्रणाली पर निर्भर
कृषि क्षेत्र का योगदान राष्ट्रीय आय में 23%
68% ग्रामीण आबादी की आजीविका इससे जुड़ी
जल संकट के कारण पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा, बिजली उत्पादन (30%-50% गिरावट) और रोजगार सभी क्षेत्रों पर संकट मंडरा रहा है।

चीन ने दी चेतावनी: "ब्रह्मपुत्र का पानी भी रोक सकते हैं"
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते जल विवाद पर अब चीन की ओर से परोक्ष धमकी सामने आई है। बीजिंग स्थित सेंटर फॉर चाइना एंड ग्लोबलाइजेशन के उपाध्यक्ष विक्टर गाओ ने कहा है कि- “अगर भारत सिंधु जल समझौते को तोड़ता है और पड़ोसी देशों के साथ जल संबंधों को राजनीतिक रंग देता है, तो उसे खुद भी भुगतना पड़ सकता है।”
विक्टर गाओ ने इशारों में ब्रह्मपुत्र नदी पर नियंत्रण की बात करते हुए कहा कि भारत को “वैसा बर्ताव नहीं करना चाहिए, जैसा वह खुद के साथ नहीं चाहता।”
सिंधु जल संधि का निलंबन, मानसून की देरी, और बिजली संकट ने पाकिस्तान की आर्थिक व कृषि स्थिति को गंभीर बना दिया है। वहीं, अब चीन की चेतावनी से भारत की रणनीतिक चुनौती और बढ़ सकती है, जिससे दक्षिण एशिया में जल संकट एक भूराजनीतिक टकराव में बदल सकता है।
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